लखनऊ में बाढ़ और हुई विकराल

जलभराव से डुबे इकाना व पलासियो मॉल

  • फैजुल्लागंज में 40 हजार घरों पर संकट
  • 10वें दिन भी बढ़ रहा गोमती का जलस्तर
  • बैकुंठ धाम और फैजुल्लागंज में हालात गंभीर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर लगातार 10वें दिन भी बढऩे से राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। पलासियो मॉल के आसपास की सडक़ें पानी से घिरकर टापू जैसी हो गई हैं। यहां घुटनों तक पानी भरा है। वहीं इकाना स्टेडियम और आपदा प्रबंधन कार्यालय तक भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। बाढ़ का असर आईआईआईटी परिसर तक पहुंच गया है। जलभराव को देखते हुए संस्थान को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है, जबकि परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। बैकुंठ धाम भी पूरी तरह जलमग्न है। यहां शव रखने के लिए बनाए गए चबूतरे तक पानी में डूब गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर पर लगातार फोन किए जाने के बावजूद समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है। फैजुल्लागंज में बाढ़ ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 40 हजार घरों में पांच से छह फीट तक पानी भर गया है। पानी बढऩे के कारण बड़ी संख्या में परिवार घर छोडक़र सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और जरूरी वस्तुओं के खराब होने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

खाना-पानी नहीं मिलने से नाराजगी

फैजुल्लागंज में प्रभावित लोगों का कहना है कि समय पर खाना और पीने का पानी नहीं पहुंच रहा है। राहत सामग्री और मदद को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी दौरान राहत पहुंचाने पहुंची हृष्ठक्रस्न टीम और स्थानीय लोगों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी सामने आई। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अब लोगों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित निकासी, भोजन, पीने के पानी और राहत सामग्री की है।

बाढ़ को लेकर पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने मेयर पर साधा निशाना

लखनऊ के फैजुल्लागंज में आई बाढ़ पर मेयर महोदया की उदासीनता और अनदेखी पर कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने निशाना साधा है। पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने कहा कि फैजुल्लागंज में पिछले 10 दिन से बाढ़ की भयावह स्थिति बनी है, घरों के भीतर पानी है। लोगों की गृहस्थी पानी में डूबी है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं परेशान हैं। हजारों परिवार इस संकट से जूझ रहे हैं। लेकिन मेयर महोदया न लोगों की स्थिति और दर्द को जानने की जरूरत नही समझी, सवाल सिर्फ पानी की निकासी का नहीं है , सवाल यह भी है कि फैजुल्लागंज नगर निगम का क्षेत्र है और शहर की मेयर महोदया कहां हैं ?नगर निगम की जिम्मेदारी सिर्फ सडक़, नाली और सफाई तक सीमित नहीं होती। जब किसी इलाके की बड़ी आबादी लगातार आपदा जैसी स्थिति में फंस जाए, तब शहर के प्रथम नागरिक से जनता स्वाभाविक रूप से उम्मीद करती है कि वह मौके पर पहुंचे, लोगों की सुने और प्रशासन पर दबाव बनाए। श्री चौहान ने कहा कि बाढ़ पीड़ित लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, राहत कब मिलेगी के साथ यह भी सवाल है कि संकट की इस घड़ी में उनके साथ उनकी मेयर महोदया क्यों नही खड़ी दिखीं, आखिर राहत के साथ संवेदनशीलता की भी जरूरत है , लेकिन मेयर महोदया ने मौके पर पहुंचकर लोगों का दुख दर्द बाटना मुनासिब नही समझा ।

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