गुजरात विधानसभा LIVE क्यों बंद? चैतर वसावा के सवालों से गरमाई राजनीति, BJP सरकार पर उठे सवाल

गुजरात विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण बंद होने को लेकर राजनीति तेज हो गई है... AAP विधायक चैतर वसावा ने इस मुद्दे पर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात विधानसभा के सत्रों का लाइव प्रसारण क्यों बंद है.. इस सवाल ने हाल ही में राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है.. आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है.. और उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए.. विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण नहीं कर रही है.. जिसको लेकर चैतर वसावा का कहना है कि देश की लगभग सभी विधानसभाओं, लोकसभा.. और राज्यसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण होता है.. लेकिन गुजरात में ऐसा नहीं है.. वे कहते हैं कि भाजपा को डर है कि कहीं गुजरात मॉडल की असलियत जनता के सामने न आ जाए.. आपको बता दें कि यह मुद्दा पारदर्शिता, लोकतंत्र और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा है.. चैतर वसावा की इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है..

आपको बता दें कि चैतर वसावा गुजरात के डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र से AAP के विधायक हैं.. वे आदिवासी समुदाय से आते हैं.. और राज्य की राजनीति में आदिवासी मुद्दों पर मुखर रहते हैं.. 6 फरवरी 2026 को उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट में यह मुद्दा उठाया.. और उन्होंने लिखा कि गुजरात विधानसभा सत्र का लाइव प्रसारण न करके भाजपा अपनी नाकामियां छिपा रही है.. वे कहते हैं कि देश की अन्य विधानसभाओं, लोकसभा.. और राज्यसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाता है.. लेकिन गुजरात में ऐसा नहीं है.. चैतर वसावा का तर्क है कि भाजपा गुजरात मॉडल के नाम पर सत्ता में आई है.. लेकिन अब डर रही है कि लाइव प्रसारण से इस मॉडल की सच्चाई सामने आ जाएगी.. उनकी यह पोस्ट हजारों लोगों ने देखी.. जिससे बहस और तेज हो गई.. चैतर वसावा पहले भी भाजपा सरकार पर आदिवासी अधिकार, वन अधिकार.. और विकास की कमी जैसे मुद्दों पर हमला बोलते रहे हैं..

वहीं गुजरात विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण क्यों नहीं होता.. यह सवाल कई वर्षों से उठता रहा है.. गुजरात विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर कोई लाइव स्ट्रीमिंग लिंक उपलब्ध नहीं है.. विधानसभा के सत्रों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होती है.. लेकिन रियल टाइम में जनता इसे नहीं देख सकती.. 2021 में गुजरात हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी.. जिसमें विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण.. और ऑनलाइन दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई थी.. लेकिन विधानसभा ने इसका विरोध किया.. और कहा कि क्या जानकारी प्रकाशित करनी है.. यह उसका विवेकाधिकार है.. अदालत ने भी इस पर कोई सख्त आदेश नहीं दिया.. 2023 में गुजरात विधानसभा के स्पीकर शंकर चौधरी ने कहा था कि वे लाइव स्ट्रीमिंग पर विचार कर रहे हैं.. और कोई बड़ी बाधा नहीं है.. और उन्होंने कहा कि कई अन्य विधानसभाएं यह कर रही हैं.. लेकिन गुजरात में अभी नहीं हो रहा है.. और 2026 तक भी स्थिति नहीं बदली है.. जैसा कि चैतर वसावा के बयान से स्पष्ट होता है..

चैतर वसावा का दावा है कि सभी विधानसभाओं का लाइव प्रसारण होता है.. लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है.. लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण संसद टीवी पर होता है.. कई राज्य विधानसभाएं जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल.. और आंध्र प्रदेश अपनी कार्यवाही का लाइव प्रसारण आधिकारिक चैनलों या यूट्यूब पर करती हैं.. दिल्ली विधानसभा के सत्र यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम होते हैं.. और महाराष्ट्र विधानसभा भी लाइव प्रसारित होती है.. लेकिन कुछ राज्य, जैसे गुजरात, उत्तर प्रदेश.. और कुछ अन्य में अभी पूर्ण लाइव प्रसारण नहीं है.. उत्तर प्रदेश विधानसभा के कुछ सत्र लाइव होते हैं.. लेकिन सभी सत्र लाइव नहीं होते हैं.. गुजरात में रिकॉर्डेड वीडियो बाद में उपलब्ध होते हैं.. लेकिन लाइव प्रसारण नहीं होता.. राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन के तहत कई विधानसभाएं डिजिटल हो रही हैं.. लेकिन गुजरात में लाइव प्रसारण अभी शुरू नहीं हुआ है..

वहीं चैतर वसावा का आरोप है कि भाजपा अपनी नाकामियां छिपा रही है.. गुजरात मॉडल को लेकर वे कहते हैं कि भाजपा इस मॉडल के नाम पर सत्ता में आई है.. लेकिन लाइव प्रसारण से इसकी असलियत सामने आ सकती है.. गुजरात मॉडल का मतलब विकास, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर.. और आर्थिक प्रगति से जोड़ा जाता है.. नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते यह मॉडल चर्चित हुआ था.. लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसमें असमान विकास है.. शहरों में विकास अधिक दिखता है.. जबकि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में बेरोजगारी, पानी की कमी, किसानों की समस्याएं.. और स्वास्थ्य-शिक्षा से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.. चैतर वसावा आदिवासी क्षेत्र से आते हैं.. इसलिए वे इन मुद्दों पर खास ध्यान देते हैं.. उनका कहना है कि विधानसभा में इन मुद्दों पर चर्चा होती है.. लेकिन जनता लाइव नहीं देख पाती.. जिससे सरकार की जवाबदेही कम हो जाती है.. AAP का कहना है कि लाइव प्रसारण से पारदर्शिता बढ़ेगी.. और जनता सरकार की वास्तविक स्थिति समझ सकेगी..

आपको बता दें कि भाजपा ने चैतर वसावा के आरोपों पर सीधे तौर पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया है.. लेकिन पार्टी हमेशा कहती रही है कि गुजरात मॉडल सफल है.. और राज्य में लगातार विकास हो रहा है.. स्पीकर शंकर चौधरी ने 2023 में कहा था कि.. लाइव स्ट्रीमिंग पर विचार चल रहा है.. और कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं है.. उनका कहना है कि विधानसभा की कार्यवाही रिकॉर्डेड रूप में उपलब्ध है.. और जनता को जानकारी मिलती रहती है.. लेकिन आलोचकों का मानना है कि लाइव प्रसारण न होने से सरकार पर सार्वजनिक दबाव कम होता है.. गुजरात में भाजपा 2001 से सत्ता में है.. और विधानसभा में विपक्ष अपेक्षाकृत कमजोर रहा है.. 2022 चुनाव में भाजपा को 156 सीटें मिलीं.. जबकि AAP को 5 और कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं..

 

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