इंडिया गठबंधन के आंदोलन से घबराए ज्ञानेश कुमार, जल्द देंगे इस्तीफा
राहुल-प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लेकर बस में बैठाया, तो वे उतरकर आकाशवाणी बिल्डिंग में घुस गए। दोनों आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठे हैं और चुनाव आयोग तक जाने की मांग पर अड़े हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इन दिनों देश में एक विरोधी लहर चल रही है। देश की जनता जान चुकी है कि उसे कैसे मूर्ख बनाया जा रहा है। चुनाव आयोग के साथ मिलकर बीजेपी कैसे इलेक्शन को हैक कर चुकी है और जीत रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आने के बाद देश की जनता सड़कों पर है ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही है लेकिन ज्ञानेश मोदी-शाह के वो जिन्न जिन्हे वो कुछ होने नहीं देना चाहते। लेकिन विपक्ष भी हार मानने को तैयार नहीं है। तभी तो आज एक बार फिर दिल्ली में ‘इंडिया’ ब्लॉक के 19 विपक्षी दलों के सांसदों और नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए चुनाव आयोग के मुख्यालय का घेराव करने के लिए एक मार्च निकाला।
वहीं इसी बीच ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी पार्टियों के सेव डेमोक्रेसी मार्च को पुलिस ने रोक दिया है। राहुल-प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लेकर बस में बैठाया, तो वे उतरकर आकाशवाणी बिल्डिंग में घुस गए। दोनों आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठे हैं और चुनाव आयोग तक जाने की मांग पर अड़े हैं।
आकाशवाणी से आयोग का ऑफिस 270 मीटर दूर है। विपक्ष ने नई संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन को दोपहर एक बजे तक तीन घंटे हो गए। पुलिस ने विपक्षी सांसदों को तीन बार रोका। इस दौरन राहुल हाथ में तिरंगा लेकर बैरिकेड्स पर चढ़ गए। राहुल ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ का पोस्टर लिए दिखे। चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में पिछले पांच दिनों में सातवां प्रदर्शन है।
इंडिया गठबंधन के मार्च में विपक्षी सांसदों ने आरएसएस की यूनिफॉर्म पहने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कटआउट लिए हुए थे। जंतर-मंतर और उसके आस-पास दिल्ली पुलिस के बड़ी संख्या में जवान तैनात किए गए हैं। चुनाव आयोग के ऑफिस के बाहर और आस-पास की कई जगहों पर बैरिकेड भी लगाए गए हैं।
किसी भी तरह की गड़बड़ी या कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए पुलिस आने-जाने वाले लोगों और गाड़ियों पर भी नजर रख रही है। पुलिस ने सुरक्षा बलों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया है। वहीं इसी बीच नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है।
इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। खरगे ने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगी।
इसी प्रदेशन के दौरान सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “पहले भी चुनाव आयोग पर आरोप लगे हैं, चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022, 2024 में बेईमानी की और बंगाल में पूरा का पूरा खुला खेल किया…चंडीगढ़ चाल कौन भूल जाएगा?” वहीं इससे पहले जब धरने के लिए वो पहुंचे तब उन्होंने ज्ञानेश और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला।
विरोध-प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “देश के नेता प्रतिपक्ष को चुनाव आयोग तक जाने नहीं दिया जा रहा है, उन्हें रोक दिया गया है. हम सभी आकाशवाणी परिसर में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी में लोकतंत्र की यह हालत है. हम यहां इंतज़ार करते रहेंगे.”
इसी कड़ी में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन को लेकर कहा कि विपक्षी दलों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला था। उन्होंने बताया कि मार्च चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाना था, लेकिन आकाशवाणी भवन और पुराने योजना आयोग भवन के बीच पुलिस ने रोक दिया। लेकिन यह आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली होगी। इसके अलावा हर ब्लॉक में पदयात्रा और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
इंडिया गठबंधन के इस प्रदर्शन के बीच आप नेता सौरभ भारद्वाज का बड़ा दावा सामने आया। सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि उनके सूत्रों के मुताबिक ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. उनके इस दावे के बाद चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है. सौरभ भारद्वाज ने जिस तारीख का जिक्र किया है, उसी 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.
सीजेपी लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाती रही है. पार्टी का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर पर रोक के बिना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे. गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। उनके इस्तीफे को लेकर विपक्ष सड़कों पर है।



