आतंकवाद पर जयशंकर का कड़ा संदेश, बोले- कुछ देश अब भी कर रहे इस्तेमाल
विदेश मंत्री ने कहा कि इस संगठन को केवल एक मूक दर्शक बने रहने के बजाय, वैश्विक संकटों से निपटने में मजबूत नेतृत्व दिखाना चाहिए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल किसी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में करना पूरी तरह अस्वीकार्य है. साथ ही इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता.
आतंकवाद शांति के लिए एक और गंभीर खतरा है. किसी देश की नीतियों और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है. इसे न तो सही ठहराया जा सकता है और न ही इसका बचाव किया जा सकता है.
फिर भी, आतंकवाद बना हुआ है क्योंकि सभी देश वास्तव में इसके प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति नहीं अपनाते हैं. ये बातें विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल कॉन्फ्रेंस’ में कहीं.
इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी. संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आलोचना करते हुए, विदेश मंत्री ने कहा कि इस संगठन को केवल एक मूक दर्शक बने रहने के बजाय, वैश्विक संकटों से निपटने में मजबूत नेतृत्व दिखाना चाहिए.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल किसी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में करना पूरी तरह अस्वीकार्य है, साथ ही इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके पक्ष में कोई तर्क दिया जा सकता है.
बिना नाम लिए पाकिस्तान पर बरसे
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बगैर कहा कि इतिहास में आतंकवाद से जुड़े कई सबक मिलने के बावजूद कुछ देश अब भी राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं. शांति के महत्व पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष हो रहे हैं.
संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान
केंद्रीय मंत्री ने कहा, आइए, शांति की अविभाज्यता पर विचार करें. कहीं भी युद्ध होना, हर जगह शांति के लिए खतरा है. उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत जब यह कहता है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान हैं, तो वह वैश्विक भावना को व्यक्त करता है.
दुनिया का एक हिस्सा ‘4F संकट’ से जूझ रहा
विकासशील देशों के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए, एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया का यह हिस्सा फिलहाल ‘4F संकट’ से जूझ रहा है, जिसमें फाइनेंस (वित्त), फ्यूल (ईंधन), फूड (खाद्य) और फर्टिलाइजर (उर्वरक) शामिल हैं.
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि इन समस्याओं को सुलझाने में विकसित देशों की भी बराबर की जिम्मेदारी है. बाजार के गलत और संकुचित तौर-तरीके आम जनता की कठिनाइयों को और बढ़ा रहे हैं; इसलिए, इस विषय पर एक गंभीर और ईमानदार बातचीत की तत्काल आवश्यकता है.



