FIR दर्ज होने पर जिग्नेश मेवाणी का बड़ा बयान, कहा- ये मेरे लिए मेडल है
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने FIR दर्ज होने के बाद बड़ा बयान दिया है… मेवाणी ने कहा कि ये मेरे लिए मेडल है... उनके इस बयान...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गांधीनगर नगर निगम चुनाव के दौरान उत्पन्न हुए विवाद ने एक बार फिर गुजरात की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है.. वडगाम से कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरा मामला चर्चा का विषय बन गया है.. पुलिस का आरोप है कि मेवाणी और उनके समर्थकों ने पेथापुर पुलिस स्टेशन में हंगामा किया.. सरकारी कामकाज में बाधा डाली तथा पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया.. इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर विवादित वीडियो.. और बयान साझा करने का भी आरोप लगाया गया है.. मेवाणी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए साफ कहा कि वे सरकार या पुलिस से नहीं डरते.. और एफआईआर उनके लिए एक मेडल के समान है.. वहीं यह घटना नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान शुरू हुई थी.. जब वार्ड नंबर चार से कांग्रेस उम्मीदवार यूनुस परमार के समर्थक मुनाफ पठान पर दूसरे उम्मीदवार के प्रचारक निलेश पंचाल को धमकी देने का आरोप लगा..
शिकायत के अनुसार मुनाफ पठान ने प्रचारक से कहा था कि यह उनका इलाका है.. और यहां बिना अनुमति प्रचार करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.. इस शिकायत के आधार पर पेथापुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया.. पुलिस जब इस मामले में पूछताछ कर रही थी.. उसी दौरान जिग्नेश मेवाणी अपने समर्थकों के साथ स्टेशन पहुंचे.. पुलिस का आरोप है कि विधायक और उनके साथियों ने स्टेशन परिसर में हंगामा मचाया.. अधिकारियों के काम में बाधा उत्पन्न की.. और पूछताछ के दौरान मुनाफ पठान को जबरन बाहर ले जाने का प्रयास किया.. वहीं इस घटना के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए.. पुलिस का कहना है कि इन वीडियो में पुलिस अधिकारियों के बारे में विवादित टिप्पणियां की गईं.. और लोगों को उकसाने का प्रयास भी हुआ.. जिससे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ..
वहीं इन आरोपों के आधार पर पेथापुर पुलिस स्टेशन के अलावा सेक्टर-सात पुलिस स्टेशन में भी अलग से एफआईआर दर्ज की गई.. दोनों मामलों में जिग्नेश मेवाणी के साथ उनके कुछ सहयोगियों.. और समर्थकों के नाम भी शामिल किए गए हैं।.. आरोपों में सरकारी काम में बाधा डालना, धमकी देना, पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार तथा चुनाव संबंधी नियमों का उल्लंघन शामिल है.. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वीडियो साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर कार्रवाई की गई है.. जांच अभी जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी.. इस बीच राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है..
जिग्नेश मेवाणी ने एफआईआर दर्ज होने के बाद अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई.. उन्होंने कहा कि वे सरकार और पुलिस से नहीं डरते.. उनका स्पष्ट संदेश था कि जहां कहीं गलत होगा, वहां वे आवाज उठाएंगे.. एफआईआर को मेडल की संज्ञा देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस कार्रवाई से उनका संघर्ष करने का संकल्प.. और मजबूत होता है.. मेवाणी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उन्हें चुप कराने का प्रयास है.. लेकिन वे हार नहीं मानेंगे.. उनके समर्थकों ने भी इस बयान का समर्थन किया.. और कहा कि मेवाणी हमेशा आम लोगों के अधिकारों के लिए खड़े होते रहे हैं.. वहीं इस पूरे प्रकरण ने नगर निगम चुनाव के माहौल को और अधिक गरमा दिया है..
गुजरात में नगर निगम चुनाव हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं.. क्योंकि ये स्थानीय स्तर पर सत्ता के समीकरण तय करते हैं.. इस बार का चुनाव भी कोई अपवाद नहीं है.. प्रचार के दौरान कई जगहों पर तनाव की खबरें आईं.. लेकिन गांधीनगर का यह मामला इसलिए विशेष रूप से चर्चा में आया क्योंकि इसमें एक विधायक सीधे शामिल हो गए.. पुलिस का पक्ष है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है.. और कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो.. नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता.. वहीं विपक्ष का कहना है कि सत्ताधारी दल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहा है..


