सलाखों के पीछे लॉरेंस बिश्नोई, मुंबई में खौफ, टाइगर श्रॉफ पर हमले से उठे सवाल!
लॉरेंस बिश्नोई जेल में बंद है... लेकिन उसके गैंग के नेटवर्क को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं... टाइगर श्रॉफ पर हमले की खबर के बीच...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले ने एक बार फिर कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.. मुंबई के जुहू इलाके में रविवार शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलीबारी हुई.. अभिनेता पुष्पा नारसी पार्क से निकल रहे थे.. तीन मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने सात राउंड फायरिंग की.. जिसमें पांच गोलियां कार पर लगीं.. टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए.. हालांकि उनके ड्राइवर फिरदौस के हाथ में गोली लगी.. और एक राहगीर भी घायल हुआ.. अभिनेता ने खुद गाड़ी चलाकर घायलों को नानावटी अस्पताल पहुंचाया..
वहीं इस घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का दावा करने वाले अनिल पंडित और हरमन संधू ने जिम्मेदारी ली.. जानकारी के मुताबिक उन्होंने ऑडियो संदेश में कहा कि टाइगर श्रॉफ को पहले सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनी दी गई थी.. जिसे उन्होंने नजरअंदाज किया.. संदेश में फिल्म उद्योग के उन लोगों को भी धमकी दी गई जो सलमान खान के साथ काम करते हैं.. मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया.. इनमें हरियाणा के सोनीपत के रहन और एक नाबालिग तथा बिहार मूल के हृतिक कुमार शामिल हैं.. जो मुंबई में रह रहे थे..
पुलिस जांच के अनुसार हमलावरों ने अभिनेता की गतिविधियों पर कई दिनों से नजर रखी थी.. वे जानते थे कि रविवार को टाइगर श्रॉफ नियमित रूप से जुहू के उस मैदान पर आते हैं.. गोलीबारी के बाद वे मोटरसाइकिल पर एसवी रोड और विले पार्ले स्टेशन की ओर भाग निकले.. और ट्रेन से भागने की कोशिश की.. कोटा पुलिस ने मुंबई पुलिस के सहयोग से उन्हें जल्दी गिरफ्तार कर लिया.. संदिग्धों से पूछताछ में पता चला कि उन्हें हमले के लिए अग्रिम राशि मिली थी.. और वे नेपाल भागने की योजना बना रहे थे.. जांच एजेंसियां अब उनके कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने की पड़ताल कर रही हैं..
वहीं इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर बाहर धमकियों और हमलों का सिलसिला कैसे जारी है.. जब उसकी मुलाकातों और जेल से बाहर ले जाने पर सख्त पाबंदियां हैं.. तो उसके गैंग के लोग फिल्मी सितारों को निशाना बनाने या धमकियां देने के लिए किसके इशारे पर काम कर रहे हैं.. क्या जेल में बंद गैंगस्टर के निर्देश पर बाहर नेटवर्क चल रहा है.. या उसके नाम का इस्तेमाल दूसरे लोग कर रहे हैं.. इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आ सकते हैं.. और पुलिस इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रही है।..
आपको बता दें कि लॉरेंस बिश्नोई साल 2023 से गुजरात की साबरमती जेल में बंद है.. उसकी सुरक्षा को देखते हुए उसे हाई सिक्योरिटी जोन में रखा गया है.. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसकी मुलाकातों पर कड़ी पाबंदियां हैं.. और कानूनी सहायता के लिए उसके वकीलों तथा कानूनी टीम को ही उससे मिलने की इजाजत है.. उसे दूसरे कैदियों से अलग रखने की व्यवस्था भी सुरक्षा के लिहाज से की गई है.. इसके बावजूद उसके गैंग का नाम अलग-अलग आपराधिक घटनाओं में सामने आता रहा है.. यही वजह है कि टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद एक बार फिर जेल की सुरक्षा व्यवस्था.. और बाहर सक्रिय कथित नेटवर्क को लेकर सवाल उठने लगे हैं..
हालांकि किसी घटना में गैंग का नाम सामने आना और जेल में बंद लॉरेंस की ओर से उस घटना को निर्देशित किया जाना दो अलग बातें हैं.. पुलिस को यह पता लगाना होगा कि हमले की योजना किसने बनाई.. आरोपियों को किसने निर्देश दिए और जेल में बंद किसी व्यक्ति की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं.. अनिल पंडित जैसे विदेश में रहने वाले कथित सहयोगियों के रोल की भी जांच चल रही है.. मुंबई पुलिस और अन्य एजेंसियां सबूतों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालेंगी..
लॉरेंस बिश्नोई को लेकर अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तत्कालीन आपराधिक प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 268 के तहत आदेश जारी किया था.. इस प्रावधान के तहत सरकार किसी कैदी को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगा सकती है.. आदेश का उद्देश्य उसकी सुरक्षा और दूसरे राज्यों की पुलिस को उसकी हिरासत सौंपने से जुड़ी पाबंदियां लागू करना था.. बाद में यह आदेश बीएनएसएस की धारा 303 के तहत हर साल बढ़ाया जाता रहा है.. इसके चलते दूसरे राज्य की पुलिस के लिए लॉरेंस को अपनी हिरासत में लेना आसान नहीं है..



