पुतिन पर मादुरो जैसी कार्रवाई? जेलेन्स्की के सवाल पर ट्रंप का बड़ा बयान
क्या व्हाइट हाउस अब मादुरो के बाद रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का रातों रात अपहरण करने वाला है। क्या पुतिन को पकड़ने का दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का सही है। क्या सच में ट्रंप ने रुस और पुतिन को सबक सिखाने की ठान ली है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या व्हाइट हाउस अब मादुरो के बाद रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का रातों रात अपहरण करने वाला है। क्या पुतिन को पकड़ने का दावा यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का सही है। क्या सच में ट्रंप ने रुस और पुतिन को सबक सिखाने की ठान ली है।
सवाल इसलिए क्योंकि पूरे मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जवाब आया है, जिसने पूरी दुनिया में एक नई हलचल पैदा कर दी है। क्या सच में अमेरिका रुस में घुसकर पुतिन को गिरफ्तार करने जा रहा है। क्या सच में अमेरिका ऐसी हिम्मत कर सकता है, हम इस रिपोर्ट में न सिर्फ ट्रंप के दावे को बताएंगे बल्कि इस पर भी चर्चा करेंगे कि इसके रिजल्ट दुनिया के लिए कितने गंभीर होंगे।
3 जनवरी 2026 का दिन इतिहास में काली तारीख के रुप में दर्ज हो गया है । जब ट्रंप के इशारे पर अमेरिका की खास सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके घर से अगवा कर अमेरिका ले गए थे। इस हमले का पूरी दुनिया में विरोध हुआ। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने मादुरो को न्याय के कटघरे में खड़ा कर दिया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या यह न्याय है? कि किसी संप्रभु देश पर सीधा हमला कर उसके राष्ट्रपति को रातों रात अगवा कर लिया जाए। इंटरनेशनल कानून के जानकारों का कहना है कि यह किडनैपिंग है, गिरफ्तारी नहीं। ट्रंप का यह कदम बताता है कि उनके लिए दूसरे देशों की सीमाएं महज कागज के टुकड़े हैं।
हालांकि ट्रंप का दावा है कि यह नारको-टेररिज्म के खिलाफ जंग है। लेकिन असलियत यह है कि ट्रंप वेनेजुएला की जमीन के नीचे दबा वो काला सोना है, जिसे ट्रंप अपनी जागीर समझते हैं। और इसके लिए ट्रंप ने खुद ऐलान भी कर दिया है कि वेनेजुएला की धरती में छिपे 202 लाख बैरल तेल को अमेरिका निकालेगा और इसको बाजार रेट पर बेचेगा भी। हालांकि इसका पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है लेकिन कोई भी देश अमेरिका के खिलाफ खुलकर नहीं आ रही है और यह बात भी है कि अमेरिका का विरोध करते की ताकत किसी दूसरे देशों में नहीं है। दो देश रुस और चीन अमेरिका का विरोध कर सकते हैं लेकिन अपने फायदे और खुद को जंग में उतारने से बच रहे हैं।
हालांकि पूरे मामले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति की अजब गजब टिप्पणी सामने आई है। एक ओर जहां पूरी दुनिया वेनेजुएला पर हमले पर विरोध जता रही है तो वहीं दूसरी ओर जेलेंस्की ने घटना खुशी जताते हुए ट्रंप की तारीफ की है और इसी तरह का प्लान रुस के लिए बनाने का हिंद दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा था, कि अगर किसी तानाशाह के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना चाहिए तो अमेरिका जानता है कि आगे उसे ऐसा किसके साथ करना है। वोलोडिमिर जेलेंस्की का निशाना रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरफ था। जेलेंस्की के बयान के बाद यह बात चर्चा में है कि शायद वो चाहतें हैं कि अमेरिका पुतिन के साथ भी ऐसा ही करे। लेकिन शायद ये होना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन सा है। क्योंकि रुस और वेनेजुएला में बहुत अंतर है। अगर दुनिया में कोई ताकत अमेरिका को टक्कर दे सकती है तो वो रुस ही है, और शायद कभी रुस पर इस तरह की कार्यवाही करने की अमेरिका सोच भी नहीं सकता है। क्योंकि रुस की जमीन की सेना बहुत ही ज्यादा ताकतवर है।
ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स 2024 के अनुसार ताकतवर देशों में अमेरिका पहले स्थान पर है, उनके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर की मजबूत नौसेना और वायु सेना है। जबकि रूस दूसरे स्थान पर है और ज़मीनी शक्ति और टैंकों में आगे, लेकिन नौसेना और वायु सेना में अमेरिका से पीछे है। अमेरिका के पास लगभग 1.4 मिलियन सक्रिय सैनिक हैं जबकि रुस के पास लगभग 1.32 मिलियन सक्रिय सैनिक हैं। रूस के पास अमेरिका से कहीं ज़्यादा टैंक हैं। रूस के पास 14,777 जबकि अमेरिका के पास्2,645 है। जहां तक लड़ाकू विमान की बात है तो इसमें अमेरिका रुस से आगे है। अमेरिका के पास 13,000 से ज्यादा और रूस के पास ्4,800 से ज्यादा विमान हैं। अमेरिका के पास एयरक्राफ्ट कैरियर और डिस्ट्रॉयर हैं जबकि रूस के पास ज़्यादा पनडुब्बियां हैं। परमाणु हथियार के मामले में रुस के पास दुनिया में सबसे ज़्यादा परमाणु हथियार 5,500 से ज्यादा हैं जबकि अमेरिका दूसरे स्थान पर 5,044 परमाणु हथियारों के साथ है।
अमेरिका का रक्षा बजट 820 मिलियन डॉलर है तो रुस का 10 गुना कम 80 मिलियर डॉलर ही है। ओवर ऑल देखा जाए तो अमेरिका सैन्य संख्या और तकनीकी रूप से आगे है, लेकिन रूस ज़मीनी युद्ध और परमाणु हथियारों में बहुत ताकतवर है। ऐसे में यह संभव ही नहीं है कि अमेरिका वेनेजुएला जैसी कार्यवाही रुस पर भी करे, क्योंकि रुस को पुतिन तक पहुंचने के लिए बड़ी मशक्कत करनी होगी, और दोनों देशों न सिर्फ युद्ध की तरफ बढ़ जाएंगे बल्कि पूरी दुनिया में एक भयावह स्थिति पैदा हो जाएगी। ऐसे में जेलेंस्की का पुतिन को पकड़ने का सपना सिर्फ हवा हवाई बतों से ज्याद और कुछ नहीं है। और खुद ट्रंप ने भी इस बात को माना है कि रुस से उनके अच्छे संबंध हैं इसलिए वजह से वो कुछ ऐसा नहीं करेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि मुझे लगता है कि हमारा रूस के साथ हमेशा से ही बहुत अच्छा रिश्ता रहा है। लेकिन अभी मैं उनसे बहुत निराश हूं। ट्रंप ने आगे कहा, -मैंने आठ युद्धों का निपटारा किया है। रूस-यूक्रेन को लेकर मुझे लगा था कि इस युद्ध को सुलझाना आसान होगा, लेकिन इसे सुलझाया नहीं जा सका है। ट्रंप ने आगे बताया कि -पिछले महीने, रूस ने 31,000 लोगों को खो दिया, उनमें से ज्यादातर सैनिक थे। इस समय रूसी अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। मुझे लगता है कि हम आखिरकार इस मामले को सुलझा लेंगे।अमेरिकी राष्ट्रपति ने ने यह भी कहा है कि काश हम इसे जल्दी सुलझा पाते, क्योंकि बहुत से लोग मर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर सैनिक हैं।
ऐसे में साफ है कि ट्रंप रुस को लेकर ऐसा कुछ सोचते तक नहीं है जैसा कि दावा जेलेंस्की कर रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में यह बात भी साफ होती है कि ट्रंप एक तरफ पुतिन को अपना दोस्त बताते हैं, और दूसरी तरफ जेलेन्स्की को अपमानित करते हैं। यह कैसी डिप्लोमेसी है?क्या ट्रंप सिर्फ कमजोर देशों जैसे कि वेनेजुएला पर अपनी ताकत दिखा सकते हैं? क्या पुतिन के परमाणु बमों के आगे ट्रंप की मर्दानगी गायब हो जाती है?
हालांकि पूरे मामले में सच यह है कि ट्रंप किसी के हितेषी नहीं है। वो यूक्रेन की मदद कर रहे हैं तो पहले ही तो उसके पीछे यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की नियत है। और वेनेजुएला के मामले में यह बात पूरी तरह से सामने आ चुकी है। मादुरो को जेल भेजने के कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने अपना असली रंग दिखा दिया। उन्होंने कहा कि हम वेनेजुएला का तेल लेने जा रहे हैं। यही है ट्रंप का अमेरिका फर्स्ट! उन्हें वेनेजुएला में लोकतंत्र की चिंता नहीं है, उन्हें चिंता है कि कैसे वहां के तेल भंडार पर कब्जा करके अमेरिकी तेल कंपनियों की तिजोरियां भरी जाएं।ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला के तेल से वो अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें $50 प्रति बैरल से नीचे ले आएंगे।
जबकि सच्चाई यह है कि एक आधुनिक किस्म की लूट है। एक देश के संसाधनों को जबरन हड़पना क्या किसी राष्ट्रपति को शोभा देता है? हालांकि इस सबके बीच भी वो नोबेल को लेकर छटपटा रहे हैं। आज भी उन्होंने अपने बयान में नोबेल पाने की इच्छा जताई है। हालांकि ये अजब संयोग है कि एक तरफ वो बम गिरा रहे हैं, राष्ट्रपति का अपहरण कर रहे हैं, और दूसरी तरफ उन्हें क्या चाहिए? नोबेल शांति पुरस्कार! जी हाँ, मजाक नहीं है। ट्रंप के चमचे उन्हें 2026 के नोबेल के लिए नॉमिनेट कर रहे हैं। जिस इंसान ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया, वो अब खुद को पीसमेकर-इन-चीफ कहलवाना चाहता है।लेकिन उम्मीद है कि नोबेल कमेटी ने उन्हें घास नहीं डालेगी। यह उनकी ईगो की पराकाष्ठा है। अगर तबाही मचाने के लिए नोबेल मिलता, तो ट्रंप निश्चित रूप से पहले नंबर पर होते।हालांकि पूरे मामले में साफ है कि ट्रंप की बहादुरी सिर्फ कमजोरों के लिए है।
ऐसे मे साफ है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां दुनिया के लिए किसी टाइम बम से कम नहीं हैं। आज वेनेजुएला है, कल कोई और देश होगा। तेल के लिए किसी भी हद तक जाना और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाना एक खतरनाक मिसाल है। क्या अमेरिकी जनता एक ऐसे राष्ट्रपति को बर्दाश्त करेगी जो शांति के नाम पर अशांति फैला रहा है?ट्रंप का नोबेलश् का सपना शायद पूरा हो जाए, लेकिन इतिहास उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद रखेगा जिसने दुनिया को व्यापार और युद्ध के बीच का खिलौना बना दिया।



