पीरियड्स हाइजीन पर लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये जानकारी जुटाने के लिए केंद्र सरकार एक प्रश्नावली तैयार कर सकती है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांग सकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य निर्देशों के पालन में जानकारी न देने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़ी चेतावनी दी है. अधिकारियों को अदालत की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चेतावनी दी. कोर्ट ने कहा, अगर वे मासिक धर्म स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के बारे में जानकारी नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राज्यों के मुख्य सचिव, मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़े फैसले को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई जानकारी नहीं देते हैं, तो उन्हें अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सवाल किया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई जानकारी क्यों नहीं दी है.
साथ ही कोर्ट ने उन्हें निर्देशों का पालन करने का एक आखिरी मौका दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वो इस मामले में 1 सितंबर को दिए गए आदेश में शामिल कुछ खास निर्देशों पर विशेष ध्यान देते हुए फैसले के लागू होने के बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिखित जानकारी मांगे.
अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये जानकारी जुटाने के लिए केंद्र सरकार एक प्रश्नावली तैयार कर सकती है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांग सकती है. इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि उसे पूरा भरोसा है कि केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मासिक धर्म स्वच्छता (menstrual hygiene) को एक मौलिक अधिकार घोषित करने वाले उसके फैसले के महत्व को समझ लिया है.
कोर्ट ने कहा, “दूसरे शब्दों में कहें तो, हमने मासिक धर्म स्वच्छता/स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 का एक हिस्सा घोषित किया है.” हालांकि, बेंच ने सवाल उठाया कि अगर उनका फैसला सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया, तो इस अधिकार को लागू कैसे किया जाएगा?
बेंच ने टिप्पणी की, “अगर हमारे फैसले की बातें सिर्फ कागजों पर ही रह गईं, तो केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस मौलिक अधिकार को कैसे लागू करेंगे? हमने जो कुछ भी किया है, वह उन युवा लड़कियों के हित में किया है जो मासिक धर्म स्वच्छता जैसी समस्याओं के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ रही हैं . खासकर देश के दूर-दराज के इलाकों में ऐसा ज्यादा हो रहा है.”



