BMC में चला ओवैसी का जादू, AIMIM के उभार से सहम गया NDA

महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भले ही इस बार बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति का दबदबा देखने को मिला हो लेकिन इस चुनीव का सबसे दिलचस्प पहलू रहा असदुद्दीन औवैसी की पार्टी AIMIM का उभार।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रात का अंधेरा और उस अंधेरे में उड़ती ये पतंगें.. उन पतंगें के साथ ये रौशनी, ये शोर और ये जश्न मनाते लोग। इस नजारें से पता चलता है कि भारतीय राजनीति में एक नयी पार्टी का उभार हुआ है।

महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भले ही इस बार बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति का दबदबा देखने को मिला हो लेकिन इस चुनीव का सबसे दिलचस्प पहलू रहा असदुद्दीन औवैसी की पार्टी AIMIM का उभार। 16 जनवरी को जब नतीजें आ रहे थे तब सबकी नजरें भाजपा, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस पर थी लेकिन जैसे जैसे नतीजें साफ होते गए सड़को पर AIMIM के समर्थक जश्न मनाते हुए नजर आने लगे। दरअसल पार्टी ने इतनी सीटें जीत लीं जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था।

जिन सीटों पर मुकाबला सीधे सीधे सत्ता और पारंपरिक विपक्ष के बीच माना जा रहा था वहां भी Aimim ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी। बीएमसी में महायुती ने बंपर जीत स्थापित करके सत्ता का रास्ता साफ कर लिया लेकिन इन सबके बीच AIMIM ने अपने सीमित संसाधनों और चुनिंदा सीटों पर फोकस करके सभी का ध्यान खींचा है। खासतौर पर शहरी इलाकों और अल्पसंख्यक बहुल्य वार्डों में Aimim न सिर्फ अपनी मौजूदगी मजबूत की बलकि कई जगहों पर सीधे मुकाबले में खुद को एक प्रभावशाली ताकत के रूप में स्थापित किया। ये प्रदर्शन संकेत दे रहे हैं कि पार्टी अब महाराष्ट्र की नगर राजनीति में स्पायलर नहीं बल्कि निर्णायक भूमिका निभा रही है।

29 नगर निगमों के चुनाव नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM राज्य की राजनीति में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी एआईएमआईएम ने इस निकाय चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 125 सीटें जीत ली हैं। शहरी इलाकों में भी AIMIM ने जबरदस्त मौजूदगी दर्ज कराई है। मुंबई में पार्टी ने 8 सीटें हासिल कीं, जबकि संभाजीनगर और मालेगांव में वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस प्रदर्शन के साथ AIMIM ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और समाजवादी पार्टी (SP) से कहीं बेहतर नतीजे हासिल किए हैं।

दूसरा शहर जहाँ पार्टी के राजनीतिक परिदृश्य पर दबदबा बनाने की संभावना दिख रही है, वह मालेगांव है। यहाँ AIMIM ने कुल 84 में से 20 सीटें जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया है और अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। इस मुस्लिम-बहुल शहर में इस्लाम पार्टी 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि शिवसेना को 18 सीटें मिलीं। समाजवादी पार्टी को 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा और कांग्रेस केवल 3 सीटें ही जीत सकी। AIMIM ने नांदेड़ में 14 सीटें, अमरावती में 11 और धुले नगर निगम में 10 सीटें हासिल कीं। सोलापुर और मुंबई में पार्टी ने 8-8 सीटें जीतीं, नागपुर में 7, ठाणे में 5, अकोला में 3 और अहिल्यानगर तथा जालना में 2-2 सीटें मिलीं। इसके अलावा चंद्रपुर में भी पार्टी ने एक सीट जीतकर अपना खाता खोला। इस शानदार प्रदर्शन के बाद पार्टी चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी पार्टी और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।

एक तरफ जहां पार्टी अध्यक्ष पार्टी का शुक्रिया अदा करके नजर आए तो वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और छत्रपति संभाजीनगर से पूर्व सांसद इम्तियाज़ जलील ने कहा कि उनकी मेहनत रंग लाई है। उन्होंने कहा, “इस बार हमने अपनी रणनीति बेहद सोच-समझकर बनाई थी। उम्मीदवारों का चयन बेहद अहम रहा, खासकर छत्रपति संभाजीनगर में, जहाँ हमने आम कार्यकर्ताओं को टिकट दिया।” जलील ने यह भी कहा कि पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी और लोगों के बीच लगातार मौजूद रहकर विश्वास बनाया। मुंबई में AIMIM ने मुस्लिम-बहुल इलाकों जैसे शिवाजी नगर, गोवंडी, मानखुर्द और अणुशक्ति नगर से जीत दर्ज की।

जलील ने बताया कि इस बार AIMIM ने गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा। उन्होंने कहा, “जब बीजेपी और शिवसेना खुद को सांप्रदायिक पार्टियों के रूप में पेश करने में लगी थीं, तब हमने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और हिंदू ओबीसी वर्ग के लोगों को टिकट देना चुना।” उनका कहना था कि AIMIM केवल एक समुदाय की पार्टी नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और हाशिए पर खड़े वर्गों की आवाज़ है। मतलब जो लोग यह कहते हैं कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM केवल मुसलमानों को टिकट देती है, उन्हें औरंगाबाद का उदाहरण ध्यान से देखना चाहिए, जहाँ हिंदू प्रत्याशी काका साहेब काकडे भी चुनाव जीतकर नगर सेवक बन चुके हैं। यह जीत इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चयन में विविधता और समावेशी राजनीति को प्राथमिकता दी है।

वहीं मुस्लिम-बहुल इलाकों में AIMIM एक मजबूत ताकत बनकर उभरी है। ओवैसी की पार्टी ने इन महानगरपालिका चुनावों में कुल 125 सीटों पर जीत हासिल की है। मुंबई बीएमसी में AIMIM के 8 उम्मीदवारों ने विजय पताका लहराई है, जबकि एक वार्ड में पार्टी को बढ़त हासिल है। मुंबई बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं, और इस लिहाज से AIMIM की मौजूदगी अब पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है। इस दौरान मुंब्रा सीट से भाजपा उम्मीदवार को हराने वाली AIMIM की युवा उम्मीदवार सहर युनुस शेख की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। दरअसल, खुद हिजाब पहनने वाली सहर ने जीत के बाद कहा कि “हिजाब रुकावट नहीं बल्कि मंजिल है।” उनका यह बयान न केवल समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना, बल्कि युवा वर्ग में भी एक मजबूत संदेश देने वाला साबित हुआ।

AIMIM की यह जीत इस बात का संकेत है कि राज्य के मुस्लिम-बहुल और दलित-बहुल शहरी इलाकों में पार्टी की पकड़ लगातार बढ़ रही है। यह प्रदर्शन कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के लिए भी एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि उनके पारंपरिक वोट बैंक में AIMIM ने सेंध लगाई है। निकाय चुनावों में यह उभार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM अब केवल एक सीमित क्षेत्रीय या समुदाय-आधारित पार्टी नहीं रही, बल्कि वह शहरी राजनीति में एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रही है। उसकी रणनीति, उम्मीदवारों का चयन और जमीनी स्तर पर काम करने का तरीका आने वाले चुनावों में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के निकाय चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य की शहरी राजनीति अब पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी, विविध और अनिश्चित हो गई है। महायुति की बढ़त, AIMIM का उभार और उद्धव गुट की कमजोर होती पकड़ – ये तीनों संकेत आने वाले महीनों में राज्य की सत्ता राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

Related Articles

Back to top button