शाह के बयान के बाद मचा सियासी घमासान
शिवसेना यूबीटी बोली-29 तक न तो मोदी प्रधानमंत्री रहेंगे और न ही शाह केंद्रीय गृह मंत्री रहेंगे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। शाह के बयान के बाद सियासी घमासान मच गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। संजय राउत ने बुधवार को दावा किया कि 2029 तक न तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री रहेंगे और न ही अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री रहेंगे।
राउत की यह टिप्पणी गृह मंत्री अमित शाह के उस दावे के जवाब में आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) 2029 के लोकसभा चुनावों में फिर से जीत हासिल करेगा। राउत ने पत्रकारों से कहा, अमित शाह 2029 तक गृह मंत्री नहीं रहेंगे। मैंने यह बार-बार कहा है। मोदी भी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे, हम यह भी कह रहे हैं। वे अंदर से यह बात जानते हैं, इसलिए वे निराशा, विफलता और मायूसी से जूझ रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए (जिसमें उन्होंने कहा था कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) का विपक्ष द्वारा विरोध करना अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश है) राउत ने पूछा कि क्या असली भारतीय नागरिक, जिनके नाम हटा दिए गए थे, उन्हें भी घुसपैठिया माना जा रहा है।
राउत ने कहा, क्या मैं घुसपैठिया हूं? पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी (जिनका नाम हटा दिया गया था) क्या वे घुसपैठिया हैं? कई सैनिकों, पूर्व सैनिकों और अधिकारियों के नाम हटा दिए गए, क्या वे घुसपैठिए हैं? अमित शाह को इसका जवाब देना चाहिए।

जो कोई भी भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देता, वह घुसपैठिया है
गृहमंत्री की बातों पर सीधा कटाक्ष करते हुए राउत ने कहा, अमित शाह के लिए घुसपैठिये की परिभाषा बस इतनी है- जो कोई भी भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देता, वह घुसपैठिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सीसीटीवी कैमरों और चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा के नियमों के बारे में पूछने पर राउत ने आरोप लगाया कि ये कदम भ्रष्ट तौर-तरीकों को बचाने के लिए उठाए गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चुनाव आयुक्त के लिए सुरक्षा नहीं है, यह उन माफियाओं को दी जा रही सुरक्षा है जो भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोटालों में मदद करते हैं।
चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चुप क्यों : प्रियांक खरगे
कर्नाटक के मंत्री बोले- पहले से भरे हुए फॉर्म-7 का व फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर जवाब दें सीईसी व पीएम
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बेंगलुरू । कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपना हमला तेज़ करते हुए केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के गंभीर आरोप लगाते हुए शीर्ष संवैधानिक और राजनीतिक नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि अहम लोग गायब हैं और केंद्रीय नेतृत्व की जवाबदेही पर सवाल उठाए। खरगे ने कहा कि सीईसी-मुख्य चुनाव आयुक्त गायब हैं। गृह मंत्री गायब हैं। मोदी जी गायब हैं। पहले उनसे कहिए कि उन्हें ढूंढें। मंत्री ने वोटर रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को लेकर सीईसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास पहले से भरे हुए फॉर्म 7 का क्या जवाब है? फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर उनका क्या कहना है? वे बेवकूफों का झुंड हैं जो बस नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
खरगे ने भाजपा के अंदरूनी पदानुक्रम और राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों के मैनेजमेंट के तरीके पर भी तीखा कटाक्ष किया। मंत्री ने कहा, जब पीएम मोदी आते हैं, तो उनके विधायकों को सडक़ों पर बैरिकेड्स के पीछे खड़ा करके झंडे लहराने को कहा जाता है। मंत्रियों को बैरिकेड्स के पीछे खड़ा करके उनके चीयरलीडर्स जैसा व्यवहार करने पर मजबूर किया जाता है। ये सभी बेवकूफी भरी हरकतें सिर्फ भाजपा ही सोच सकती है।
कांग्रेस नेता की इन टिप्पणियों को राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा को घेरने की एक नई कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा ने अभी तक इन खास आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि दिल्ली में इंउिया गठबंधन द्वारा किया गया विशाल विरोध प्रदर्शन केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के अंत की शुरुआत का संकेत है।
मप्र में शराब घोटाले पर सियासी बवाल
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने भाजपा को घेरा, पीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल। कभी दिल्ली की आप सरकार पर शराब घोटाले के नाम पर हमलावर रहने वाली भाजपा अपनी ही मप्र की सरकार पर मौन। उधर इस घोटाले को लेकर राज्य में सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से जुड़े एक मामले को लेकर बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसकी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।
पार्टी नेता जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि मध्य प्रदेश में जमीन से जुड़े कथित घोटाले के बाद अब शराब से जुड़ा कथित घोटाला सामने आया है। उन्होंने जिस खबर और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के जिस पोस्ट का उल्लेख किया उसमें दावा किया गया कि देव?ा के पूर्व ओएसडी के खिलाफ कथित शराब घोटाले की जांच में कई गड़बडय़िां सामने आईं हैं।
‘हम दो, हमारे दो’ से प्रेरित होकर भ्रष्टाचार में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही
रमेश ने आरोप लगाया, भाजपा की प्रदेश सरकारें भी हम दो, हमारे दो से प्रेरित होकर भ्रष्टाचार में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस विषय पर प्रधानमंत्री से सात सवाल पूछे हैं। रमेश ने कहा, अगर प्रधानमंत्री का इस भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं है तो उन्हें जरूर जांच करवानी चाहिए। सवाल यह है कि क्या वे निष्पक्ष जांच करवाएंगे? उन्होंने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्य सरकार की आलोचना की है।
पूर्व प्रमुख सचिव योगेश कुमार गिरफ्तार
2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में वर्ष 2014 में हुए बहुचर्चित पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू की टीम ने बुधवार, 14 अक्टूबर को तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं 1980 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।
उन पर भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी कर ओएमआर शीट के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोप हैं। वर्ष 2014 में शासन ने पशुपालन विभाग के अंतर्गत सहारनपुर मंडल को छोडक़र प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1,198 रिक्त पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी थी। इसके लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश पशुधन प्रसार एवं कुक्कुट विकास सेवा नियमावली-2002 तथा संशोधित नियमावली-2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। ओएमआर शीट के मूल्यांकन से लेकर मेरिट सूची तैयार करने तक गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। ईओडब्ल्यू की विवेचना में सामने आया कि मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों के विपरीत ओएमआर शीट का केंद्रीयकृत मूल्यांकन कराने के लिए फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट, रायबरेली को नामित किया गया था। आरोप है कि भर्ती नियमावली के विपरीत निर्णय लेकर ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई। इसके माध्यम से पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचाने और अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। भर्ती के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे।
2017 में एसआईटी जांच 2019 में दर्ज हुआ मुकदमा
भर्ती प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं को लेकर शासन ने वर्ष 2017 में विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच सौंपी थी। जांच के बाद वर्ष 2019 में थाना एसआईटी में मुकदमा अपराध संख्या 01/2019 दर्ज किया गया।
पीडीए की राजनीति करने वालों को स्टेट गेस्ट हाउस कांड का इतिहास भी याद रखना चाहिए: डॉ. राजेश्वर
900 करोड़ से 5,000 करोड़ तक पहुँचा लखनऊ नगर निगम का बजट, 10 हजार करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाते हुए सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने चाय पर चर्चा के दौरान वर्ष 1995 के बहुचर्चित स्टेट गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आज जो लोग पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की बात करते हैं, उन्हें अपने राजनीतिक अतीत का भी आत्ममंथन करना चाहिए।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के साथ लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस प्रकरण में एक दलित महिला मुख्यमंत्री की सुरक्षा और सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। उनके मुताबिक, सामाजिक न्याय की राजनीति करने वालों को यह बताना चाहिए कि उस दौर में दलित नेतृत्व के साथ ऐसा व्यवहार कैसे हुआ। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि आचरण, विचार और व्यवहार में दिखाई देने वाली प्रतिबद्धता है। वंचित वर्गों के अधिकारों की बात करने वाले राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता उनके इतिहास और कार्यशैली से भी तय होती है। डॉ. सिंह ने विपक्ष की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को केवल नारों के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के वास्तविक व्यवहार और उनके शासनकाल के रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों के लिए संसाधनों का विस्तार हुआ है। लखनऊ के विकास को और गति देने के उद्देश्य से नगर निगम के बजट को बढ़ाया गया और भविष्य में यह आंकड़ा 10,000 करोड़ तक पहुंचेगा। डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार जब प्रदेश में योगी सरकार ने पहली बार सत्ता संभाली थी, तब लखनऊ नगर निगम का बजट लगभग 900 करोड़ था। उस समय करीब 500 करोड़ वेतन और पेंशन जैसे मदों में व्यय हो जाते थे जिससे विकास कार्यों के लिए सीमित संसाधन बचते थे। उन्होंने कहा कि नगर निगम के बजट में वृद्धि से सडक़ों, नालियों, जलनिकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएँ मजबूत हुई हैं।डा. राजेश्वर सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर में पिछले चार वर्षों के दौरान 2,000 से अधिक सडक़ों के निर्माण का कार्य हुआ है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, वहाँ भी विकास कार्यों को गति देने का प्रयास किया गया है। प्रदेश के व्यापक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का बजट वर्ष 2025-26 में लगभग 8.09 लाख करोड़ था, जो वर्ष 2026-27 में बढक़र लगभग 9.13 लाख करोड़ हो गया। डॉ. सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स पार्क, ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण और अन्य परियोजनाओं से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है। हमारा लक्ष्य है कि विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ें और क्षेत्र में आधारभूत सुविधाएँ अधिक सुदृढ़ हों।



