छेडड़ाड़ कांड पर सियासत गरमाई

बिहार में जमुई के बाद समस्तीपुर व बांका में भी अभद्रता

  • राजद समेत पूरे विपक्ष ने एनडीए सरकार को घेरा
  • शांभवी की पोस्ट पर तेजस्वी का हमला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार में पहले जमुई फिर समस्तीपुर और उसके बाद बांका में लडक़ी से कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद वहां की एनडीए सरकार पर विपक्ष ने एकबार फिर करारा प्रहार किया। हालाकि जमुई में आरोपियों का हाफ एनकाउंटर हो गया है और समस्तीपुर के जगतसिंहपुर में लडक़ी से कथित बदसलूकी का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छह घंटे में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पर मामले पर राजद, जनुसराज समेत सारे विपक्ष ने सम्राट सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं राजद नेता तेजस्वी यादव ने सांसद शांभवी चौधरी की पोस्ट पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए।
बता दें समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव में बांध के पास एक लडक़ी के साथ कथित अभद्र व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। पुलिस ने वीडियो सामने आने के करीब छह घंटे के भीतर मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रही लडक़ी प्रथमदृष्टया नाबालिग प्रतीत हो रही है।

आरोपियों के नाम और जातीय पहचान छुपाई गयी : तेजस्वी

इस बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव का आरोप है कि बिहार पुलिस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में आरोपियों के नाम दर्ज थे, लेकिन सांसद ने उसे अपने फेसबुक पेज पर साझा करते समय पोस्ट को इस तरह क्रॅाप किया कि आरोपियों के नाम वाला हिस्सा दिखाई नहीं दिया। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि आरोपियों के नाम और जातीय पहचान सामने न आए, इसलिए पोस्ट को क्रॉप किया गया। उन्होंने सांसद शांभवी चौधरी के साथ उनके पिता अशोक चौधरी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को भी निशाने पर लिया। हालांकि, पोस्ट को क्रॉप करने के पीछे सांसद की मंशा क्या थी, इस पर शांभवी चौधरी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए तेजस्वी यादव के आरोपों को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सरकार का चरित्र नहीं बदलेगा तो अपराधमुक्त बिहार की बात बेमानी : पीके

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध पर नियंत्रण की बात तब तक बेमानी है, जब तक सरकार के काम करने के तरीके और पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव नहीं होता।प्रशांत किशोर ने कहा, जब तक सरकार का चरित्र नहीं बदलेगा, सरकार को लीड करने वालों के काम करने की पद्धति नहीं बदलेगी, तब तक बिहार में अपराधमुक्त समाज बनाने की बात बेईमानी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से अपराध की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए शासन की कार्यशैली और पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि आज बिहार में ऐसे लोगों के हाथ में सरकार का नेतृत्व है। उन्होंने कहा, आज अनपढ़-अपराधी सरकार का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय किए बिना अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। प्रशांत किशोर के मुताबिक पुलिसिंग व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आम लोगों, खासकर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता मिले और अपराधियों के मन में कानून का भय रहे। प्रशांत किशोर ने समस्तीपुर की घटना का जिक्र करते हुए हाल में सामने आए जमुई के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं को केवल अलग-अलग आपराधिक घटनाओं के तौर पर देखने के बजाय कानून-व्यवस्था और शासन की कार्यशैली के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि अपराधमुक्त समाज केवल बयान या कार्रवाई से नहीं बनेगा। इसके लिए सरकार की कार्यशैली, नेतृत्व की सोच और पुलिसिंग व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था में जवाबदेही और कानून का प्रभावी भय नहीं होगा, तब तक अपराध पर स्थायी नियंत्रण की बात करना मुश्किल होगा।

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