यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट पर सवाल, डुप्लीकेट वोटर्स अब भी मौजूद?
उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पूरी होने और फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भी डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड का मामला सामने आया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पूरी होने और फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद भी डुप्लीकेट वोटर आईडी कार्ड का मामला सामने आया है.
समाजवादी पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से ज्यादा एंट्री होने की शिकायत की है. वहीं, फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने भी एक व्यक्ति के पास कई वोटर आईडी कार्ड का मामला उठाते हुए चुनाव आयोग की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं.
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जुबैर के ट्वीव का जवाब देते हुए कहा कि एक व्यक्ति की कई एप्लिकेशन जमा होने पर एक से ज्यादा EPIC नंबर बनने की समस्या लंबे समय से मौजूद है. आयोग का कहना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए ECINET के जरिए समय-समय पर डुप्लीकेशन की जांच की जाती है. ऐसे में सवाल है कि जब SIR का मकसद ही वोटर लिस्ट को साफ करना था, तो डुप्लीकेट एंट्री कैसे रह गईं?
सपा ने डुप्लीकेट वोटर्स की शिकायत की
13 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को ज्ञापन सौंपकर डुप्लीकेट वोटर्स का मुद्दा उठाया. पार्टी ने दावा किया कि उसने राज्य की 100 विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की जांच की और कई जगह एक ही व्यक्ति का नाम दो, तीन और कुछ मामलों में 10 बार तक दर्ज पाया. सपा ने अपने सात पन्नों के ज्ञापन के साथ बूथ के हिसाब से उदाहरण और दस्तावेज भी सौंपे. पार्टी ने चुनाव आयोग से ऐसी एंट्री की जांच करने और डुप्लीकेट नाम हटाने की मांग की.
क्या लग रहे हैं आरोप
इसके बाद 17 अक्टूबर 2026 को फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यक्ति के नाम से चार वोटर आईडी कार्ड बनने का मामला उठाया. जुबैर ने पोस्ट में कहा कि SIR की 6 जनवरी वाली ड्राफ्ट लिस्ट में जिन मतदाताओं के नाम नहीं थे, उन्होंने नाम जुड़वाने के लिए Form 6 जमा किए. उनके मुताबिक, कुछ मामलों में एक व्यक्ति ने दो आवेदन दिए, लेकिन उसे चार वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिए गए.
उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर एक व्यक्ति के नाम से बार-बार आवेदन जमा हो रहे हैं, तो सिस्टम उन्हें आवेदन के समय ही क्यों नहीं पकड़ पा रहा है. जुबैर ने यूपी CEO की वेबसाइट पर अपलोड Form 9 के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि सुंदर नाम के व्यक्ति ने 6 जनवरी और फिर 14 जनवरी को Form 6 जमा किया था. उन्होंने वेबसाइट पर बाकी Form 9 रिकॉर्ड भी अपलोड करने की मांग की.
चुनाव आयोग ने जवाब में क्या स्वीकार किया?
जुबैर की पोस्ट के जवाब में यूपी के CEO के आधिकारिक एक्स हैंडल ने कहा कि संबंधित मतदाता ने दो नहीं, बल्कि चार आवेदन जमा किए थे. आयोग ने जुबैर के दावे को गलत बताते हुए कहा कि अगर वह इस तथ्य को चुनौती देना चाहते हैं, तो उन दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर साझा करें जिनका वह हवाला दे रहे हैं.
लेकिन इस जवाब का सबसे अहम हिस्सा डुप्लीकेट EPIC बनने की समस्या को आयोग की ओर से स्वीकारना था. CEO के मुताबिक, एक ही व्यक्ति के कई फॉर्म जमा करने पर कई EPIC नंबर बन जाने की समस्या लंबे समय से मौजूद है. आयोग ने बताया कि वह ECINET के जरिए समय-समय पर डुप्लीकेशन की जांच करता है.
आयोग ने यह भी कहा कि उसका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें एक ही व्यक्ति की कई एप्लिकेशन को आवेदन जमा करने के समय ही पकड़ा जा सके. आयोग के मुताबिक, वह इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है और इसे जल्द पूरा करने की उम्मीद है.
SIR कब हुआ, फाइनल लिस्ट कब आई और कितने नाम कटे?
उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी. इसके बाद 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई. इस लिस्ट में करीब 12.55 करोड़ वोटर दर्ज थे, जबकि SIR शुरू होने से पहले राज्य की वोटर लिस्ट में लगभग 15.44 करोड़ मतदाता थे. यानी शुरुआती ड्राफ्ट तक करीब 2.88 करोड़ नाम कम हो गए थे.
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के बाद 10 अप्रैल 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई. इसमें कुल 13,39,84,792 मतदाता दर्ज किए गए. SIR शुरू होने से पहले के आंकड़े से तुलना करें तो करीब 2.04 करोड़ नाम कम हुए. हालांकि, ड्राफ्ट लिस्ट के मुकाबले फाइनल लिस्ट में करीब 84.28 लाख नाम जोड़े भी गए. यानी प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने के साथ नए नाम जोड़ने का काम भी हुआ.



