राहुल गांधी बरी, दलदल में फंसी मोदी- शाह की रणनीति, कोर्ट का बड़ा फैसला

कानूनी दांव-पेचों के झंझावतों से निकलता राहुल का पॉलिटिक्ल कैरियर

  • मुकदमों में फं साकर पॉलिटिक्ल कैरियर बर्बाद करने की पटकथा
  • मोदी उपनाम मामले में गुजरात की अदालत सुना चुकी है उन्हें दो वर्ष की सजा
  • राहुल गांधी के काफिले की गाडिय़ों के हादसे की जांच के लिए एसआईटी गठित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजनीति के समंदर में होर्मुज की अहमियत समझिए। दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। रास्ता बंद होने का खतरा पैदा होते ही जहाजों की रफ्तार थम जाती है बाजारों की धडक़न बढ़ जाती है और ताकतवर देशों की रणनीति की परीक्षा होने लगती है। भारतीय राजनीति में भी आज एक ऐसा ही संकरा मोड़ दिखाई दे रहा है। जहां एक तरफ राहुल गांधी को घेरने की कोशिशों का लंबा इतिहास आरोपों की फेहरिस्त और अदालतों की अड़चन इन सब के बीच चटटान की तरह खड़े राहुल गांधी और जनता के भरोसे के बीच आज सुल्तानपुर की अदालत ने अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना।
इस मानहानि के मुकदमे का सामना राहुल गांधी पिछले आठ साल से कर रहे थे और इस मामले में उन्हें जमानत तक करवानी पड़ी थी। यानि कि मुकदमों के जिस नैरेटिव में राहुल गांधी को फंसा कर उनके राजनीतिक कैरियर को बर्बाद करने की स्क्रिप्ट बीजेपी थिंक टैक की तरफ से लिखी गयी थी उसको राहुल गांधी ने भेंद दिया है। क्यों इससे पहले गुजरात की एक अदालत ने उन्हें दो वर्षों की सजा सुनाई थी जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने डिसमिस कर दिया था। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि राहुल गांधी एक मुकदमे में बरी हुए। बड़ा सवाल यह है कि क्या मुकदमों के जरिए किसी नेता की राजनीतिक विश्वसनीयता को स्थायी चोट पहुंचाई जा सकती है। क्या हर आरोप जनता की नजर में दोष सिद्ध कर देता है। पिछले कुछ वर्षो मे भारतीय राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। पहले राजनीति होती थी अब कूटनीति के जरिये राजनीतिक हित साधे जा रहे हैं। साजिशें राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। विपक्ष का अरोप है कि बीजेपी सरकार में आरोप, मुकदमे और छापों के जरिये पूरे विपक्ष को तार तार कर दिया गया। बहुत से विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया, बहुत से नेताओं ने डर कर बीजेपी को ज्वाइन कर लिया गया और बहुत से नेताओं को मुकदमो में फंसा कर उनके कैरियर को बर्बाद किये जाने की कोशिश की गयी। राहुल गांधी पर भी दर्ज मुकदमों को विपक्ष इन्ही आरोपों से देखता है। पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने लिया फैसला। 26 अक्टूबर को सुल्तानपुर दौरे के दौरान काफिले के पीछे चल रहे वाहन हुए थे दुर्घटनाग्रस्त। लखनऊ परिक्षेत्र के आईजी किरण एस एसआईटी के अध्यक्ष बनाए गए। अपर पुलिस अधीक्षक बृज नारायण सिंह और एसपी ट्रैफिक राम कृष्ण चतुर्वेदी एसआईटी मेंं शामिल। हादसे के कारणों, परिस्थितियों और संभावित लापरवाही की होगी विस्तृत जांच।सुरक्षा, एस्कॉर्ट और यातायात व्यवस्था में चूक के बिंदुओं की भी होगी पड़ताल। एसआईटी को जल्द से जल्द विस्तृत जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपने के निर्देश।

मानहानि मामले में नेता प्रतिपक्ष पर लगे आरोप भाजपा की साजिश : आराधना

सुलतानपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे मानहानि के मामले में आज भारतीय जनता पार्टी की एक और साजिश का खुलासा हो गया, जिसमें न्यायालय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, जननायक राहुल गांधी को केस से बरी करते हुए मुकदमें को खारिज कर दिया। उप्र कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ विधायक ने न्यायालय द्वारा राहुल गांधी जी को बरी करने पर इसे एक बड़ी जीत बताया है। उन्होने कहा कि यह झूठ और बदनाम करने की भाजपा की एक और साजिश बेनकाब हो गयी है। आज के इस निर्णय से न्यायालय के प्रति आम जनता में पुन: विश्वास जागृत हुआ है।

आवाज के नमूने से उच्च न्यायलय तक पहुंचा मामला

इस प्रकरण की कानूनी यात्रा भी कम लंबी नहीं रही। भाजपा नेता विजय मिश्रा की शिकायत पर राहुल गांधी को अदालत में पेश होना पड़ा। वर्ष 2023 में उन्होंने अदालत में उपस्थित होकर जमानत लेनी पड़ी। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी की आवाज के नमूने का बेंगलुरु में दिए गए भाषण की रिकॉर्डिंग से मिलान कराने की मांग की गई। निचली अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद सत्र न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक चुनौती दी गई लेकिन शिकायतकर्ता को वहां भी राहत नहीं मिली। आखिरकार मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई और फैसले की तारीख पहले 13 अक्टूबर निर्धारित की गयी थी जिसे बाद में बदलकर 26 अक्टूबर कर दिया गया। इसी दिन राहुल गांधी अदालत में उपस्थित हुए और फैसला उनके पक्ष में आया। यह घटनाक्रम बताता है कि राजनीतिक व्यक्तित्वों से जुड़े मुकदमे कई बार वर्षों तक चलते हैं। इस दौरान आरोप खबर बनते हैं, बयान राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते हैं और संबंधित नेता को अदालत में अपना पक्ष रखना पड़ता है। अंत में अदालत का निर्णय ही यह तय करता है कि उस विशेष मामले में कानूनी निष्कर्ष क्या होगा।

अमित शाह को राहुल गांधी ने बताया था हत्या के एक मामले में आरोपी

2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का उल्लेख करते हुए भाजपा के स्वच्छ राजनीति के दावे पर सवाल उठाया था। राहुल गांधी ने सभा में भाषण के दौरान कहा था कि भाजपा ईमानदार और स्वच्छ राजनीति में विश्वास करने का दावा करती है लेकिन पार्टी अध्यक्ष स्वयं हत्या के एक मामले में आरोपी हैं। राहुल गांधी ने जब यह टिप्पणी की थी उस समय अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। इस भाषण के बाद अगस्त 2018 में सुल्तानपुर जिले के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अदालत में मामला दर्ज कराया था।

लखनऊ में दिनदहाड़े ट्रिपल मर्डर से सनसनी

  • जमीन के विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों को गोलियों से भूना
  • रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी, कारोबारी बेटे और भाई की हत्या; पहले भी पुलिस तक पहुंच चुका था मामला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज थाना क्षेत्र में सोमवार को दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग से सनसनी फैल गई। नौबस्ता इलाके में जमीन और चबूतरा निर्माण को लेकर चल रहे पुराने विवाद ने ऐसा खूनी रूप लिया कि एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतकों में रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी शिवाजी तिवारी, उनके कारोबारी बेटे सुयश तिवारी और भाई शंभू तिवारी शामिल हैं।बताया जा रहा है कि फायरिंग में शिवाजी तिवारी और उनके बेटे सुयश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल शंभू तिवारी को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया। दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद नौबस्ता इलाके में दहशत का माहौल है।
मृतक सुयश तिवारी इलेक्ट्रिक सामानों का कारोबार करते थे, जबकि उनके पिता शिवाजी तिवारी सचिवालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे।इस तिहरे हत्याकांड ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब दोनों परिवारों के बीच विवाद पहले ही पुलिस तक पहुंच चुका था, तो आखिर मामला इतनी बड़ी वारदात में कैसे बदल गया? 21 साल पहले सदर के सीरियल किलर भाइयों से जुड़ा तिहरा हत्याकांड, फरवरी 2024 में मलिहाबाद में जमीन विवाद में तीन की हत्या और अब सआदतगंज के नौबस्ता में एक ही परिवार के तीन लोगों का कत्ल। राजधानी लखनऊ में तिहरे हत्याकांड की एक और वारदात ने पुराने मामलों की यादें ताजा कर दी हैं। सोमवार को सआदतगंज के नौबस्ता में चबूतरा निर्माण को लेकर हुए विवाद में रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी शिवाजी तिवारी, उनके बेटे सुयश तिवारी और भाई शंभू तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले वर्ष 2005 में सदर के कुख्यात भाइयों से जुड़ी तिहरे हत्याकांड की वारदात ने राजधानी में सनसनी फैला दी थी। वहीं, 2 फरवरी 2024 को मलिहाबाद के मोहम्मदनगर गांव में पुश्तैनी जमीन की पैमाइश के विवाद में मुनीर अहमद, उनकी पत्नी फरहीन और बेटे हंजला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनवाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शिवाजी तिवारी अपने घर के पास स्थित बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरे का निर्माण कराना चाहते थे। सामने रहने वाला शुक्ला परिवार इसका लगातार विरोध कर रहा था। सोमवार को एक बार फिर निर्माण को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी गाली-गलौज और मारपीट में बदल गई। आरोप है कि इसी दौरान दूसरे पक्ष ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

खरगे की टिप्पणी के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन

  • कई नेता हिरासत में, पुलिस स्टेशन लाए गए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खरगे ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के विरोध में दिल्ली भाजपा ने एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने वरिष्ठ नेताओं के साथ इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। यह प्रदर्शन सेना भवन सर्किल, राजा जी मार्ग के पास हुआ। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। पुलिस ने राजा जी मार्ग से हर्ष मल्होत्रा को हिरासत में लिया। उनके साथ दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष राजेश भाटिया और महासचिव मोहन लाल गिहारा भी हिरासत में लिए गए।
पुलिस ने कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। यह पूरा विवाद बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ।

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