राहुल गांधी का ऐलान : शिव का डांस मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी

  • जंतर मंतर पर प्रर्दशन की मनाही रामलीला मैदान पर करो प्रर्दशन
  • राजधानी दिल्ली को किले में बदलने का आरोप ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
  • राहुल का ऐलान 200 से ज्यादा ईडी/सीबीआई के अधिकारी हमारे संपर्क में
  • विपक्ष का मार्च फिर भी जारी राहुल बोले संविधान बचाने की लड़ाई है
  • राहुल का दावा- शिव तांडव का कोई तय प्लान नहीं इसमें कोई भी शामिल हो सकता है

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सियासत के मंच पर आज राहुल गांधी ने ऐसा बयान दे दिया है जिसने ज्ञानेश कुमार विवाद की कहानी में नया मोड़ जोड़ दिया। ज्ञानेश कुमार इस्तीफे के हो रहे प्रर्दशन को राहुल गांधी ने शिव का डांस बताया है और कहा है कि यह कोई प्लान नहीं है। उन्होंने दावा किया है कि ईडी सीबीआई और विदेश मंत्रालय समेत केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं।
अब सवाल यह है कि राहुल गांधी जिस हलचल की बात कर रहे हैं वह किस बड़े खुलासे की भूमिका है क्या विपक्ष के पास चुनावी प्रक्रिया से जुड़े ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब वह सरकार से लगातार मांग रहा है या फिर यह एक ऐसे आंदोलन को लंबा खींचने की रणनीति है जिसे कांग्रेस और इंडिया गठबंधन किसी कीमत पर ठंडा नहीं पडऩे देना चाहते? दिल्ली में इंडिया गठबंधन का चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी इसी सवाल को लेकर आगे बढ़ रहा है। सम्पूर्ण विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, एसआईआर पर रोक लगे और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की जांच हो। राहुल गांधी ने साफ कहा कि यह किसी एक दिन का प्रदर्शन नहीं है। संविधान की रक्षा की लड़ाई है और जब तक न्याय नहीं मिलता है वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ आम नागरिकों पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है ज्ञानेश कुमार का विवाद केवल इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं दिखायी दे रहा है। यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे की बहस बन गया है। सरकार और चुनाव आयोग आरोपों को स्वीकार नहीं करते लेकिन विपक्ष का संदेश साफ है कि वह इस मुद्दे को एक दिन की सुर्खी बनाकर छोडऩे के लिए तैयार नहीं। अब असली परीक्षा यही है कि नारे के बाद कौन तथ्य सामने रखता है सवालों का जवाब कौन देता है और इस राजनीतिक टकराव का अगला मोड़ क्या होता है।

नेता प्रतिपक्ष का दावा-उन्हें जानकारी दे रहे हें अधिकारी

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि इनमें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी, केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। राहुल के अनुसार, ये अधिकारी उन्हें जानकारी दे रहे हैं। यह बयान अपने आप में बड़ा राजनीतिक दावा है। अगर किसी नेता के पास सरकारी विभागों से जुड़े अधिकारियों की ओर से महत्वपूर्ण सूचनाएं आने की बात कही जा रही है तो अगला सवाल स्वाभाविक है सूचनाएं किस विषय पर हैं? क्या वह चुनावी प्रक्रिया से संबंधित हैं प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी हैं या किसी दूसरे मामले पर और क्या उन सूचनाओं की पुष्टि दस्तावेजों या स्वतंत्र जांच से हो सकती है राहुल गांधी के इस बयान ने बहस का दायरा बढ़ा दिया है। अब चर्चा केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहेगी। विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार के भीतर संपर्कों का दावा करके यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या सरकार के कामकाज को लेकर अंदरूनी असंतोष है।

केरल विधानसभा ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव किया पारित

केरल के लिए इसे एक ऐतिहासिक पल बताते हुए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार को कहा कि राज्य विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने वोटर लिस्ट से बाहर किए गए योग्य नागरिकों को वोट देने का अधिकार वापस दिलाने और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव पास किया है। सीएम सतीशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि केरल ने इतिहास रचा है। पहली बार केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री सतीशन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के विधायकों का समर्थन मिला जबकि भाजपा के तीन विधायकों ने इसका विरोध किया। 140 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के 102 सदस्य, सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ के 35 सदस्य और भाजपा के तीन सदस्य हैं। इस प्रस्ताव में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चिंता जताई गई है। इसमें सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी योग्य नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए। मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि प्रस्ताव में अधिकारियों के सामने तीन मांगें रखी गई हैं। इनमें एसआईआर प्रक्रिया में गड़बडय़िों को दूर करना, गलत तरीके से हटाए गए योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बहाल करना, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना और चुनाव आयुक्तों को चुनने वाली समिति में सुधार करना शामिल है।

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