राहुल के जलवे बरकरार छटपटा रही मोदी सरकार

- राहुल गांधी को रोकने के लिए कम पड़ते बैरिकेड
- मुंबई की चिंगारी भी बस पहुंचने वाली है दिल्ली
- ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द, उठते सवाल क्या डर रहे हैं चीफ इलेक्शन कमिशनर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राहुल गांधी के एक वार से विज्ञापन के जरिये बनी मोदी सरकार की इमेज धराशाही हो चुकी है। जंतर मंतर पर चल रहे धरना प्रदर्शन में राहुल गांधी के संघर्ष के बाद अब उनकी चर्चा जनता के बीच ठीक वैसे ही होने लगी है जैसी कभी पीएम मोदी की हुआ करती थी। राहुल गांधी नायक की तरह गरज रहे उनकी आम आदमी जैसी छवि उन्हें देश के दूसरे नेताओं से अलग बना रही है और जेन जी तो उनका दीवाना हो गया है। राहुल गांधी प्रियंका गांधी पर देर रात एफआईआर के बाद आज का दिन भी हंगामे भरा रहा और जंतर मंतर पर पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी।
सियासत में कई बार एक तस्वीर पूरी कहानी कह देती है दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी की तस्वीर इस वक्त कुछ ऐसी ही कहानी लिख रही है। हाथ में तिरंगा सामने बैरिकेड पीछे जनता का हुजूम और चेहरे पर आक्रमक तेवर जो सीधे सत्ता के दरवाजे को हिला रहे हैं। राहुल गांधी इस वक्त संसद के भीतर बैठे नेता नहीं है वह सड़क पर उतर चुके वह नेता दिख रहे हैं जिसे रोकने के लिए बैरिकेड कम पड़ रहे हैं। कल तक सवाल था कि राहुल गांधी चुनाव आयोग तक पहुंच पाएंगे या नहीं आज सवाल उससे बड़ा है अगर राहुल नहीं रुके तो अगला पड़ाव क्या होगा। राहुल गांधी इंडिया गठबंधन के सांसदों और जनता के साथ चुनाव आयोग की तरफ बढ़े। पुलिस ने रास्ता रोका तो आंदोलन आकाशवाणी भवन के पास जा बैठा। राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया। राहुल बैरिकेड पर चढ़े तिरंगा लहराया और चुनावी व्यवस्था पर सीधे सवाल दागे। एक तरफ दिल्ली में राहुल गांधी का तेवर गरम है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र से चुनाव आयोग के खिलाफ उठी आवाजें दिल्ली तक पहुंच चुकी हैं। मुंबई में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति के बड़े चेहरे भी इस मुद्दे पर सड़क पर उतर चुके हैं। और इसी बीच खबर आती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 7 और 8 अक्टूबर का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द कर दिया गया है। आयोग की तरफ से वजह अपरिहार्य कारण बताये गये हैं लेकिन पता सबको है कि यह दौरे क्यों रद्द किये जा रहे हैं। इससे पूर्व में भी सीईसी ज्ञानेश कुमार का यूपी के वाराणसी और मेरठ का दौरा निरस्त किया जा चुका है। निरस्त होते दौरे से सवाल पूछ जाने लगे हैं कि क्या ज्ञानेश कुमार जनता के बीच जाने से डर रहे हैं। क्योंकि ज्ञानेश कुमार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है और एसआईआर को लेकर जनता भी उनसे नाराज है संसद में कार्रवाई की चर्चाएं हों रही है और पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। बदलते समीकरणों में मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस गुस्से को रोका जा सकता है क्योंकि राहुल गांधी फिलहाल रुकते हुए दिखाई नहीं दे रहे लेकिन ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा जरूर रुक गया है।
मोदी सरकार के लिए असली परेशानी क्या है?
दूसरों मुद्दों के साथ अब सरकार के लिए राहुल गांधी भी एक बड़ी परेशानी बनते दिखायी दे रहे हैं। मोदी सरकार की परेशानी तब और बढ़ जाती है जब राहुल का सवाल विपक्ष के दूसरे सवालों से जुड़ जाता है। महाराष्ट्र में विरोध दिल्ली में विरोध युवा समूहों की बगावत विपक्षी दलों का प्रदर्शन एसआईआर पर विवाद और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग। इन सबके बीच राहुल गांधी आक्रामक तेवरों से हर कोई भौचक्का है। क्योंकि अब विपक्ष का मुद्दा सोशल मीडिया सड़क और संसद तीनों जगह एक साथ दिखाई देने लगे है।
मुंबई की आग दिल्ली में भी उठा धुआं
मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग जुटे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। युवाओं के नेतृत्व वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में बालीवुड की कई नामचीन हस्तियां शामिल हुई। वहां सीजेपी नेताओं ने सरकार को सीधा ललकारा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बिना अपना प्रदर्शन वापस लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद 4 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी चुनाव आयोग के खिलाफ एक संयुक्त मार्च में साथ दिखाई दिये। उस प्रर्दशन की खास बात यह रही कि दोनों दलों ने अपने पार्टी झंडों के बजाय तिरंगे को प्राथमिकता दी। कल आकाशवाणी भवन में भी राहुल गांधी के साथ कांग्रेस का झंडा नहीं बल्कि तिरंगा था। यही अंदाज इस पूरी कहानी के नैरेटिव को बड़े कैनवास पर प्रर्दशित कर रहा है। यानि कि यह आदोंलन किसी पार्टी किसी नेता या किसी विचारधारा से निकलकर देश का आदोंलन बन रहा है। और इसका मतलब साफ है कि पूरा मुददा महाराष्ट्र से दिल्ली तक एक आकार ले रहा है। और अब अगर मुंबई से उठी यह राजनीतिक ऊर्जा राहुल गांधी के आंदोलन से जुड़ती है तो तस्वीर और बड़ी हो सकती है। यही वह मोड़ है जहां से जंतर मंतर का नाम फिर बड़ा होने लगता है।
राहुल का एंग्री यंग मैन मोड ऑन
राहुल गांधी का नया अवतार संसद की कुर्सी पर बैठा नेता नहीं है। इस वक्त वह सड़क वाले नेता है। बैरिकेड के उपर चढ़कर मोदी सरकार को ललकार रहे हैं और बता रहे हैं कि सरकार के बैरीकेट कम पड़ सकते हैं लेकिन राहुल गांधी का हौसला नहीं रूक सकता। वह पुलिस को चुनौती दे रहे हैं पुलिस के सामने सवाल उठा रहे हैं और वह हाथ में तिरंगा लेकर सिस्टम से भिड़ते नेता के तौर पर उभर कर सामने आ रहे हैं। इंडिया गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग की तरफ बढ़े। मकसद साफ था मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध और एसआईआर को लेकर सवाल पुलिस ने रास्ता रोका रास्ता रोका गया तो राहुल रुके नहीं आकाशवाणी भवन के पास धरना शुरू हो गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया। राहुल का बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा फहराना देखते ही देखते राजनीतिक तस्वीर का सबसे चर्चित फ्रेम बन गया। यानी राहुल ने साफ कर दिया कि इस लड़ाई को सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस की लड़ाई नहीं रहने देना है। अब सड़क पर लड़ाई होगी कल तक राहुल सवाल पूछ रहे थे आज जवाब मांग रहे हैं राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर सवाल उठा रहे हैं लेकिन इस बार तेवर अलग हैं। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं और इससे वोटरों के अधिकार पर असर पड़ रहा है।




