सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे, विपक्ष का पीछे हटने से इनकार

सीईसी ज्ञानेश कुमार केइस्तीफा पर अड़े इंडिया गठबंधन के नेता,

दिल्ली सीईओ ऑफिस के बाहर कांग्रेस-आप का प्रदर्शन
कश्मीरी गेट पर भारी पुलिस बल तैनात, खरगे के लंच पर पहुंचे विपक्ष के नेता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने राष्ट्रीय राजधानी में जनपथ पर एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई, जिसमें विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए। यह मीटिंग चुनावी मुद्दों को लेकर सत्ताधारी पक्ष और विपक्षी गठबंधन के बीच बढ़े हुए राजनीतिक तनाव के माहौल में हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष के सांसदों को लंच मीटिंग के लिए बुलाया है, जिसमें सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मिलने का समय मांगने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।
प्रमुख संस्थानों पर राजनीतिक दबाव में झुकने का आरोप लगाते हुए आरजेडी नेता ने आगे कहा कि आज़ादी से पहले भी राजा-महाराजा और ब्रिटिश वायसराय हुआ करते थे। वे अपनी मनमर्जी से शासन करते थे। यह देश निजी मनमर्जी से नहीं चलेगा; यह देश संविधान के अनुसार चलेगा। संविधान का उल्लंघन हुआ है और बहुत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थानों ने अपने कर्तव्य से समझौता किया है। ठीक इसीलिए अब यह लड़ाई सडक़ों पर लड़ी जाएगी।

संविधान और लोकतंत्र सबसे ऊपर : कांग्रेस

इससे पहले, कांग्रेस पार्टी ने एक आधिकारिक पोस्ट में कहा था, संविधान और लोकतंत्र सबसे ऊपर हैं। जब तक संविधान और लोकतंत्र को हर जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी ताक़त से पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर लिया जाता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इंडिया गठबंधन इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है और उसने आयोग पर अपनी चिंताओं को दूर न कर पाने का आरोप लगाया है। विपक्ष का यह विरोध प्रदर्शन उनके बड़े लोकतंत्र बचाओ अभियान का हिस्सा था। गठबंधन की कई पार्टियों के नेताओं ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया, लेकिन बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया गया।

विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए हैं और ये रुकेंगे नहीं : राजद

बातचीत से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता सुधाकर सिंह ने कहा कि चल रहे विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए हैं और ये रुकेंगे नहीं। सिंह ने कहा कि आज भी पूरे देश में ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, चाहे आप इसकी खबर दिखाएं या न दिखाएं। कल ये जि़ला स्तर पर होंगे। इसलिए यह विरोध जारी रहेगा; यह रुकेगा नहीं। यह एक लड़ाई है। लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव के लिए नहीं बनाया गया था, जिसमें कोई सांसद बन जाए, कोई प्रधानमंत्री बन जाए या कोई राष्ट्रपति बन जाए। भारतीय लोकतंत्र की स्थापना इसके लिए नहीं हुई थी।

आंदोलन को जनता का व्यापक समर्थन मिला : सीपीआइ

विपक्ष के कैंपेन की रफ़्तार पर बात करते हुए, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया-सीपीआई के सांसद पी. संतोष कुमार ने ज़ोर दिया कि इस आंदोलन को जनता का व्यापक समर्थन मिला है। सांसद ने कहा कि यह कोई नया आंदोलन नहीं है। इसकी शुरुआत 2025 में हुई थी। अब, एक या डेढ़ साल बाद क्या हुआ? यह पूरे देश का नारा बन गया है। कुमार ने आगे कहा कि यह पूरे देश का नारा बन गया है। यह पूरे देश का नारा बन गया है। मैं बस यही कह रहा हूँ। 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इलेक्शन कमीशन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने के लिए निर्वाचन सदन तक मार्च किया। यह विरोध प्रदर्शन वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजऩ को लेकर किया गया था।

चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून सुप्रीम चौखट पर पहुंचा

सीजेआई के सामने पहुंची रिकॉल अर्जी, मुख्य न्यायधीश बोले- देखेंगे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर विचार करने की हामी भर दी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर आए हालिया बंटे हुए फैसले (स्प्लिट वर्डिक्ट) को वापस लेने की मांग की गई है। इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं, इस सवाल पर 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ की राय अलग-अलग हो गई थी।
23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इस सवाल पर अलग-अलग राय दी थी कि 2023 के उस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। इस कानून में सीईसी और ईसी की नियुक्ति करने वाले पैनल से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को बाहर रखा गया है। पीठ ने कहा था कि दोनों जजों की राय अलग होने के कारण मामला सीजेआई सूर्यकांत के सामने प्रशासनिक पक्ष में रखा जाए, ताकि उचित संख्या वाली पीठ का गठन किया जा सके और इस मुद्दे पर प्रभावी तथा आधिकारिक फैसला हो सके।
बुधवार को सीजेआई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने इस रिकॉल अर्जी का जिक्र किया। उन्होंने अदालत को बताया कि वह हालिया फैसले को वापस लेने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई चाहते हैं। सीजेआई ने इस पर कहा, हम इसकी जांच करेंगे और फैसला लेंगे।

ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे : सौरव दास

पुलिस से मिले काकरोच जनता पार्टी के नेता
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन की जानकारी दी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास ने बताया कि पार्टी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस को औपचारिक रूप से बता दिया है। उन्होंने बुधवार (7 अक्टूबर) को कहा कि इलेक्शन और वोटर लिस्ट से जुड़ी गड़बड़ी के मामलों को लेकर देश का युवा विरोध प्रदर्शन करेगा। सीजेपी लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
सौरव दास ने कहा कि मैं पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाकर एक औपचारिक लेटर देकर आया हूं, जिसमें पुलिस को जानकारी दी गई कि सीजेपी और देशभर के युवा 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जुटेंगे. उन्होंने कहा, हमने उनसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने, हमारा सहयोग करने और ट्रैफिक की जरूरी व्यवस्था करने का अनुरोध किया है. हमने इसकी लिखित सूचना दे दी है। सौरव दास ने कहा, हमने औपचारिक पत्र जमा कर दिया है और दिल्ली पुलिस से इसकी रिसीविंग भी मिल गई है. बातचीत के आधार पर उन्होंने हमसे एक अंडरटेकिंग ली और हमने इसके लिए सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं. हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस हमारा सहयोग करेगी। सौरव दास ने कहा कि देश का युवा वोट चोरी और चुनावों में चल रही धांधली को लेकर चिंतित है. सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो सीजेपी 10 अक्टूबर को प्रोटेस्ट करेगी. अहम बात यह भी है कि सीजेपी इसको लेकर तैयारी भी कर चुकी है. कॉकरोच जनता पार्टी ने देश के युवाओं से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

जन सुराज का दामन थामेंगे अनंत सिंह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार की आठ सीटों पर होने वाले एमएलसी चुनाव में हैरान करने वाली बात है कि जेडीयू के विधायक अनंत सिंह जन सुराज के लिए प्रचार कर रहे हैं. जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह पटना स्नातक सीट से उम्मीदवार हैं।
इनकी जीत के लिए अनंत सिंह ने पूरी ताकत झोंक दी है. सवाल है कि क्या अनंत सिंह जन सुराज में शामिल होंगे? इस पर प्रशांत किशोर का बयान आया है। अनंत सिंह के जन सुराज में आने की चर्चा पर प्रशांत किशोर ने कहा कि विचारधारा के साथ पार्टी चलती है और जो लोग विचार के साथ उनकी पार्टी में आ रहे हैं, उनका स्वागत है।
उन्होंने कहा, अभी तो भगदड़ शुरू हुई है, आगे भी और लोग आएंगे। सभा में प्रशांत किशोर का बीजेपी और जेडीयू पर हमला लगातार जारी रहा। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी की सभा के लिए पीके नवादा पहुंचे थे. सभा के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान नीतीश कुमार की तस्वीर कई जगहों से गायब है और वह खुद चुनाव प्रचार में सामने नहीं आ रहे हैं. अब जेडीयू की ओर से निशांत कुमार को आगे बढ़ाकर चेहरा दिखाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बीजेपी और जेडीयू के बीच आपसी खींचतान का भी दावा किया।

छात्र देश-विरोधी नहीं, भरोसा जीते सरकार: बाम्बे हाईकोर्ट

पुणे प्रोटेस्ट पर बाम्बे हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अगर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का अधिकार है और सरकार को उनका भरोसा फिर से जीतना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतें गंभीर हैं, साथ ही उसने छात्रों से क्लास में लौटने को भी कहा। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन हफ़्ते के अंदर एक हलफऩामा दाखिल करे, जिसमें लगभग 70,000 खाली पदों का विभाग और आरक्षण के हिसाब से ब्योरा दिया गया हो। चीफ़ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि वे छात्र हैं, देश-विरोधी नहीं।
यह बेंच पुणे के रहने वाले अमित सुपेकर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के लिए तय जगह उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुपेकर ने एक साथ हो रहे गैर-कानूनी सार्वजनिक प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी। पुणे में हज़ारों नौकरी के उम्मीदवार पुलिस की इजाज़त न मिलने के बावजूद तीन जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन ऐसे आंदोलनों की कड़ी में सबसे ताज़ा हैं। जुलाई में, परीक्षा में गड़बडय़िों को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था। नौकरी के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने, जो लगभग एक महीने से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बडिय़ों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे थे, झारखंड सरकार द्वारा उनकी लगभग सभी मुख्य मांगें मान लिए जाने के बाद अपना धरना स्थगित करने की घोषणा की। बेंच ने कहा कि पुणे एक एजुकेशन हब है। साथ ही, वहाँ के ज़्यादातर छात्र पढ़ाई में सचमुच दिलचस्पी रखते हैं। वे सडक़ों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करने में दिलचस्पी नहीं रखते… अगर वे विरोध कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उनकी शिकायतें गंभीर हैं। ये छात्र कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, और अगर उन्हें परीक्षा की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नजऱ आती है, तो उन्हें विरोध करने का पूरा अधिकार है।

अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम से लगा बड़ा झटका

कोर्ट से राहत नहीं, जमा करने होंगे दो करोड़
सीजेआई बोले- आपका पैसा भी अता पता लापता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता राजपाल यादव को निर्देश दिया है कि वह चेक बाउंस मामले में शिकायतकर्ता को देय रकम में से 2 करोड़ रुपये 13 अक्टूबर तक जमा करें। कोर्ट ने साफ कहा कि रकम जमा किए जाने के बाद ही वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजपाल यादव की याचिका पर विचार करेगा।
राजपाल यादव आज खुद कोर्ट में मौजूद थे और अपने साथ 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर पहुंचे थे। बाकी 85 लाख रुपये 13 अक्टूबर तक उनकी संपत्ति के खरीदार के जरिए जमा किए जाने हैं, जो राजपाल के साथ कोर्ट में मौजूद था। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि उनकी सजा बढ़ाई भी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अब तक जो बार-बार मोहलत दी गई, उसका मकसद सिर्फ यही था कि शिकायतकर्ता को उसका पैसा मिल सके। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘कानून का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।’ कोर्ट ने साफ किया कि रकम जमा कराने का आदेश इसलिए दिया गया है ताकि शिकायतकर्ता के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हालांकि, अदालत ने कहा कि राजपाल यादव का अब तक का आचरण उसे संतुष्ट नहीं करता। आदेश पारित करने के बाद पीठ और राजपाल यादव के बीच कुछ हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई।
राजपाल ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से हुए आर्थिक नुकसान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म की वजह से उन्हें करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और फिल्म के निर्माता भी घाटे में रहे। इसी दौरान सीजेआई ने मजाकिया अंदाज में फिल्म के नाम को राजपाल यादव के मौजूदा हालात से जोड़ दिया। उन्होंने कहा आपकी फिल्म की तरह आपका पैसा भी अता पता लापता है, गायब। अदालत की इस टिप्पणी पर माहौल कुछ हल्का हो गया।

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