राज्यसभा में बरेली का डंका! भाजपा ने श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह पर लगाया बड़ा दांव

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने बरेली से श्रुति गंगवार और धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नामों से बरेली की सियासत में हलचल बढ़ी और आंवला के समीकरण बदलने के संकेत मिले हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बरेली की राजनीति में भाजपा ने बड़ा दांव चला है। राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से घोषित आठ प्रत्याशियों में बरेली के दो बड़े नाम शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और आंवला से पांच बार विधायक रह चुके कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह को पार्टी ने राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है। दोनों नाम सामने आने के बाद बरेली भाजपा में उत्साह है और इसे आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

श्रुति गंगवार को मिली राजनीतिक विरासत की नई जिम्मेदारी

आईआईटी रुड़की से पढ़ीं श्रुति गंगवार लंबे समय से सहकारिता और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। वह वर्तमान में बरेली अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं। इस बैंक से गंगवार परिवार का पुराना जुड़ाव रहा है। संतोष गंगवार इसके संस्थापक अध्यक्ष रहे, जबकि उनकी पत्नी सौभाग्यवती गंगवार भी बैंक की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। अगस्त 2024 में श्रुति निदेशक मंडल में चुनी गई थीं और बाद में अध्यक्ष बनीं।

पांच बार विधायक रहे धर्मपाल सिंह की संसद की ओर बढ़त

आंवला के गुलड़िया गौरीशंकर गांव से आने वाले धर्मपाल सिंह का राजनीतिक सफर लंबा रहा है। 1996 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी जीत दर्ज की। वह अलग-अलग सरकारों में मंत्री रहे और योगी सरकार में भी कई महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं। राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उनकी सक्रिय राजनीति का दायरा अब राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने की राह पर है।

आंवला में नए चेहरे की तलाश, बरेली की राजनीति में बदलाव

धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने की स्थिति में आंवला विधानसभा सीट पर भाजपा को नए चेहरे की तलाश करनी होगी। वहीं श्रुति गंगवार के प्रत्याशी बनने से बहेड़ी और नवाबगंज से उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर भी विराम लगता दिख रहा है। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने बरेली के दो नेताओं पर भरोसा जताया है। दोनों के राज्यसभा पहुंचने से बरेली का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगा।

रिपोर्ट – सुनील सक्सेना, बरेली

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