मुंबई के गरबा आयोजनों में बदले नियम, एंट्री से पहले तिलक-कलावा की शर्त

आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम में गैर-हिंदू लोगों के शामिल होने पर रोक नहीं है, लेकिन जो भी व्यक्ति गरबा में प्रवेश करेगा, उसे नवरात्रि से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और आयोजन के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुंबई में नवरात्रि के गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर इस बार कुछ नए नियम चर्चा में हैं। मलाड ईस्ट के रामलीला मैदान में बीजेपी की ओर से आयोजित किए जा रहे गरबा कार्यक्रम में एंट्री से पहले तिलक लगाना और हाथ में कलावा बांधना जरूरी किए जाने की बात सामने आई है।

आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम में गैर-हिंदू लोगों के शामिल होने पर रोक नहीं है, लेकिन जो भी व्यक्ति गरबा में प्रवेश करेगा, उसे नवरात्रि से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और आयोजन के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। आयोजन स्थल पर लगाए गए कुछ पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ का भी उल्लेख किया गया है। इस वजह से गरबा आयोजन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

गरबा में एंट्री से पहले तिलक और कलावा

मलाड ईस्ट के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रम को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रतिभागियों को एंट्री से पहले तिलक लगाया जाएगा और उनके हाथ में कलावा बांधा जाएगा। आयोजकों का तर्क है कि गरबा सिर्फ मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाली धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा आयोजन है। इसलिए कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को इससे जुड़ी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। यही वजह है कि आयोजन स्थल पर प्रवेश के लिए कुछ धार्मिक प्रक्रियाओं को अनिवार्य किए जाने की बात कही जा रही है।

गैर-हिंदुओं की एंट्री पर क्या कहा गया?

आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में गैर-हिंदू लोगों के प्रवेश पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, उन्हें भी आयोजन की धार्मिक परंपराओं और निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। यानी आयोजकों की ओर से जोर इस बात पर है कि कार्यक्रम में आने वाला हर व्यक्ति नवरात्रि और गरबा से जुड़ी मान्यताओं का सम्मान करे। यह नियम किस तरह लागू किया जाएगा और प्रवेश के दौरान इसकी निगरानी किस तरीके से होगी, इसे लेकर आयोजन स्थल पर व्यवस्था की जा रही है।

पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ का भी जिक्र

गरबा आयोजन स्थल पर लगाए गए कुछ पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है। इसको लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ‘लव जिहाद’ एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से विवादित शब्द है, जिसका इस्तेमाल कुछ संगठन अंतरधार्मिक संबंधों के संदर्भ में आरोप लगाने के लिए करते हैं। दूसरी ओर, इस शब्द के इस्तेमाल और इसके दावों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्षों की अलग-अलग राय रही है। ऐसे में पोस्टरों में इस शब्द के इस्तेमाल ने आयोजन को लेकर बहस को और बढ़ा दिया है।

आयोजकों का क्या है तर्क?

आयोजकों का कहना है कि गरबा आयोजन नवरात्रि की धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसलिए कार्यक्रम में आने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे आयोजन की धार्मिक प्रकृति और नियमों का सम्मान करें। तिलक और कलावा को भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा बताया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य आयोजन की धार्मिक पहचान को बनाए रखना है।

मुंबई में गरबा आयोजनों को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

मुंबई और महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में कुछ आयोजनों में प्रवेश, पहचान जांच और प्रतिभागियों के आचरण से जुड़े नियमों को लेकर बहस सामने आती रही है। कुछ आयोजक सुरक्षा और आयोजन की धार्मिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपने स्तर पर नियम तय करते हैं। हालांकि, हर आयोजन के नियम अलग हो सकते हैं और किसी एक कार्यक्रम के नियमों को पूरे मुंबई के गरबा आयोजनों पर लागू नहीं माना जा सकता।

इस बार क्या है खास?

इस बार मलाड ईस्ट के आयोजन में तिलक और कलावा को लेकर सामने आई व्यवस्था ने खास तौर पर ध्यान खींचा है। इसके अलावा पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ का जिक्र होने से यह मामला केवल गरबा आयोजन तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया है। अब यह देखना होगा कि कार्यक्रम के दौरान इन नियमों को किस तरह लागू किया जाता है और क्या अन्य गरबा आयोजक भी इसी तरह के नियम अपनाते हैं।

गरबा और धार्मिक परंपरा का संबंध

गरबा गुजरात और पश्चिम भारत की प्रमुख लोक एवं धार्मिक परंपराओं में से एक है। नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया के आयोजन बड़े स्तर पर किए जाते हैं।

समय के साथ गरबा आयोजन धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ बड़े सार्वजनिक मनोरंजन कार्यक्रमों का रूप भी ले चुके हैं। ऐसे में आयोजकों द्वारा धार्मिक परंपरा और आधुनिक आयोजन व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है।मलाड के आयोजन में तिलक और कलावा की अनिवार्यता इसी धार्मिक पहचान को प्रमुखता देने वाली व्यवस्था के रूप में बताई जा रही है।

नियमों को लेकर आगे क्या?

फिलहाल चर्चा का केंद्र यह है कि कार्यक्रम में प्रवेश के दौरान तिलक और कलावा की व्यवस्था किस तरह लागू होगी और क्या इसको लेकर कोई औपचारिक लिखित गाइडलाइन जारी की गई है।साथ ही, पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ के उल्लेख को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

मुंबई के मलाड ईस्ट में आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रम में एंट्री से पहले तिलक और कलावा की व्यवस्था चर्चा में है। आयोजकों का कहना है कि गैर-हिंदू लोगों के लिए प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन कार्यक्रम में आने वाले सभी लोगों को नवरात्रि की धार्मिक परंपराओं और आयोजन के नियमों का पालन करना होगा।

वहीं, आयोजन स्थल पर लगे कुछ पोस्टरों में ‘लव जिहाद’ का जिक्र होने से मामला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल यह नियम इस विशेष आयोजन से संबंधित बताए जा रहे हैं; इन्हें मुंबई के सभी गरबा और डांडिया आयोजनों के लिए सामान्य नियम नहीं माना जा सकता।

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