बीजेपी नेताओं पर संजय राउत का तंज, बोले- नशा मुक्ति केंद्र भेजने की जरूरत है
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते रोज जालंधर में ‘नशा मुक्त रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर लड़ेगी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: चारों तरफ से सवालों में घिरी भाजपा सरकार अब नया सगूफा ले आई है।
एक तरफ जहां भाजपा राज में चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं तो वहीं दूसरी तरफ जनता को गुमराह करने के लिए अमित शाह बयान पर बयान दिए जा रहे हैं। लेकिन ये सारे उनके बयान SIR या वोट चोरी पर नहीं हैं बल्कि चुनाव जीतने के लिए नशा मुक्त बनाने के लिए किये जा रहे हैं।
दरअसल पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रमुख चुनावी मुद्दे का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते रोज जालंधर में ‘नशा मुक्त रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव ‘नशा मुक्त पंजाब’ के मुद्दे पर लड़ेगी। उन्होंने पंजाब के युवाओं और माताओं से वादा किया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को ‘चिट्टा’ मुक्त करने का लक्ष्य रखा जाएगा।
अमित शाह ने अपने भाषण में आम आदमी पार्टी सरकार पर पंजाब में नशे की समस्या बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद नशीले पदार्थों की बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा। ये आरोप भाजपा और अमित शाह की ओर से लगाए गए हैं।
अमित शाह नशा मुक्ति की बात बहुत जोर-शोर से करते हैं। उनका सवाल है कि नशे के कारोबारियों पर बेरहम कार्रवाई करनी होगी। डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय का फॉर्मूला बताते हैं। आंकड़े गिनाते हैं कि मोदी सरकार में पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त हुए। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने बड़े अभियान के बावजूद देश में नशे की समस्या कम क्यों नहीं हो रही? सात करोड़ लोग नशे से प्रभावित बताए जाते हैं। एक करोड़ को गंभीर इलाज की जरूरत है।
अगर इतने साल सत्ता में रहने के बाद भी समस्या इतनी बड़ी है, तो फिर नशा मुक्ति वाले भाषण कितने असरदार हैं? वहीं अमित शाह के इस ऐलान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं के पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं इसी बीच शिवसेना UBT नेता संजय राउत ने जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि BJP के सभी लोगों को नशा-मुक्ति केंद्र में डालना चाहिए। ये बहुत गंभीर नशा है… सत्ता का नशा।
गौरतलब है कि संजय राउत का यह बयान सियासी गलियारों में आग की तरह फ़ैल रहा है। उम्मीद है कि इस बयान पर राजनीतिक घमासान मच सकता है। खैर उससे पहले अगर बात की जाए अमित शाह के उस बयान की जिसपर संजय राउत ने तंज कसा है
अमित शाह ने कहा कि भाजपा पंजाब को 31 दिसंबर 2029 से पहले चिट्टा मुक्त करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगी। उन्होंने नशीले पदार्थों की बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी ऐलान किया। शाह ने कहा कि पंजाब का विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक राज्य का युवा नशे की समस्या से बाहर नहीं आता।
अमित शाह पंजाब में कैसे खड़े होकर कहते हैं कि 2029 तक चिट्टा खत्म कर देंगे। लेकिन पंजाब में नशे की समस्या कई सालों से चली आ रही है। पहले कांग्रेस सरकारें रहीं, फिर अकाली दल, अब आम आदमी पार्टी। हर सरकार पर आरोप लगते रहे। लेकिन केंद्र में भाजपा इतने साल से सत्ता में है। गृह मंत्रालय अमित शाह के पास है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, एनसीओआरडी जैसी एजेंसियां केंद्र के अधीन हैं।
फिर भी समस्या जस की तस क्यों है? अगर कार्रवाई इतनी सख्त है तो नशे का कारोबार इतना खुलेआम कैसे चल रहा है? नशा मुक्ति की राजनीति अक्सर चुनावी हथियार बन जाती है। अमित शाह पंजाब चुनाव के पहले इस मुद्दे को मुख्य बना रहे हैं, और लोगों को चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार वाले मुद्दे से भटका रहे हैं। खैर शाह भले ही लोगों को भटकाएं लेकिन विपक्ष इतनी आसानी से हार मानने के मूड में दिखाई नहीं दे रहा है।
इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP के पास देश के लिए कोई विजन नहीं है। पहले नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया। अब ‘वोट बंदी’ कर देश को बर्बाद किया जा रहा है।
गौरतलब है कि भाजपा देश में असली मुद्दों से भटकाने का काम करती रही है। अभी मौजूदा मुद्दे को छोड़कर देश में नशा मुक्ति का नया राग अलाप रही है। लेकिन जनता समझ चुकी है कि ये सब भाजपा महज अपनी राजनीतिक दूकान चमकाने के लिए कर रही है।
जबकि नशा एक गंभीर सामाजिक समस्या है। युवा बर्बाद हो रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं। लेकिन इसे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा बनाकर हल नहीं किया जा सकता। अमित शाह भाषण देते हैं, रोडमैप जारी करते हैं, लक्ष्य तय करते हैं। लेकिन जमीन पर कितना बदलाव आया है? नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने की बात होती है, लेकिन कई केंद्रों में सुविधाएं खराब बताई जाती हैं।
इलाज महंगा है, जागरूकता कम है। अगर सच में नशा मुक्ति करनी है तो राजनीति छोड़कर ठोस काम करना होगा। 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा ने नशे के मुद्दे को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रखने का संकेत दे दिया है। हालांकि विपक्ष भाजपा को इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकने नहीं देगी।



