सेक्स दवाओं के बाद शुभांकर मिश्रा कर रहे हैं विवादस्पद एआईप्लस नोवा फोन का प्रचार

  • करेला नीम चढ़ा : शुभांकर मिश्रा ने एआईप्लस नोवा का काम बिगाड़ा
  • ट्रोलर्स के निशाने पर शुभांकर, चाइनीज एप वाले इस फोन को भारतीय फोन बता रहे हैं
  • जिस फोन पर गंभीर सवाल, उसी का शुभांकर मिश्रा कर रहे प्रचार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एआईप्लस नोवा फोन की चमक और उसका प्रचार कर रहे शुभांकर मिश्रा के चिकने और चमकीले चेहरे को देख कर फिसल गये तो अलावा नुकसान के कुछ हासिल होने वाला नहीं है। शुभाकंर मिश्रा के चेहरे और समय रैना के शो के जरिये भारतीयों के दिलों को दस्तक देने की कोशिश कर रहा एआईप्लस नोवा विवादस्पद फोन पर टेक इन्फलुएंसर पहले ही गभीर सवाल उठा चुके हैं।
भारत की सोच, भारत की पहचान, भारत का भरोसा जैसे टैग लाइन के जरिये इस फोन का प्रचार किया जा रहा है लेकिन एआईप्लस फोन पर आरोप है कि कंपनी ने चाइनीज कंपनियों की मदद से इस फोन को तैयार किया है और भारतीय बता कर देश की जनता की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सवाल फोन से ज्यादा उस चेहरे पर और उसकी कार्यशैली पर भी है जिसका नाम शुभाकंर मिश्रा है जिन पर पहले ही सेक्स की दवाओं और दूसरे अनैथिकल कार्यों को अपने पाडकास्ट के माध्यम से करने के आरोप लगे हैं।

शुभांकर कि मीडिया जगत में जहरीले पत्रकार की पहचान

जिस शुभाकंर को एआईप्लस नोवा मोबाइल कंपनी ने साफ सुथरी छवि वाला पत्रकार जानकर प्रचार का ठेका दिया दरअस्ल मीडिया जगत में उसकी पहचान एक जहरीले और गोदी मीडिया पत्रकार की है। ऐसा व्यक्ति जब फोन का प्रचार करने निकला तो टेक यूजर्स और आम आदमी को गुस्सा आ गया। कंपनी बीच में फंस गयी कि अब वह क्या करें। जाहिर सी बात है प्रोडक्ट बनाने में पैसे तो खर्च किये ही गये होंगे सोचा कि शुभांकर जैसों का साथ मिल जाएगा तो बात बन जाएगी लेकिन यहां तो लेने के देने पड़ गये। बिना प्रचार के कुछ फोन बिक सकते थे लेकिन अब बात तो सार्वजनिक हो गयी कि फोन के दावे खोखले हैं और बताया कुछ और बेचा कुछ और जा रहा है।

फोन के विभिन्न पहलुओं पर टेक क्रिएटर्स उठा चुके हैं गंभीर सवाल

इस फोन को लेकर बनाए गए आलोचनात्मक वीडियो में चाइनजीज एप, ओडीएम मैन्यूफैक्चरिंग, साफ्टवेयर और इंडियन ब्रांडिग से जुड़े सवाल उठाए गए थे। अब इसी पूरी पृष्ठभूमि में सामने आता है शुभांकर मिश्रा का प्रमोशन। सवाल सीधा है जिस फोन के खिलाफ टेक क्रिएटर्स के वीडियो पर कंपनी अदालत पहुंच चुकी है जिस ब्रांड को लेकर साफटवेयर, चाइनजी एप और मैन्यूफैक्चरिुग को लेकर बहस हो चुकी है उसी फोन का प्रचार जब कोई सफेदपोश करता है तो क्या दर्शक को सिर्फ विज्ञापन दिखता है या उसके पीछे के विवाद की जानकारी भी मिलनी चाहिए। एआईप्लस नोवा फोन बाजार में एक ऐसे भारतीय स्मार्टफोन के तौर पर उतरा गया जिसके साथ कंपनी ने स्वदेशी टेक्नोलॉजी, डाटा की सुरक्षा और भारतीय पहचान का दावा जोड़ा। लेकिन फोन की लॉन्चिंग के बाद यूटयूब और सोशल मीडिया पर टेक क्रिएटर्स ने इन दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी और दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

शुभांकर के जुडऩे के बाद आलोचना का दौर

कहानी सिर्फ इतनी नहीं कि एक नया फोन आया और कुछ क्रिएटर्स ने उसकी आलोचना कर दी। मामला इतना आगे जा चुका है कि कंपनी को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। क्योंकि शुभांकर ने इस फोन के फेवर में ऐसा राग दरबारी गाया कि आज के जेन जी को बुरा लग गया और युवा जो इस पूरे खेल के पीछे के गणित को समझ रहे है उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। तभी तो टेक क्रिएटर्स ने इस फोन पर और शुभांकर पर सवालों की बरसात कर दी। न जाने कितने फोन आते हैं और चले जाते हैं लेकिन जितनी कंट्रोवर्सी शुभांकर के इस ब्रांड से जुडऩे के बाद हो रही है वह इससे पहले कभी नहीं देखी गयी।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती

एआईप्लस फोन समय रैना के चर्चित शो इंडियाज गॉट लैटेंट सीजन 2 के साथ स्पॉसरशिप की। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के हेड आफ ब्रांड एंड मार्केटिंग कह रहे हैं कि यह सब कुछ रैना की जेन जी अप्रोच और युवाओं से जुड़ा होने के कारण किया गया है। इन सब अपडेट के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार है और युवाओं में बेचैनी साफ दिखायी दे रही है। रेडिट जैसे प्लेटफार्म पर यूजर्स पूछ रहे हैं कि जिस ब्रांड को लेकर टेक क्रिएटर्स ने पहले से गंभीर सवाल उठाए हैं उसे इतने बड़े युवा दर्शक वर्ग वाले शो में स्पांसर के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा है।

शुभांकर तुमने ऐसा क्यों किया?

किसी ब्रांड का विज्ञापन करना अपने आप में गलत होने का प्रमाण नहीं है। कोई भी कंपनी अपने उत्पाद के प्रचार के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन जब उसी उत्पाद को लेकर सार्वजनिक विवाद और कानूनी कार्रवाई मौजूद हो तब सवाल यह बनता है कि प्रमोशन में कंज्यूमर को कितना बताया जा रहा है और यही वह जगह है जहां शुभांकर मिश्रा के प्रमोशन पर सवाल उठ रहे हैं। फोन अच्छा है या खराब इसका फैसला विज्ञापन की आवाज नहीं स्वतंत्र प्रोडक्ट टेस्टिंग और ग्राहक अनुभव करेंगे लेकिन ग्राहक के लिए एक बात जरूर महत्वपूर्ण है कि फोन खरीदना सिर्फ स्क्रीन, कैमरा और प्रोसेसर खरीदना नहीं होता। वह कंपनी के दावे पर भरोसा भी खरीदता है।

शुभांकर मिश्रा नैतिकता को कर दिया दरकिनार

कंपनी ने सोचा कि चलो किसी ऐस सफेदपोश चेहरे को जोड़ा जाए जो बैक डोर से फोन का प्रचार करे। मीडिया के नैतिक पतन की शुरूआत तो काफी पहले से हो चुकी थी। लेकिन पत्रकारिता की केंचुल ओड़े कुछ पत्रकार इतने गिर जाएंगे किसी ने नहीं सोचा था। सफेदपोश शुभांकर मिश्रा ने कंपनी का यह एड कैंपेन धड़ से लपक किया और नैतिकता की परवाह किये बिना इस फोन का प्रचार प्रसार करने लगे। महज कुछ पैसों के लिए उन्होंने उन टेक समीक्षकों की भी परवाह नहीं कि जो इस फोन पर उंगलिया उठा चुके थे और इस फोन को चाइनीज फोन बता रहे थे।

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