होमवर्क में AI का सहारा ले रहे छात्र, क्या इससे बिगड़ रहा उनका रिजल्ट?
AI टूल्स की मदद से कुछ ही सेकंड में सवालों के जवाब और पढ़ाई से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पढ़ाई करने के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है। अब छात्रों को किसी सवाल का जवाब ढूंढने, कठिन विषयों को समझने, नोट्स तैयार करने और होमवर्क पूरा करने के लिए घंटों किताबों में उलझने की जरूरत नहीं पड़ती।
AI टूल्स की मदद से कुछ ही सेकंड में सवालों के जवाब और पढ़ाई से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि दुनियाभर में छात्र पढ़ाई के लिए AI का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय छात्र भी इस ट्रेंड से अछूते नहीं हैं। स्कूल से लेकर कॉलेज तक, कई विद्यार्थी होमवर्क और असाइनमेंट पूरा करने के लिए AI की मदद ले रहे हैं।
हालांकि, पढ़ाई में AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। क्या AI छात्रों को वास्तव में बेहतर तरीके से सीखने में मदद कर रहा है, या फिर इसकी वजह से वे खुद सोचने और समस्याओं को हल करने की क्षमता का कम इस्तेमाल कर रहे हैं? AI के शैक्षणिक प्रभाव को लेकर जारी बहस के बीच एक नई स्टडी ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। स्टडी से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, AI होमवर्क पूरा करने में छात्रों का मददगार बन सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और परीक्षा के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
AI से आसान हुआ होमवर्क, छात्रों को मिल रहे तुरंत जवाब
पहले किसी सवाल का जवाब खोजने के लिए छात्रों को किताबों, नोट्स और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की मदद लेनी पड़ती थी। कई बार किसी कठिन सवाल को समझने में काफी समय भी लग जाता था। लेकिन अब AI आधारित टूल्स ने इस प्रक्रिया को आसान बना दिया है।
छात्र AI की मदद से गणित के सवालों के हल समझ सकते हैं, विज्ञान से जुड़े मुश्किल कॉन्सेप्ट को आसान भाषा में जान सकते हैं और इतिहास, भूगोल तथा अन्य विषयों के सवालों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, AI की मदद से निबंध लिखने, प्रोजेक्ट तैयार करने, नोट्स बनाने और होमवर्क पूरा करने में भी सहायता मिल सकती है।
AI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छात्रों को उनकी जरूरत के हिसाब से जानकारी देने में सक्षम है। यदि किसी विद्यार्थी को कोई विषय समझने में परेशानी हो रही है, तो वह AI से उसी विषय को अलग-अलग उदाहरणों के साथ समझाने के लिए कह सकता है। इस तरह AI पढ़ाई को सुविधाजनक बनाने वाला एक उपयोगी टूल बनकर उभरा है। लेकिन समस्या तब पैदा हो सकती है, जब छात्र किसी विषय को समझने के बजाय AI से सीधे उसका जवाब लेकर अपना होमवर्क पूरा करने लगते हैं।
80% स्टूडेंट्स पढ़ाई में AI का इस्तेमाल कर रहे
वर्ल्ड बैंक की ‘वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026’ बीते दिनों प्रकाशित की गई है. इस रिपोर्ट में स्टूडेंट्स के बीच AI का इस्तेमाल और उसके प्रभाव पर स्टडी की गई है. ये स्टडी चीन में चीन में 7वीं से 12वीं क्लास के स्टूडेंट्स के बीच की गई है, जो रेखांकित करती है कि 2022 से 2025 के बीच पढ़ाई में AI का इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स की संख्या शून्य से 80 फीसदी तक पहुंच गई है, ये पढ़ाई के लिए पहली बार AI का इस्तेमाल करने वाले स्टूडेंट्स थे.
AI के इस्तेमाल सेहोमवर्क स्कोर 18% बढ़ा, एग्जाम मार्क्स 20% तक गिरा
स्टडी रेखांकित करती है कि स्कूल स्टूडेंट्स होमवर्क करने के लिए AI का प्रयोग करते हैं. इससे धीरे-धीरे उनके होमवर्क स्कोर में 18 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. साथ ही स्टडी ये भी रेखांकित करती है कि पढ़ाई में AI के इस्तेमाल से स्टूडेंट्स का रिजल्ट खराब हाे रहा है. स्टडी के मुताबिक इस वजह से क्लास में होने वाले मासिक एग्जाम में स्टूडेंट्स का स्कोर 20% गिर गए.
स्टडी में ये सभी सामने आया है कि जिन स्टूडेंट्स ने कभी AI का इस्तेमाल किया था. कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम में उनका औसत स्कोर 5% से 7% कम था. स्टडी बताती है कि लंबे समय तक AI का इस्तेमाल करने से नकारात्मक प्रभाव और बढ़ गए. जो 20 % तक पहुंच गया.
स्टडी में ट्रेंड को लेकर टिप्पणी की गई कि AI के इस्तेमाल से स्टूडेंट्सअसाइनमेंट पूरा करने में बेहतर कर रहे, लेकिन वे शायद वे ज्ञान और कौशल विकसित नहीं कर पा रहे थे.
दोगुना समय खर्च कर रहा AI का इस्तेमाल
स्टडी ये भी रेखांकित करती है कि AI का इस्तेमाल दोगुना समय खर्च कर रहा है. स्टडी के मुताबिक स्टूडेंट्स ने जितना समय AI से होमवर्क करने में लगाया, उतना ही समय बाद में भी लगाया. इससेक्लास-एग्जाम परफॉर्मेंस पर कम असर पड़ा.



