दिल्ली के कारोबारियों को सुप्रीम झटका, जल्द सुनवाई से इंकार

  • कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने के आदेश के खिलाफ याचिका
  • शीर्ष अदालत बोली- सभी संबंधित पक्षों में बेहतर समझ आएगी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) की ओर से कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने के आदेश के खिलाफ कारोबारियों ने याचिका फाइल की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्षों में बेहतर समझ आएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा, हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे। छोटे दुकानदार इन्हीं दिनों अपनी आजीविका कमाते हैं। हम जानते हैं कि पूरे परिवारों को कितनी कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि एनडीएमसी ने गुरुवार देर रात सेंट्रल पार्क को बंद करने का निर्देश दिया, जिससे वहां व्यापार करना असंभव हो गया है। जस्टिस बागची ने संकेत दिया कि अगर उठाए गए कदम जरूरत से ज्यादा (अनुचित) पाए जाते हैं तो अदालत के पास हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। इसमें सार्वजनिक कानून और मुआवजा कानून के तहत मिली शक्तियां भी शामिल हैं।

मर्चेंट एसोसिएशन ने दायर की याचिका

वकील जय अनंत देहादराय ने दिल्ली किराना कमिटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा दायर एक याचिका का जिक्र किया। इसमें सेंट्रल पार्क में विरोध प्रदर्शन के आह्वान को लेकर चिंता जताई गई है। उनके अनुसार, इससे रोजाना 200 करोड़ रुपये का व्यापार बाधित होगा। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली नगर निगम ने कल रात एक नोटिस जारी कर इस जगह को बंद करने का आदेश दिया है। वकील ने दलील दी कि त्योहारों का मौसम आने वाला है, ऐसे में जगह को बंद करने से कारोबार को भारी नुकसान होगा।

जब ऐसी नौबत आएगी, तब देखा जाएगा : जस्टिस बागची

जस्टिस बागची ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कई मुद्दे जैसे विरोध करने का अधिकार, मूंगफली बेचने का प्रस्ताव और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं आपस में जुड़े हुए हैं। जस्टिस बागची ने कहा, कोई विरोध करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। ये सभी बातें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। जस्टिस बागची ने कहा, अगर व्यापार में नुकसान होता है तो हम अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। जब ऐसी नौबत आएगी, तब देखा जाएगा। बेंच ने बताया कि इस याचिका को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा

  • कामजोंग में भीड़ के हमले में महिला की हत्या

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गुवाहाटी। मणिपुर के कामजोंग जिले में संदिग्ध नगा उग्रवादियों द्वारा किए गए कथित हमले में एक कुकी महिला की मौत हो गई और उसका पति घायल हो गया। राज्य में जारी जातीय हिंसा के बीच, समुदाय के दो अन्य लोग भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतक महिला हतनेइकिम हाओकिप मोलनोई गांव की रहने वाली थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह समूह जरूरी सामान खरीदने के लिए फाईकोह जा रहा था तभी फाईकोह और ऐशु के बीच सडक़ पर उन पर हमला किया गया।
हतनेइकिम के पति घायल हो गए, जबकि उनके साथ मौजूद दो अन्य नागरिक अभी भी लापता हैं। गुरुवार को हुए इस हमले के बाद कुकी-नगा संघर्ष में मारी गई कुकी महिलाओं की संख्या बढक़र 10 हो गई है। इनमें दो गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। ये झड़पें कुकी-मैतेई संघर्ष के बाद हुई हैं, जो 2023 से 2025 तक चला था। यह हमला उस घटना के पांच दिन बाद हुआ है, जिसमें तीन जिलों में नौ लोगों की जान चली गई थी। इनमें दो कुकी, एक गोरखा और छह नगा पुरुष शामिल थे। इस साल फरवरी में कुकी-नगा संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 22 नागा और 32 कुकी लोगों की जान जा चुकी है। बुधवार देर रात सुरक्षा बलों को कांगपोकपी जिले में नगा व्यक्ति अजिनबोउ रिंगकामाई का कटा हुआ सिर मिला। 10 अक्टूबर को जब संदिग्ध कुकी उग्रवादियों ने मकुई अशांग गांव पर हमला किया तो मारे गए चार नगा पुरुषों में वह भी शामिल थे। हमले के दौरान उनका सिर धड़ से अलग हो गया था और वह मिल नहीं रहा था। 11 अक्टूबर को उनका बिना सिर वाला शव इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया।

अधिकारों का हनन कर रही है भाजपा : अभिषेक

  • अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर भडक़े टीएमसी सांसद

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को प्रतिबंधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता के प्रति एकजुटता भी व्यक्त की, जिन्हें इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।
डायमंड हार्बर से सांसद ने सोशल मीडिया पर एक कड़े पोस्ट में आरोप लगाया कि नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने, असहमति जताने और सरकार से सवाल पूछने के उनके अधिकार पर लगातार पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि एक शोक संतप्त परिवार को अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे थे और 2022 में हुई उसकी हत्या में कथित ‘वीआईपी’ के पहलू पर सवाल उठा रहे थे। अंकिता के माता-पिता को बृहस्पतिवार तडक़े कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ हिरासत में लिया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

विपक्ष की बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश

  • रक्षामंत्री का का कांग्रेस पर तीखा हमला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर जाने-अनजाने भारत विरोधी ताकतों के हाथों में खेलते नजर आने का आरोप लगाया और कहा कि हिंसा और अराजकता की आग में देश को झोंककर बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाने का ख्वाब देख रही कांग्रेस ने अब अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल करने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है। रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रही कांग्रेस, उसके राजनीतिक सहयोगियों और अन्य संगठनों को जमकर खरी-खोटी सुनायी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है इसलिये स्वाभाविक है कि तमाम शक्तियों को भारत का यह उभार रास नहीं आ रहा होगा। सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, देश को यह समझने की आवश्यकता है कि दशकों से चुनाव हार रहे राजनीतिक दल जाने या अनजाने में आज इन (भारत विरोधी) शक्तियों के हाथों में खेलते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में जारी प्रदर्शन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आज स्पष्ट हो गया है दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है वह अराजकता द्वारा भारत की प्रगति को पटरी से उतारने का एक निंदनीय प्रयास है। सिंह ने कहा कि चौरी-चौरा में हिंसा हो जाने मात्र से ही महात्मा गांधी ने अपना पूरा असहयोग आंदोलन रोक दिया था लेकिन खुद को महात्मा गांधी की उत्तराधिकारी बताने वाली कांग्रेस हिंसा और अराजकता के द्वारा सत्ता परिवर्तन जैसी बातें करके अपने राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहती है।

मोदी जी, अफसर उलझन में हैं मैं समझा दूं: राहुल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी ही इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर चल क्या रहा है। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए यहां तक कह दिया कि अगर वे चाहें तो इस मामले को समझाने के लिए राहुल खुद तैयार हैं।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, विदेश मंत्रालय में आपके अधिकारी उलझन में हैं कि आखिर चल क्या रहा है। बेहतर होगा कि आप ही समझा दें। या फिर, अगर आप चाहें तो मैं भी समझा सकता हूं।

कायरों के जाने के बाद कांग्रेस में सिर्फ शेर बचे: खरगे

  • युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ राहुल की बातचीत के दौरान बोले अध्यक्ष

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गांधी की बातचीत के दौरान उनके और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच खुलकर चर्चा हुई। इस दौरान राहुल गांधी ने उन कई प्रमुख नेताओं का जिक्र किया, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में पार्टी छोड़ दी है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने युवा नेताओं से कहा कि कायरों और लालचियों के चले जाने के बाद कांग्रेस में अब केवल शेर बचे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस मौके पर खरगे ने गांधी पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि जो नेता पार्टी छोडक़र गए हैं, वे सभी उनके दोस्त थे।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान राहुल ने राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी को लेकर अपने नजरिए के बारे में एक दिलचस्प बात बताई। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने युवा नेताओं से कहा कि जो लोग लालची या डरपोक थे। उन्होंने पार्टी छोड़ दी। या तो वे सुविधाओं और सुरक्षा की चाह में चले गए या फिर प्रवर्तन निदेशालय-ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो-सीबीआई के डर से। इस खरगे ने मजाकिया अंदाज में कहा, वे सब आपके दोस्त थे। इस टिप्पणी से थोड़ा असहज होते हुए राहुल गांधी ने जवाब दिया, मेरी बहन यहीं बैठी हैं। उन्हें पता है कि वे (सिंधिया) मेरे दोस्त नहीं थे। राहुल ने खरगे का उदाहरण देते हुए बताया कि दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका चूकने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष ने कभी भी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। राहुल ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार के पास केवल आठ से दस महीने बचे हैं। राहुल ने यूथ कांग्रेस, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया और सेवा दल के लगभग 60 कार्यकर्ताओं को चाय पर पार्टी मुख्यालय बुलाया था। उन्होंने उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि विरोध-प्रदर्शन और संघर्ष उनके राजनीतिक प्रशिक्षण का एक अहम हिस्सा हैं।

राहुल ने सुनाया किस्सा

इसके बाद गांधी ने राजनीतिक संबंधों के बारे में अपनी समझ को स्पष्ट करने के लिए अपनी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, मुझे राजनीतिक सीख अपनी दादी से मिली। एक बार मैंने उनसे पूछा कि आपकी सबसे अच्छी दोस्त कौन है? उन्होंने जवाब दिया कि उनकी कोई सबसे अच्छी दोस्त नहीं है। मैंने एक ऐसी महिला का नाम लिया जो अक्सर हमारे घर आती थी और पूछा कि क्या वह आपकी सबसे अच्छी दोस्त नहीं है? मेरी दादी ने कहा कि नहीं हो सकता है कि मैं उसकी सबसे अच्छी दोस्त होऊं, लेकिन वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं है। इस किस्से से सबक लेते हुए राहुल गांधी ने खरगे की ओर रुख किया और कहा, मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूं। जो मेरा दोस्त दिखता है, जरूरी नहीं कि वह असल में दोस्त हो और जो मेरा दुश्मन लगता है, जरूरी नहीं कि वह सच में दुश्मन हो। आपके लिए यह पहचान पाना बहुत मुश्किल है कि मेरे असली दोस्त कौन हैं।

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