इंजीनियर राशिद की जमानत पर सस्पेंस बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में लंबे समय से हिरासत में बंद इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर अदालत के इस कदम के बाद अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर के बारामूला लोकसभा क्षेत्र से सांसद अब्दुल राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में लंबे समय से हिरासत में बंद इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर अदालत के इस कदम के बाद अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
इंजीनियर राशिद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए कथित टेरर फंडिंग मामले में आरोपी हैं। उन्हें अगस्त 2019 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं।
जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित
दिल्ली हाईकोर्ट में इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इसका मतलब है कि अदालत इस मामले में अपना निर्णय बाद में सुनाएगी।
फिलहाल इंजीनियर राशिद को जमानत मिलने या नहीं मिलने को लेकर कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके समर्थकों और राजनीतिक हलकों की नजरें अदालत के अगले आदेश पर बनी हुई हैं।
रशीद की ओर से दलील दी गई कि वे 7 साल से हिरासत में हैं. इसी तरह के आरोपों का सामना कर रहे एक अन्य आरोपी शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 में जमानत दे दी थी.
2019 से जेल में बंद है राशिद
NIA ने उनकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने भारत के खिलाफ भाषण दिए, भारत विरोधी गतिविधियों का समर्थन किया, और अंतरिम जमानत पर बाहर रहने के दौरान वे 2 संरक्षित गवाहों से मिले थे. राशिद अगस्त 2019 से जेल में बंद हैं. स्पेशल NIA कोर्ट ने राशीद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप तय किए थे.
सुनवाई के दौरान इंजीनियर राशिद की ओर से दलील दी गई कि वह पिछले करीब 7 साल से जेल में हैं. उनके वकील ने इसी मामले में समान आरोपों का सामना कर रहे एक अन्य आरोपी शब्बीर अहमद शाह को मिली जमानत का भी हवाला दिया. दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 में शब्बीर अहमद शाह को जमानत दे दी थी, ऐसे में राशिद को भी राहत मिलनी चाहिए.
एनआईए ने कियया जमानत याचिका का विरोध
वहीं, NIA ने इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका का विरोध किया. जांच एजेंसी की ओर से दलील दी गई कि राशिद ने भारत विरोधी भाषण दिए और भारत विरोधी गतिविधियों का समर्थन किया. NIA ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने दो संरक्षित गवाहों से मुलाकात की थी.
एजेंसी के मुताबिक, अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर रहने के दौरान भी उन्होंने गवाहों से संपर्क किया था. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है.



