बच्चों का सर्दियां आने से पहले रखें खास ख्याल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मौसम में बदलाव का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है। गर्मी और बारिश के बाद जैसे ही तापमान गिरना शुरू होता है, सुबह-शाम की ठंड बढ़ती है और वातावरण में नमी तथा प्रदूषण का स्तर बदलता है, वैसे ही बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश, बुखार और सांस से जुड़ी परेशानियां बढऩे लगती हैं। छोटे बच्चे अपनी परेशानी को हमेशा ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए ठंड का मौसम शुरू होने से पहले ही माता-पिता को उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर तैयार रहना चाहिए। ठंड से बचाव का मतलब केवल बच्चों को गर्म कपड़े पहनाना नहीं है। उनके खान-पान, नींद, कमरे के तापमान, साफ-सफाई, स्कूल जाने की दिनचर्या, खेलने के समय और संक्रमण से बचाव तक हर पहलू पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर नवजात शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों के मामले में थोड़ी-सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए सर्दियां शुरू होने से पहले माता-पिता को बच्चों की जरूरत के अनुसार गर्म कपड़े, बिस्तर, जूते-मोजे और जरूरी स्वास्थ्य सामग्री तैयार कर लेनी चाहिए। साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि बच्चे को कितनी ठंड लग रही है और कब डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है।

सर्दी-जुकाम को हल्के में न लें

सर्दियों में बच्चों में सर्दी-जुकाम और खांसी आम हो सकती है, लेकिन हर बीमारी को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यदि तेज या लगातार बुखार है, सांस लेने में कठिनाई हो रही है, बच्चा बहुत सुस्त है, पानी या दूध नहीं ले पा रहा है, लगातार उल्टी हो रही है, स्थिति बिगड़ती दिखाई दे रही है तो डॉ. की सलाह लेना जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों में सांस की तकलीफ को गंभीरता से लेना चाहिए।

माता-पिता खुद भी रखें ध्यान

बच्चों की देखभाल करने वाले माता-पिता अगर खुद बीमार या अत्यधिक थके हुए हों तो बच्चों की देखभाल प्रभावित हो सकती है। इसलिए माता-पिता को भी अपनी नींद, भोजन और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। घर के सभी सदस्यों को सर्दियों की मूल सावधानियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

खान-पान पर दें विशेष ध्यान

सर्दियों में बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन देना बहुत जरूरी है। मौसम बदलने पर कई बच्चे कम पानी पीते हैं। माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ ले रहा है। बच्चे के भोजन में दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध या अन्य उपयुक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। भोजन बच्चे की उम्र और सामान्य आहार के अनुसार होना चाहिए। सिर्फ इसलिए कि मौसम ठंडा है, बच्चे को अत्यधिक तला-भुना या बहुत मसालेदार खाना खिलाना जरूरी नहीं है। सर्दियों में बाजार में मिलने वाले बहुत अधिक मीठे और तले हुए खाद्य पदार्थों की जगह घर का संतुलित भोजन बेहतर विकल्प है।

सिर, कान, हाथ और पैरों को ढककर रखें

सर्दियों में बच्चे के शरीर के खुले हिस्सों को ठंडी हवा से बचाना जरूरी है। विशेष रूप से सुबह और रात के समय सिर तथा कानों को ढकना उपयोगी हो सकता है। बाहर जाते समय बच्चे को गर्म मोजे और मौसम के अनुरूप जूते पहनाएं। यदि जूते या मोजे गीले हो जाएं तो उन्हें तुरंत बदल दें। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से शरीर ठंडा हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर समय सिर से पैर तक अत्यधिक गर्म कपड़ों में लपेटकर रखा जाए। बच्चे को जरूरत से ज्यादा गर्म रखने से भी परेशानी हो सकती है। कपड़े मौसम और बच्चे की गतिविधि के अनुसार होने चाहिए। क्योंकि नवजात शिशुओं और बहुत छोटे बच्चों को ठंड से बचाने के मामले में अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।

सर्दियों में खेलना बंद न कराएं

कई माता-पिता ठंड के डर से बच्चों को घर से बाहर निकलने ही नहीं देते। लेकिन सुरक्षित परिस्थितियों में बच्चों का शारीरिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है। मौसम ठीक हो तो दिन के अपेक्षाकृत गर्म समय में बच्चे को खेलने दिया जा सकता है। यदि बाहर बहुत ज्यादा ठंड, कोहरा, बारिश या तेज हवा हो तो घर के अंदर खेलने या शारीरिक गतिविधि के विकल्प तलाशे जा सकते हैं। खेलने के दौरान बच्चे को बहुत ज्यादा कपड़े पहनाने से भी बचें। अगर बच्चा दौड़ रहा है और उसे पसीना आ रहा है तो जरूरत के अनुसार कपड़ों की परत कम की जा सकती है। गर्मी की तुलना में सर्दियों में प्यास कम महसूस हो सकती है। इसके बावजूद शरीर को पानी की आवश्यकता बनी रहती है। माता-पिता को छोटे बच्चों को समय-समय पर पानी देने की आदत बनाए रखनी चाहिए। यदि बच्चा स्कूल जाता है तो उसकी पानी की बोतल साथ भेजें।

 

 

 

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