दिल्ली में आवाजाही पर पाबंदियों का मुद्दा SC पहुंचा, जानिए कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश देने के लिए तैयार है कि मामले पर दोपहर 3 बजे सुनवाई की जाए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर लगाई गई पाबंदियों का मामला शुक्रवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन और वृंदा ग्रोवर ने अदालत के समक्ष प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। मामले पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने वकीलों को दोपहर 2 बजे दोबारा पेश होने को कहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।
एक नागरिक के तौर पर मुझे प्रदर्शन का अधिकार
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश देने के लिए तैयार है कि मामले पर दोपहर 3 बजे सुनवाई की जाए. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि एक नागरिक के तौर पर उन्हें शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि मामले को दोपहर 2 बजे सुना जाए और प्रदर्शन के आयोजक को भी पेश किया जाएगा. सिब्बल ने यह भी कहा कि प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा आदेश उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.
गोपाल शंकरनारायणन ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों के रद्द किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 1.8 करोड़ लोग रहते हैं और उनमें से सभी प्रदर्शन में शामिल होने वाले नहीं हैं.
आम लोगों की सुविधाओं पर व्यापक पाबंदी का असर
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत के सामने ऐसा दस्तावेज है, जो कुछ सार्वजनिक सुविधाओं पर व्यापक प्रतिबंध की ओर संकेत करता है. उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिक भी प्रभावित होते हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि एक तरफ प्रदर्शन करने वाले नागरिकों का अधिकार है, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करना है… दोनों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. उन्होंने टिप्पणी की कि प्रशासन ने व्यापक प्रतिबंध लगाकर असंतुलन पैदा किया है.
मेट्रो बंद करने से पूरे एनसीआर के लोग प्रभावित
गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने से दिल्ली और एनसीआर के आम नागरिकों को परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के नाम पर पूरे शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए. कपिल सिब्बल ने फिर दोहराया कि एक नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध करने का अधिकार है. इस पर CJI सूर्यकांत ने वकीलों से कहा कि वे दोपहर 2 बजे वापस आएं और अदालत के सामने मामले से जुड़े कुछ और विवरण रखें.
PG संचालकों को धमकाने का भी आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि क्या पुलिस पेइंग गेस्ट (PG) आवासों में जाकर मकान मालिकों को धमका सकती है. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह मुद्दा फिलहाल अदालत के सामने नहीं है. वकीलों ने यह भी बताया कि दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं. इनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती, हिरासत केंद्र तैयार करना, ट्रेनों के संचालन को नियंत्रित करना और होटल बुकिंग पर प्रतिबंध जैसे कदम शामिल हैं.
हाईकोर्ट में सोमवार तक टली सुनवाई
अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि CJP ने सीधे तौर पर किसी आदेश को चुनौती नहीं दी है, जबकि इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने उस मामले को सोमवार तक के लिए टाल दिया था. ग्रोवर ने कहा कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान जंतर-मंतर पर अनुमति मांगी गई थी, लेकिन भारी बैरिकेडिंग के कारण वहां पहुंचना भी मुश्किल हो गया है.
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया है, तो इस मुद्दे पर तत्काल विचार की जरूरत हो सकती है. उन्होंने संकेत दिया कि सोमवार तक सुनवाई टलने से मामले का उद्देश्य आंशिक रूप से निष्फल हो सकता है. जस्टिस बागची ने यह भी पूछा कि क्या शनिवार की तारीख का कोई विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसे अनुमति के लिए आवेदन करना होगा और कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन करना होगा.



