पूछ रही जनता, क्या आपकी नजर में हम सब बेवकूफ हैंराघव जी

  • 30 दिन का रिचार्ज आया राघव ने खुद को मोबाइल का मसीहा बताया
  • सोशल मीडिया पर सवाल 30 दिन के नये रिचार्ज में क्या दाम कम हुए

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में गये राघव चड्ढा इस समय ट्रोलर्स के निशाने पर है और लोग उनसे तरह तरह के सवाल पूछ रहे हैं। गौरतलब है कि संसद में एक प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने मोबाइल कंपिनयों से 30 दिनों का टैरिफ प्लान लांच करने की मांग रखी थी। हालांकि इस तरह का प्लान सभी कंपनियों का पहले से मौजूद था। उनका तर्क 28 दिनों वाला प्लान 30 दिनों के करने का था। क्योकि 28 दिनों वाला चार्ज यूजर्स को साल में 13 बार कराना पड़ता है।
अब कहा यह जा रहा है कि रिचार्ज 28 दिन से 30 दिन को हो गया है एलान के बाद सियासत में ऐसा जश्न मचा जैसे टेलीकॉम कंपनियों ने अपना मुनाफा छोड़कर राघव चड्ढा के चरणों में रख दिया हो। राघव चड्ढा इसे अपनी मांग की जीत बता रहे हैं। दावा यह भी किया जा रहा है कि कि उनकी आवाज उठी तो मोबाइल कंपनियों ने टैरिफ घटा दिए।

रिचार्ज पर राघव की क्रेडिट पॉलिटिक्स

मोबाइल रिचार्ज के 28 दिन वाले रिचार्ज पर संसद में आवाज उठाने के बाद अब राघव चड्ढा ने इसका क्रेडिट भी अपने नाम करने की कोशिश की है। बदलाव सामने आते ही राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर इसे अपनी संसद में उठाई गई मांग से जोड़ दिया। उनके संदेश का सार है कि मुद्दा संसद में उठाया सरकार और ट्राई अब कदम उठाया और उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा। यानी रिचार्ज के नियम बदले तो राजनीतिक बहस में एक नया सवाल भी खड़ा हो गया फायदा उपभोक्ता का लेकिन क्रेडिट किसका। हालांकि सोशल मीडिया पर राघव चड्ढा के वीडिया अपलोड करने के बाद उन्हें ट्रोल करना भी शुरू हो चुका है। मीडिया भी उन्हें निशाने पर ले रहा है और पूछ रहा है? कि मार्केट में पहले से 30 दिनों के रिचार्ज कूपन उपलब्ध थे इसमें नया क्या है। लोगों का कहना है कि क्या दाम कम हुए। कंपनियों ने यदि 30 दिन के रिचार्ज का नया कूपन लांच किया है तो उसके रेट भी तो इन्क्रीज कर दिये हैं।

ट्राई का 13वां संशोधन

ट्राई का यह 13वां संशोधन है करीब 14 साल के दौरान मोबाइल उपभोक्ताओं से जुड़े इस मूल विनियमन में 13 बार बदलाव किए जा चुके हैं। ट्राई ने वर्ष 2012 में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए इन विनियमों को लागू किया था। इसके बाद उसी वर्ष नियमों में लगातार बदलाव हुए। 12 जनवरी को पहला, 21 फरवरी को दूसरा, 9 मार्च को तीसरा और 22 अक्टूबर को चौथा संशोधन किया गया। इसके बाद 27 नवंबर 2012 को पांचवां संशोधन हुआ। इन बदलावों के जरिए दूरसंचार कंपनियों की शुल्क और वाउचर संबंधी व्यवस्थाओं को उपभोक्ताओं के लिए अधिक स्पष्ट करने का प्रयास किया गया। 23 दिसंबर 2024 को 12वां संशोधन किया गया। इस बदलाव में केवल आवाज और संदेश वाली सेवाओं के लिए अलग विशेष टैरिफ वाउचर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। विशेष टैरिफ और संयुक्त वाउचर की अधिकतम वैधता 90 दिन से बढ़ाकर 365 दिन की गई। साथ ही वाउचर की रंग आधारित पहचान की अनिवार्यता को भी समाप्त किया गया। अब 22 सितंबर 2026 को 13वां संशोधन किया गया है। इसके तहत उपभोक्ताओं के लिए केवल आवाज और संदेश वाली सेवाओं के विकल्पों को लेकर प्रावधान किए गए हैं। साथ ही कम से कम एक ऐसा वाउचर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है जिसकी वैधता 30 दिन हो और जिसे हर महीने उसी तारीख को दोबारा शुरू किया जा सके।

अब जरा मोबाइल निकालिए कैलकुलेटर खोलिए और इस दावे का रिचार्ज करिए

क्योंकि 30 दिन की वैलिडिटी और टैरिफ घटने की कहानी दो अलग चीजें हैं। ट्राई की अपनी जानकारी साफ कहती है कि मोबाइल टैरिफ वह तय नहीं करता टेलीकॉम कंपनियां बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अपने प्लान और शुल्क तय कर सकती हैं। ट्राई यह भी कहता है कि हर सेवा प्रदाता 30 दिन का कम से कम एक प्लान और हर महीने उसी तारीख को रिन्यू होने वाला प्लान देता है। तो सवाल यह नहीं कि 30 दिन का प्लान आया या नहीं। सवाल यह है कि 30 दिन का प्लान आते ही राघव चड्ढा के खाते में इतनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि आखिर किसने और कैसे जमा कर दी। 28 दिन के प्लान की जगह 30 दिन का प्लान हो गया ठीक है। ग्राहक के लिए साल में रिचार्ज की गिनती घट सकती है यह भी ठीक है। लेकिन इसे मोबाइल कंपनियों द्वारा टैरिफ घटाने की कहानी बनाना है तो जेब का हिसाब भी दिखाइए। क्योंकि जनता को भाषण का बैलेंस नहीं चाहिए साहब उसे रिचार्ज की पर्ची पर बची रकम दिखाई देती है। और यहीं राघव चड्ढा के दावे का असली पोस्टमार्टम शुरू होता है। 30 दिन का प्लान किसने दिया किस नियम के तहत दिया कीमत कितनी बदली और ग्राहक की जेब में वास्तव में कितना बचा।

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