पकड़ी गयी चोरी -पेट्रोल में 31 फीसदी तक इथेनॉल की मिलावट
दीपावली पर रोशनी का जश्न, हवा में जहर का कारोबार

- क्या हम आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ पाएंगे
- सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी, सरकार के प्रयास नाकाफी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नईदिल्ली। देश दीपावली की रोशनी में नहाने की तैयारी है। बाजारों में रौनक है घरों में दीये सज रहे हैं और आसमान को रोशन करने की तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक ऐसा सवाल हवा में तैर रहा है जिसे नजरअंदाज करना आने वाली पीढिय़ों के साथ अन्याय होगा। जिस हवा में हम सांस ले रहे हैं वह जहरीली क्यों होती जा रही है? जिस पेट्रोल से हमारी गाडय़िां दौड़ रही हैं उसकी गुणवत्ता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं और जिस विकास की रफ्तार पर देश गर्व कर रहा है उसकी पर्यावरणीय कीमत आखिर कौन चुका रहा है।
एक तरफ दिल्ली की जहरीली हवा पर देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी है तो दूसरी तरफ कर्नाटक सरकार का दावा है कि पेट्रोल में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक इथेनॉल मिलाया जा रहा है। दो अलग-अलग घटनाएं हैं लेकिन दोनों के केंद्र में आम आदमी की सेहत का सवाल है और प्रश्न यही है कि आम आदमी की सुरक्षा और उसके अधिकारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
पेट्रोल में 20 नहीं, 31.2 प्रतिशत तक इथेनॉल!
कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर देश की तेल कंपनियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने दावा किया है कि राज्य के अलग-अलग जिलों से जुटाए गए पेट्रोल के नमूनों की प्रयोगशाला जांच में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से काफी अधिक मिली है। सरकार के मुताबिक, 63 पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में 14 नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल पाया गया। कुछ नमूनों में इसकी मात्रा 31.2 प्रतिशत तक दर्ज होने का दावा किया गया है। जांच में इंडियन ऑयल के नमूनों में 31.2 प्रतिशत, हिंदुस्तान पेट्रोलियम में 30.5 प्रतिशत और भारत पेट्रोलियम में 26.5 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलने की बात कही गई है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल वाहन के माइलेज और इंजन के महत्वपूर्ण पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकता है। राज्य सरकार ने पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत प्रदर्शित करने और वाहन मालिकों को संभावित नुकसान से राहत देने के लिए विशेष कोष बनाने की मांग भी उठाई है। हालांकि, तेल कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का कहना है कि कर्नाटक सरकार के नमूने लेने और जांच करने की प्रक्रिया निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं थी। कंपनियों ने अपने परीक्षणों का हवाला देते हुए दावा किया कि कर्नाटक के 56 नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही। लिहाजा अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।
दिल्ली की हवा पर सीजेआई की खरी-खेरी
पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों के बीच देश की राजधानी दिल्ली की हवा भी सांसों पर भारी पड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। मीडिया रिपेार्ट के मुताबिक औसत एक्यूआई 400 के आसपास और कई इलाकों में 450 के पार पहुंच गया। इस बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी प्रयासों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वाहनों की भारी संख्या और बंपर-टू-बंपर यातायात प्रदूषण की बड़ी वजह है। सीजेआई ने सवाल किया कि तमाम उपायों के बावजूद वाहनों से होने वाला प्रदूषण क्यों नहीं रुक रहा है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत में यह बात भी सामने आई कि दिल्ली में आने वाले वाहनों के ईंधन और उनकी स्थिति की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।
ई-20 बना ‘420Ó! राहुल ने पूछा—जनता की गाड़ी में पेट्रोल या धोखा?
पेट्रोल में इथेनॉल की निर्धारित 20 प्रतिशत सीमा से अधिक मात्रा मिलने के विवाद ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक सरकार की प्रयोगशाला जांच का हवाला देते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर तीखा हमला बोला है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा है कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए पेट्रोल के 14 नमूनों में से 11 में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाई गई। इनमें इंडियन ऑयल के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नमूने में 30.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलने का दावा किया गया है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकारी और निजी तेल कंपनियों के नमूनों में तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिला। राहुल ने सवाल उठाया कि उपभोक्ता जब पेट्रोल की पूरी कीमत चुका रहा है तो उसे वास्तव में टंकी में क्या दिया जा रहा है? उन्होंने आशंका जताई कि निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने पर वाहनों का माइलेज घट जाता है और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है। पेट्रोल पंपों पर ईंधन में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा की जानकारी न दिए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। अब सवाल सिर्फ सियासत का नहीं बल्कि देश के करोड़ों वाहन चालकों के भरोसे का है कि पेट्रोल की टंकी में वास्तव में कितना इथेनॉल है और इसकी प्रमाणिक जांच कौन करेगा।
दीपावली पर सिर्फ पटाखों को कटघरे में खड़ा करना काफी है क्या
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दीपावली के ठीक पहले प्रदूषण पर हुई इस सुनवाई में हमारी जीवनशैली और पुरानी परंपराओं का मुद्दा भी उठा। सीजेआई ने पुरानी संस्कृति और वास्तविक परंपराओं की ओर लौटने की जरूरत बताई। अदालत में वाहनों की संख्या महंगी गाडिय़ों और सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रतीक बन चुके खर्चों पर भी चर्चा हुई। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रदूषण की चर्चा अक्सर दीपावली और पटाखों तक सिमट जाती है। जबकि वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, पराली और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इसका अर्थ यह कतई नहीं कि त्योहारों पर प्रदूषण रोकने के उपाय जरूरी नहीं हैं। बल्कि जरूरत इस बात की है कि पर्यावरण की चिंता पूरे वर्ष और प्रदूषण के सभी स्रोतों को ध्यान में रखकर की जाए।
विकास की चमक के साथ स्वच्छ हवा भी जरूरी
भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। इथेनॉल मिश्रण का कार्यक्रम कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया है। लेकिन किसी भी नीति की सफलता केवल उसके आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन की गुणवत्ता और उपभोक्ता के हितों की सुरक्षा से तय होती है।यदि ईंधन की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि वाहन प्रदूषण बढ़ा रहे हैं तो सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना होगा। यदि पराली समस्या है तो किसानों को व्यवहारिक विकल्प देने होंगे। और यदि त्योहारों के दौरान प्रदूषण बढ़ता है तो उसका समाधान भी सामूहिक जिम्मेदारी से निकालना होगा। दीपावली अंधकार से प्रकाश की ओर बढऩे का पर्व है। लेकिन इस बार सवाल केवल घरों और गलियों को रोशन करने का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या हम आने वाली पीढय़िों के लिए स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ पाएंगे।




