LPG गैस संकट बढ़ने पर मचा हाहाकार, प्रसाद को तरसे श्रद्धालु, मोदी सरकार की भयंकर किरकिरी

कभी नोट बंदी करके अपने ही पैसों के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ा, तो कभी देश में अन्य तरह के फरमान जारी करके लोगों को परेशान किया जा रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बीजेपी राज में जो हो जाए वही कम है, जबसे बीजेपी सरकार आई है तबसे जनता को लाइन में ही लगा रही हैं।

कभी नोट बंदी करके अपने ही पैसों के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ा, तो कभी देश में अन्य तरह के फरमान जारी करके लोगों को परेशान किया जा रहा है। लेकिन अब एक बार फिर देश की जनता लाइनों में है।

आलम ये है कि लोगों के घरों में खाना नहीं बन पा रहा है। लेकिन वजह है LPG गैस जो की कई जगहों पर नहीं मिल रही है। जिसके चलते लोगों को कठिनाइयां शुरू हो गई हैं। लेकिन बीजेपी सरकार खामोश है मोदी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। वहीं विपक्षी नेता इस मामले को लेकर सत्ताधारी दल पर जोरदार हमला बोल रहे हैं।

बढ़ती किल्लत के बीच अयोध्या, जो राम जन्मभूमि के लिए प्रसिद्ध है, वो भी इन दिनों इसी किल्लत से जूझ रही है। दरअसल ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से भारत में गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है, और इसका सीधा असर अयोध्या की राम रसोई और हनुमानगढ़ी के लड्डू प्रसाद पर पड़ा है। यह युद्ध अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ा है, जो खाड़ी क्षेत्र में हो रहा है।

इस क्षेत्र से भारत को बड़ी मात्रा में एलपीजी गैस मिलती है, लेकिन युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही रुक गई है और गैस की कमी हो गई है। अयोध्या में अमावा मंदिर की राम रसोई, जो हर दिन 10 हजार श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन देती है, अब बंद हो गई है। मंदिर प्रशासन ने गैस न मिलने के कारण इसे अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह रसोई राम मंदिर के पास है और दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। अब वहां एक नोटिस लगा है कि गैस की कमी के कारण सेवा बंद है।

हनुमानगढ़ी अयोध्या का एक और प्रमुख मंदिर, जहां लड्डू प्रसाद बहुत मशहूर है, वहां भी संकट है। यहां करीब 150 दुकानें हैं जो रोजाना लड्डू बनाती और बेचती हैं। हर दुकानदार 30 से 40 किलो लड्डू तैयार करता है, लेकिन गैस न होने से उत्पादन ठप हो गया है। दुकानदार पुराना स्टॉक बेच रहे हैं, लेकिन अगर स्थिति नहीं सुधरी तो पूरा प्रसाद उद्योग बंद हो सकता है। आलम ये है कि लोगों को प्रसाद नहीं मिल पा रहा है। यह प्रसाद भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है, और इसकी कमी से श्रद्धालु निराश हो रहे हैं। अयोध्या में रोजाना लाखों पर्यटक और भक्त आते हैं, और यह समस्या उनके लिए बड़ी परेशानी बन रही है।

यह समस्या सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है। अयोध्या के होटल और रेस्टोरेंट भी प्रभावित हैं। कई जगहों पर गैस सिलेंडर मिलना बंद हो गया है, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो दिनों से सिलेंडर की बुकिंग नहीं हो पा रही है। अगर यह कमी लंबी चली तो पर्यटकों को भोजन के लिए भटकना पड़ सकता है, और शहर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।

अयोध्या पर्यटन पर निर्भर है, और राम मंदिर के बाद यहां आने वालों की संख्या बढ़ी है। लेकिन गैस की कमी से सब कुछ चरमरा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एलपीजी डीलरों के लिए एक मौखिक एडवाइजरी जारी की है, ताकि कमी को कुछ हद तक रोका जा सके। लेकिन अभी तक स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। वहीं इस मामले को लेकर विपक्ष सत्ताधारी दल भाजपा पर हमलावर है। इसी बीच सपा सांसद इकरा हसन ने गंभीर आरोप लगाते हुए बीजेपी सरकार जमकर घेरा है।

वहीं देश में बढ़ती LPS समस्या पर आप सांसद संजय सिंह भी आगबबूला नजर आये, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सूर्य के प्रकाश में खिचड़ी पकाकर खाइए, बच्चियों के हत्यारों के साथ खड़े हैं नरेंद्र मोदी।

दरअसल यह संकट अंतरराष्ट्रीय है, लेकिन भारत सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। भारत ईरान और अन्य खाड़ी देशों से गैस आयात करता है, और युद्ध के कारण आपूर्ति रुक गई है। सरकार ने प्लान-बी शुरू किया है, जिसमें अन्य देशों से गैस मंगाई जा रही है और घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर अयोध्या जैसे धार्मिक शहरों में तत्काल राहत की जरूरत है। लोगों का कहना है कि सरकार को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी, क्योंकि युद्ध का खतरा पहले से था। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर रहे हैं। भारत की ऊर्जा नीति में विविधता लाने की जरूरत है, ताकि एक क्षेत्र के संकट से पूरे देश पर असर न पड़े।

ऐसे में बात करें अयोध्या की तो अभी हिंदुत्व का ढोल पीटने वाली बीजेपी सरकार पूरी तरह से फेल नजर आ रही है। आलम ये है कि अयोध्या के संत और व्यापारी चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर गैस की आपूर्ति जल्दी सामान्य नहीं हुई तो बड़ा संकट आ सकता है। वहीं मंदिर प्रशासन के मैनेजर पंकज कुमार ने कहा कि युद्ध के तनाव से गैस संकट पैदा हुआ है, और अब रसोई को समय से पहले बंद करना पड़ा।

श्रद्धालु अब अन्य जगहों से भोजन व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन मुफ्त सेवा बंद होने से गरीब भक्तों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। अब ऐसे में प्रसाद विक्रेताओं का कहना है कि अगर उत्पादन नहीं हुआ तो उनकी कमाई रुक जाएगी। यह स्थिति पूरे शहर की सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है।

सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के विकास पर जोर देते हैं, लेकिन इस तरह की आपदाओं के लिए विशेष योजना होनी चाहिए। केंद्र सरकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक ईंधन जैसे बिजली या अन्य स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ सकता है। वहीं इस बढ़ती समस्या पर कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत को रूस या अन्य देशों से ज्यादा गैस आयात करनी चाहिए।

यह संकट हमें ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को सिखाता है। कुल मिलाकर, ईरान युद्ध की आंच अयोध्या तक पहुंच गई है, और गैस की कमी से राम रसोई पर ताला लग गया है। हनुमानगढ़ी के लड्डू प्रसाद पर संकट मंडरा रहा है। यह समस्या जल्दी सुलझनी चाहिए, ताकि अयोध्या की धार्मिक परंपराएं बाधित न हों। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। लेकिन सरकार जिस तरह से हाथ पर हाथ धरे बैठी है इससे एक बात तो तय है कि गैस की समस्या लोगों के आम जीवन को अस्त व्यस्त कर सकती है.

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