ट्रेड डील के बीच राहुल गांधी के बिग पंच ने बिगाड़ दिया मोदी का खेल

रुबियो का भारत दौरा, एपस्टीन फाइल्स और राहुल के सवाल

  • तस्वीर में कैद राज ने बढ़ाई राजनीतिक बेचैनी राहुल गांधी की राजनीतिक भविष्वाणी की तरफ बड़ती कहानी
  • रुबियो की भारत यात्रा के बीच उठे सवालों ने दिल्ली की सियासत में मचाई हलचल तस्वीर पर घिरी सरकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। साहब मामला सिर्फ एक तस्वीर का होता तो दिल्ली की सियासत इतनी बेचैन क्यों होती? मामला सिर्फ एक मुलाकात का होता तो राहुल गांधी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा को बीच में क्यों लाते और मामला इतना ही मामूली है जैसा सरकार के मंत्री समझा रहे हैं तो फिर तस्वीर और मुलाकातों के संदर्भ पर उठे सवालों का एकदम साफ जवाब देने में परेशानी कैसी।
अमेरिकन विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के बीच नेता प्रतिपक्ष के एक तस्वीर वार ने पूरी मोदी सरकार को बेचैन कर दिया है। राहुल गांधी ने एक ऐसी तस्वीर को शेयर किया जिस तस्वीर में एक तरफ भारत सरकार का ताकतवर मंत्री है तो दूसरी तरफ दुनिया के सबसे बदनाम यौन अपराधियों में गिना जाने वाला जेफ्री एपस्टीन। राहुल गांधी ने तस्वीर को साझा करते हुए एक सवाल पूछ लिया कि अमेरिका किसे ब्लैकमेल कर रहा है?

सरकार के सामने मुश्किल ही मुश्किल

यह सवाल किसी सड़क किनारे की चाय की दुकान पर उठी अफवाह नहीं है। इसे देश के विपक्ष के नेता ने उठाया है। सवाल की भाषा राजनीतिक है उसका अंदाज आक्रामक है और उसका निशाना सीधे भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की तरफ है। राहुल गांधी ने तस्वीर और रुबियो की यात्रा को जोड़ते हुए पूछा कि अमेरिका किसे ब्लैकमेल कर रहा है। राहुल गांधी के सवाल के बाद असली चुनौती इसका जवाब क्या होगा है। राहुल के बयान को केवल राजनीतिक शोर बताकर खारिज करना आसान है। मुश्किल यह है कि तस्वीर से उठे सवालों का जवाब दिया जाए मुलाकातों का संदर्भ स्पष्ट किया जाए और देश को बताया जाए कि आखिर पूरा मामला है क्या।

राहुल ने ऐसा कौन-सा दरवाजा खटखटाया कि सत्ता असहज हो गई?

राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाइए उनके आरोपों को चुनौती दीजिए उनके हर बयान का जवाब दीजिए लेकिन इस बार उनके सवाल की धार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने केवल यह नहीं पूछा कि हरदीप सिंह पुरी एपस्टीन से क्यों मिले। उन्होंने तस्वीर के सामने आने और रुबियो की भारत यात्रा के समय को जोड़कर एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा किया। यानी बहस अब केवल एक मंत्री के पुराने संपर्कों की नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों, राष्ट्रीय हितों और सत्ता की जवाबदेही की भी है। राहुल का सवाल सरकार के लिए असहज हो सकता है। मगर लोकतंत्र में विपक्ष का काम ही सत्ता को असहज करना है जब तक वह सवाल तथ्यों और सार्वजनिक हित की जमीन पर खड़े हों। इसलिए राहुल के सवाल का जवाब राहुल पर हमला करके नहीं दिया जा सकता। जवाब देना है तो तस्वीर के संदर्भ पर दीजिए। मुलाकातों के बारे में दीजिए। दस्तावेजों में दर्ज संवाद की प्रकृति पर दीजिए। और अगर राहुल गांधी ने ब्लैकमेलिंग का सवाल उठाया है तो सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या उसके पास इस आरोप का समर्थन करने वाला कोई प्रमाण है। अगर नहीं है तो यह बात भी साफ-साफ कही जाए। सवाल पूछने वाले को कटघरे में खड़ा करना आसान है। सवाल का जवाब देना असली परीक्षा होती है।

तीन-चार मुलाकातें या कहानी का अधूरा पन्ना?

हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी 2026 में कहा था कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें पेशेवर संदर्भ में हुई थीं। उनके मुताबिक इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट और उससे जुड़ी गतिविधियों के दौरान उनकी एपस्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई थी। पुरी ने एपस्टीन के अपराधों से किसी तरह के संबंध से इनकार किया था। सरकार के मंत्री का पक्ष दर्ज होना चाहिए। किसी व्यक्ति के किसी अपराधी से मिलने भर से उसे अपराध में शामिल नहीं ठहराया जा सकता। मगर अब तस्वीर ने उनके पुराने स्पष्टीकरण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सामने आई तस्वीर में पुरी और एपस्टीन मेज के आमने सामने बैठे दिखाई देते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दस्तावेजों के संग्रह में इसी बैठक की कई मिलती जुलती तस्वीरें हैं। पुरी के कार्यालय ने कहा कि मंत्री को लगभग एक दशक पुरानी तस्वीर में दिखाई गई विशेष बैठक याद नहीं है और उन्होंने यह दावा नहीं किया था कि वह एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले।

ट्रेड डील अंतिम चरण में और ब्लैकमेलिंग के आरोप

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आए हैं। भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं। ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों के केंद्र में हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच मुंबई में बातचीत हुई और दोनों पक्ष व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढऩा चाहते हैं। यानी एक तरफ कूटनीति की मेज पर बातचीत है दूसरी तरफ दिल्ली में तस्वीर को लेकर राजनीतिक घमासान मचा है। राहुल गांधी ने दोनों घटनाक्रमों के समय को जोड़कर सवाल उठाया। यही वह बिंदु है जिसने इस विवाद को एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदल दिया है।

पवन खेड़ा का दावा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया है कि 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान प्रदान हुआ और दस्तावेजों में 14 बैठकों का उल्लेख मिलता है। गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन कोई सामान्य कारोबारी नहीं था। वह एक अमेरिकी फाइनेंसर था जिसे नाबालिगों से जुड़े यौन अपराध में दोषी ठहराया गया था और 2019 में हिरासत में उसकी मौत हो गई। उसके संपर्कों में राजनीति कारोबार और दूसरे प्रभावशाली क्षेत्रों से जुड़े बहुत से लोग शामिल थे। इसी कारण उसके ईमेल, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को लेकर दुनिया भर में सवाल उठते रहे हैं। हरदीप सिंह पुरी का नाम भी उन लोगों की लिस्ट में जिनकी करीबियां एप्सटीन से थी। अब पवन खेड़ा के सवाल और राहुल के वार के बाद देश को यह जानने का अधिकार है कि सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों के संपर्कों का वास्तविक संदर्भ क्या था। और उन संपर्कों को लेकर जब विरोधाभास का दावा किया जाए तो स्पष्टीकरण कितना स्पष्ट है।

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