बांदा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर घमासान, जेडीयू प्रदेश उपाध्यक्ष का आमरण अनशन छठे दिन भी जारी

बांदा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन छठे दिन भी जारी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन छठे दिन भी जारी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार समेत 15 सूत्रीय मांगों को लेकर वह अशोक लाट पर अनशन पर बैठी हैं। लगातार छह दिनों से अनशन के चलते रविवार को उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी शालिनी पटेल ने अपना आमरण अनशन समाप्त नहीं किया है।

शालिनी सिंह पटेल का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन के साथ ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

21 सितंबर से चल रहा है आमरण अनशन

शालिनी पटेल के मुताबिक, वह 21 सितंबर से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रही हैं। उनका आरोप है कि बांदा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई व्यवस्थाएं लंबे समय से सवालों के घेरे में हैं और मरीजों को बेहतर इलाज तथा जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया है। इससे पहले जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को भी ज्ञापन सौंपे जाने की बात कही गई है।

24 सितंबर को कार्यकर्ताओं ने मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन

आंदोलन को समर्थन देते हुए 24 सितंबर को जेडीयू महिला जिलाध्यक्ष पिंकी प्रजापति के नेतृत्व में करीब 200 कार्यकर्ताओं ने मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा था। कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मांगों पर कार्रवाई की मांग की।

जेडीयू नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए, ताकि आम मरीजों को इलाज के दौरान परेशानियों का सामना न करना पड़े।

300 बेड के मंडलीय अस्पताल को पूरी क्षमता से शुरू करने की मांग

शालिनी पटेल की 15 सूत्रीय मांगों में सबसे प्रमुख मांग 300 बेड के मंडलीय अस्पताल को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने की है। उनका कहना है कि अस्पताल की पूरी क्षमता का उपयोग होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

इसके अलावा उन्होंने जिला अस्पताल के साथ-साथ नरैनी, बबेरू, कमासिन, अतर्रा, तिंदवारी और जसपुरा के स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग भी उठाई है।

मेडिकल कॉलेज में मरीजों से कथित अवैध वसूली की जांच की मांग

शालिनी पटेल ने बांदा स्थित रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी मांग है कि मरीजों से कथित अवैध वसूली और बाहर की दवाएं लिखे जाने के आरोपों की जांच कराई जाए।

उन्होंने मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। संबंधित संस्थान या अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।

कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई की मांग

15 सूत्रीय मांगों में मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों तथा अधिकारियों के कामकाज को लेकर भी कई बिंदु शामिल हैं।

शालिनी पटेल की ओर से उठाई गई मांगों में मेडन कार्यालय से शाजिया बेगम और सावित्री यादव को हटाने, कार्यवाहक सीएमएस डॉ. प्रवीण राज सरावगी की भूमिका की जांच कराने और वरिष्ठ सीएमएस डॉ. रजनी भारती को कार्यभार सौंपने की मांग शामिल है।

इसके अलावा छुट्टी, बायोमेट्रिक उपस्थिति और ड्यूटी रोस्टर में कथित अनियमितताओं की जांच, कर्मचारियों को कथित धमकी दिए जाने के मामलों की जांच तथा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों के समाधान की मांग भी की गई है।

आंदोलनकारियों ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कथित शोषण और वेतन भुगतान से संबंधित समस्याओं के समाधान के साथ-साथ स्थानांतरण से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की मांग रखी है।

छठे दिन बिगड़ी तबीयत, ट्रॉमा सेंटर में कराया गया भर्ती

लगातार छह दिनों से आमरण अनशन पर रहने के कारण शालिनी पटेल की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के बावजूद उन्होंने अनशन खत्म करने से इनकार किया है।

शालिनी पटेल का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मरीजों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उन्होंने प्रशासन से मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देने की मांग की है।

पूर्व राज्यसभा सांसद विशंभर निषाद ने पहुंचकर दिया समर्थन

आमरण अनशन स्थल पर समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद विशंभर निषाद भी पहुंचे और शालिनी पटेल के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वह आंदोलनकारियों के साथ हैं।

विशंभर निषाद के समर्थन से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस आंदोलन को लेकर स्थानीय राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती दिखाई दे रही हैं। हालांकि, आंदोलन की मांगों और लगाए गए आरोपों पर प्रशासन तथा संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर

छठे दिन अनशनकारी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने से आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। एक ओर अनशनकारी अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन और कार्रवाई की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय निगरानी जरूरी हो गई है।

अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन की ओर से 15 सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की जाती है।

फिलहाल शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन जारी है और वह अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक पीछे हटने के संकेत नहीं दे रही हैं।
रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा

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