SIR नोटिस पर मचा हंगामा! जानिए क्या है लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी और क्यों घिर रहे हैं नामचीन लोग

दिल्ली में 4 नवंबर तक चलने वाली एआईआर प्रक्रिया में 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' के कारण 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली में 4 नवंबर तक चलने वाली एआईआर प्रक्रिया में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ के कारण 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजे हैं. इनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं.

दिल्ली में एआईआर की प्रक्रिया 4 नवंबर तक चलेगी. मौजूदा प्रक्रिया के दौरान 33 लाख से ज्यादा लोगों को चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस भेजा जा चुका है. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सीएम रेखा, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नाम भी शामिल हैं. इन सभी लोगों को नोटिस भेजे जाने के पीछे की वजह है लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी, जिसकी वजह कंप्यूटर इसे रिजेक्ट कर दे रहा है. जानते हैं ये लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी क्या है.

क्या होती हैं लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी?

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी का मतलब है पुराने रिकॉर्ड से माता-पिता, दादा-दादी के नाम या डेटा को लिंक करते समय नाम में असंगतियां यानी उनका मेल न खाना. इसके अलावा जाति के स्वरूप में मिलान ना होना समेत अन्य कारण हैं.

आयु का अंतर: मतदाता और उनके माता-पिता की आयु का अंतर अस्वाभाविक होना (जैसे 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर).

मैपिंग फेल होना: वर्तमान डेटा का पिछले एसआईआर/आधार/रिकॉर्ड्स से सीधे तौर पर मिलान न हो पाना या अनमैप्ड रहना.

नोटिस और कार्रवाई: दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और अन्य राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं (जैसे दिल्ली में 33 लाख और बंगाल में 1.25 करोड़ तक) को इन विसंगतियों के कारण नोटिस या फ्लैग किया गया.

मतदाता अधिकार पर असर: आलोचकों और एससीआरएफ जैसी संस्थाओं का तर्क है कि स्पेलिंग या तार्किक क्लॉज के कारण वैध मतदाताओं के सामने बेदखली या नाम कटने का संकट पैदा हो जाता है.

सुप्रीम कोर्ट की दखल: सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, मनमानेपन और राज्यों में अलग-अलग पैमानों को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं और निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों को आपत्ति या दस्तावेज जमा करने का पूरा मौका मिले.

इससे कैसे निपटें?

दस्तावेज सत्यापन: यदि बीएलओ या नोटिस के जरिए विसंगति सामने आती है, तो अपने सही डॉक्यूमें, फॉर्म या घोषणा पत्र जमा करें.

नाम जुड़वाना: यदि नाम सूची से बाहर हो जाए, तो फॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम शामिल कराने का विकल्प खुला रहता है.

किससे संपर्क: अपने क्षेत्र के BLO से मिलें या निर्वाचन आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क करें.

किन्हें भेजा गया नोटिस?

भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, विदेश मंत्री एस जयशंकर, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, बीजेपी विधायक कैलाश गहलोत, सेना के पूर्व प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद सहित कई लोगों ‘अनमैप्ड वोटर’ (मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज न होने) होने के कारण नोटिस भेजा गया.

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