खोया या चोरी हुआ मोबाइल मिलने की कितनी उम्मीद? बिहार-यूपी से दिल्ली तक देखें आंकड़े

CEIR पर 60 लाख से ज्यादा मोबाइल ब्लॉक हुए, 37.48 लाख ट्रेस और 13.80 लाख बरामद हुए. दिल्ली की रिकवरी सबसे कम 7.93% रही, जबकि आंध्र प्रदेश और गुजरात में रिकवरी 50% से ज्यादा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CEIR पर 60 लाख से ज्यादा मोबाइल ब्लॉक हुए, 37.48 लाख ट्रेस और 13.80 लाख बरामद हुए. दिल्ली की रिकवरी सबसे कम 7.93% रही, जबकि आंध्र प्रदेश और गुजरात में रिकवरी 50% से ज्यादा है.

आज के समय में मोबाइल फोन सिर्फ बात करने का जरिया नहीं, बल्कि हमारी पूरी जिंदगी का डेटा बैंक बन चुका है. ऐसे में मोबाइल का चोरी होना या गुम होना किसी बड़े झटके से कम नहीं है. चोरी हुए मोबाइलों को ब्लॉक करने और उन्हें खोजने के लिए भारत सरकार ने दिसंबर 2019 में सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) नाम का पोर्टल शुरू किया था.

CEIR पोर्टल के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में मोबाइल चोरी की समस्या कितनी बड़ी है और राज्य की पुलिस उन्हें खोजने में कितनी तत्पर है. आइए इन आंकड़ों को विस्तार से समझते हैं.

राष्ट्रीय तस्वीर: 60 लाख फोन ब्लॉक, लेकिन मिले कितने?
CEIR के आधिकारिक राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, देश भर के लोगों ने अब तक कुल 60,27,064 (लगभग 60.27 लाख) मोबाइल फोन चोरी या गुम होने के बाद पोर्टल पर ब्लॉक करवाए हैं. राहत की बात यह है कि पुलिस और टेलीकॉम एजेंसियों की मदद से इनमें से आधे से ज्यादा यानी 37,48,524 फोनों को ट्रेस (लोकेट) कर लिया गया है.

हालांकि, बात जब मोबाइल बरामद करके मालिक को सौंपने की आती है, तो यह आंकड़ा गिर जाता है. देश भर में अब तक 13,80,687 (13.80 लाख) मोबाइल सफलतापूर्वक रिकवर किए गए हैं. राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो भारत का औसत मोबाइल रिकवरी रेट 36.83% है. यानी अगर 100 फोन चोरी होते हैं, तो लगभग 37 फोन ही वापस मिल पाते हैं.

राजधानी दिल्ली का हाल सबसे बेहाल
अगर आप देश की राजधानी दिल्ली में रहते हैं और आपका फोन चोरी हो जाता है, तो उसके वापस मिलने की उम्मीद न के बराबर है. दिल्ली में सबसे ज्यादा 10,59,962 (10.59 लाख) मोबाइल ब्लॉक किए गए. इनमें से पुलिस ने 6,67,771 फोनों को ट्रेस भी कर लिया, लेकिन रिकवर सिर्फ 52,930 फोन ही हो पाए. दिल्ली का रिकवरी रेट देश में सबसे कम मात्र 7.93% है.

आइए जानते हैं खराब प्रदर्शन करने वाले अन्य राज्य और विभाग कौन-कौन से थे.

भारतीय रेलवे: ट्रेनों और स्टेशनों पर चोरी हुए 12,889 फोनों में से सिर्फ 1,570 बरामद हुए (रिकवरी रेट मात्र 19.48%).
पंजाब: 1.51 लाख फोन ब्लॉक हुए, रिकवरी रेट सिर्फ 23.6% रही.
बिहार: 1.46 लाख ब्लॉक फोन में से 23,779 मिले, रिकवरी रेट 24.26%.
पश्चिम बंगाल: 2.90 लाख फोन ब्लॉक हुए, रिकवरी रेट 28.04% रही.
मोबाइल खोजने में कौन है चैंपियन?
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस ने मोबाइल खोजने में बेहतरीन काम किया है.

छोटे राज्यों/UT का कमाल: लक्षद्वीप में हालांकि सिर्फ 30 फोन ब्लॉक हुए, लेकिन 10 रिकवर कर लिए गए, जिससे इसकी रिकवरी रेट देश में सबसे ज्यादा 90.91% है. वहीं अंडमान और निकोबार में यह रेट 62.94% है. लद्दाख की रिकवरी रेट भी 52.23% है.
बड़े राज्यों में आंध्र और गुजरात आगे: बड़े राज्यों की बात करें तो आंध्र प्रदेश सबसे बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है. यहां 2.31 लाख ब्लॉक फोन में से 82,397 बरामद किए गए (रिकवरी रेट 58.13%). गुजरात ने भी 2.27 लाख में से 71,397 फोन खोज निकाले (रिकवरी रेट ५०.३३%)। पूर्वोत्तर भारत: मणिपुर (51.88%), मिजोरम (50.92%) और अरुणाचल प्रदेश (50.39%) में भी आधे से ज्यादा मोबाइल खोज लिए गए हैं.

देश के अन्य बड़े राज्यों का रिपोर्ट कार्ड
भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों ने राष्ट्रीय औसत (36.83%) से काफी बेहतर काम किया है:

कर्नाटक: 6 लाख फोन ब्लॉक हुए, 1.68 लाख मिले. रिकवरी रेट 48.71% रही.
उत्तर प्रदेश: 5.49 लाख ब्लॉक फोन में से 1.64 लाख बरामद किए गए. रिकवरी रेट 48.22% रही.
राजस्थान: 2.05 लाख ब्लॉक, 68 हजार बरामद. रिकवरी रेट 48.27%.
छत्तीसगढ़: 1.78 लाख ब्लॉक, रिकवरी रेट 48.15%.
तेलंगाना: 5.52 लाख ब्लॉक, 1.45 लाख बरामद. रिकवरी रेट 44.58%.
महाराष्ट्र: 7.30 लाख मोबाइल ब्लॉक किए गए, जिनमें से 1.75 लाख बरामद हुए. रिकवरी रेट 41.36% रही.

CEIR पोर्टल ने मोबाइल चोरी को रोकने और ट्रेसिंग को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन असली जिम्मेदारी राज्य की पुलिस की है. आंकड़े साफ बताते हैं कि तकनीक मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर फोन को जब्त करके रिकवर करने में दिल्ली, बिहार और पंजाब जैसी पुलिस को आंध्र प्रदेश और गुजरात मॉडल से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.

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