जोरावर टैंक की बढ़ेगी मारक क्षमता? 59 टैंकों में बदलाव का प्लान

भारतीय सेना के जोरावर लाइट टैंक की सुरक्षा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पहली खेप के 59 टैंकों को दो अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन में तैयार किया जाएगा. यह चीन के Type-15 को टक्कर देगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारतीय सेना के जोरावर लाइट टैंक की सुरक्षा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पहली खेप के 59 टैंकों को दो अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन में तैयार किया जाएगा. यह चीन के Type-15 को टक्कर देगा.

भारतीय सेना के स्वदेशी जोरावर Light Tank कार्यक्रम में आर्मर यानी सुरक्षा को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी है. सूत्रों के मुताबिक, पहली खेप के 59 टैंकों को दो अलग-अलग कॉन्फिगरेशन में तैयार करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार में 18 और 41 के संभावित विभाजन की योजना बनाई जा रही है. हालांकि, इस संख्या और विभाजन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

जोरावर को करीब 25 टन वजन का लाइट टैंक बनाया गया है. इसका मकसद ऊंचाई वाले इलाकों, खासकर लद्दाख के LAC जैसे कठिन क्षेत्रों में सेना को ऐसी घातक क्षमता देना है, जो भारी टैंकों के मुकाबले ज्यादा आसानी से ऑपरेट और तैनात की जा सके.

सेना को चाहिए ज्यादा मजबूत कवच
ज़ोरावर के मूल डिजाइन में फ्रंटल प्रोटेक्शन को STANAG 4569 Level-4 के आसपास बताया गया है. अब सेना की तरफ से सुरक्षा बढ़ाकर Level-6 तक ले जाने की मांग सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, यह स्तर 30mm APFSDS जैसे खतरों से सुरक्षा देने के लिए बनाया जाता है. लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती वजन की है. टैंक में ज्यादा आर्मर लगाने से उसका वजन बढ़ेगा. वजन बढ़ने पर इंजन और पावर पैक को भी अपग्रेड करने की जरूरत पड़ सकती है. इसका असर टैंक की मोबिलिटी, ट्रायल और इंडक्शन टाइमलाइन पर पड़ सकता है.

59 टैंकों में क्या होगा बदलाव?
सूत्रों के मुताबिक, एक विकल्प यह है कि शुरुआती टैंकों को मूल करीब 25 टन वाले डिजाइन के करीब रखा जाए, जबकि बाद के टैंकों में ज्यादा आर्मर और जरूरत के मुताबिक ज्यादा ताकतवर पावर पैक दिया जाए. इसी संदर्भ में 59 टैंकों को दो कॉन्फिगरेशन में बांटने की बात सामने आई है.हालांकि, 18 टैंक पहले कॉन्फिगरेशन और 41 टैंक अपग्रेडेड कॉन्फिगरेशन में होंगे, यह फिलहाल सूत्रों के हवाले से है.

सेना को 354 जोरावर की जरूरत
भारतीय सेना की कुल जरूरत 354 लाइट टैंकों की है. इनमें से शुरुआती 59 टैंक DRDO और L&T मिलकर विकसित कर रहे हैं. बाकी 295 टैंकों के लिए Make-I प्रक्रिया के तहत निजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया है. ज़ोरावर में 105mm मुख्य तोप के साथ आधुनिक निगरानी, संचार और युद्धक्षेत्र की स्थिति की जानकारी देने वाली क्षमताएं शामिल हैं. टैंक को खास तौर पर हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है.

चीन के Type-15 से मुकाबले की क्षमता
ज़ोरावर के विकास का एक अहम कारण पूर्वी लद्दाख और दूसरे ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सेना की जरूरत है. चीन के पास Type-15/ZTQ-15 लाइट टैंक पहले से मौजूद है. ऐसे इलाकों में हल्के टैंकों की बेहतर मोबिलिटी महत्वपूर्ण मानी जाती है. ज़ोरावर को इसी जरूरत के तहत कम वजन और बेहतर पावर-टू-वेट रेशियो के साथ विकसित किया गया है.

2028-29 में इंडक्शन की उम्मीद
सेना के सूत्रों के मुताबिक ज़ोरावर का इंडक्शन 2028-29 के दौरान होने की उम्मीद है. इसके लिए ट्रायल, यूजर इवैल्यूएशन और उत्पादन की तैयारी का सफल होना जरूरी होगा.

यानी ज़ोरावर के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है कि, क्या ज्यादा कवच के साथ भी 25 टन के आसपास की मोबिलिटी बरकरार रखी जा सकती है? सेना के लिए सुरक्षा और मोबिलिटी के बीच यही संतुलन इस लाइट टैंक की आगे की कॉन्फिगरेशन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.

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