ममता से बगावत का यूसुफ पठान को मिला इनाम, गुजरात सरकार ने गिफ्ट किया कीमती प्लॉट

पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद यूसुफ पठान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है... पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः यूसुफ पठान को बगावत करने का मोदी और शाह के द्वारा ऐसा इनाम मिला है.. जिसकी कभी कल्पना नहीं की जा सकती थी.. बता दें कि जिस जमीन का विवाद 2004 से चला आ रहा था.. वह विवाद ममता बनर्जी से बगावत के महज दो महीने बाद ही सुलझ गया है.. और करोड़ों के कीमत की जमीन यूसुफ पठान को बीदेपी के द्वारा गिफ्ट कर दी गई.. आपको बता दें कि बीजेपी जबसे सत्ता में आई है.. पार्टियों को तोड़ने का काम कर रही है.. और दूसरी पार्टियों के नेताओं को डरा-धमकाकर या इसी तरह मंहगे तोहफे देकर बीजेपी में आने के लिए मजबूर कर देती है.. वहीं भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़े-बड़े उपहार देती है..

आपको बता दें कि इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से सांसद पूर्व क्रिकेटर युसूफ पठान को.. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के महज दो महीने बाद.. गुजरात की भाजपा सरकार ने एक बड़ा उपहार दिया है.. वडोदरा नगर निगम ने उनके खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे 978 वर्गमीटर विवादित प्लॉट के मामले में उनके पक्ष में फैसला सुनाया है.. वहीं अब यह प्लॉट आधिकारिक रूप से उन्हें आवंटित कर दिया गया है.. दो साल पहले इसी मामले में उन्हें नोटिस जारी किया गया था.. लेकिन राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद पूरा नजारा ही बदल गया..

जानकारी के मुताबिक गुजरात की भाजपा सरकार ने लगभग 20.53 करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाले इस प्लॉट को युसूफ पठान के नाम पर आवंटित करने की मंजूरी दे दी है.. जानकारी के अनुसार यह विवाद पिछले चौदह वर्षों से चल रहा था.. प्रस्ताव के अनुसार कुल 978 वर्गमीटर जमीन में से 500 वर्गमीटर हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए मुफ्त दिया जाएगा.. शेष 478 वर्गमीटर जमीन बाजार मूल्य के निर्धारित आकलन का पचपन प्रतिशत भुगतान करने पर आवंटित की जाएगी.. वहीं यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.. क्योंकि यह घटनाक्रम पठान के टीएमसी से अलग होने.. और नई पार्टी से जुड़ने के कुछ ही महीनों बाद सामने आया है..

जानकारी के लिए आपको बता दें कि युसूफ पठान 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे थे.. लेकिन 2026 में उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से किनारा कर लिया.. वे उन बीस सांसदों के समूह में शामिल हो गए जिन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय किया.. और संसद में एनडीए के साथ जुड़ने का फैसला लिया.. गुजरात में भाजपा की सरकार है और वडोदरा नगर निगम पर भी भाजपा का पूर्ण नियंत्रण है.. ऐसे में पठान के राजनीतिक बदलाव के कुछ महीनों बाद ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से फैसले के समय को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं..

वहीं यह पूरा मामला केवल एक जमीन आवंटन का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश का भी है.. लंबे समय से अटका हुआ विवाद अचानक सुलझ गया.. पहले प्रशासन ने नोटिस जारी कर पठान के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए थे.. वहीं अब उसी प्रशासन ने उनके पक्ष में फैसला सुना दिया.. आलोचक इसे राजनीतिक पुरस्कार बता रहे हैं.. समर्थक इसे लंबे समय से लंबित न्यायिक-प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य परिणाम बता रहे हैं.. दोनों पक्षों के तर्क अपनी जगह हैं.. लेकिन समय का संयोग किसी को नजरअंदाज नहीं करने दे रहा..

 

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