इंडिगो उड़ान में टॉयलेट पेपर पर मिली बम की धमकी, सामने आया हैरान करने वाला सच!

इंडिगो की उड़ान में टॉयलेट पेपर पर बम की धमकी मिलने की घटना ने यात्रियों में दहशत फैला दी। यह घटना उस वक़्त हुई, जब फ्लाइट टेकऑफ के लिए तैयार थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आपने अक्सर चलती प्लेन के खराब होने या देरी से पहुँचने की खबरें तो अक्सर सुनी ही होंगी। लेकिन आज एक ऐसी खबर सामने आई जिससे न सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठे बल्कि प्रशासन पर भी कहीं न कहीं ऊँगली उठी।

दरअसल अहमदाबाद से लखनऊ होते हुए दिल्ली जाने वाली इंडिगो फ्लाइट की लखनऊ पहुंची एक उड़ान में बम होने की सूचना मिलने पर एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।

इंडिगो की उड़ान में टॉयलेट पेपर पर बम की धमकी मिलने की घटना ने यात्रियों में दहशत फैला दी। यह घटना उस वक़्त हुई, जब फ्लाइट टेकऑफ के लिए तैयार थी। यात्री बैठ चुके थे, क्रू तैयार था, लेकिन अचानक टॉयलेट में एक टिश्यू पेपर पर “बॉम्ब” लिखा नोट मिला। हालांकि यह एक फर्जी धमकी साबित हुई, लेकिन इससे हंगामा मच गया। यात्रियों को उतारना पड़ा, सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे विमान की तलाशी ली। लगभग 180 यात्री घंटों इंतजार करते रहे।

जब प्लेन हवा में ही था, तभी टॉयलेट में एक टिशू पेपर मिला, जिस पर बम लिखा था। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना दी और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। जिसके बाद ATC ने एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया, फिर लैंडिंग की अनुमति दी। फिर क्या सुबह करीब 11 बजाकर 15 मिनट पर फ्लाइट को लखनऊ एयरपोर्ट पर उतारा गया। फिर सभी 180 यात्रियों और उनके सामान को नीचे उतारा गया।

उतारने के बाद करीब 1 घंटे तक चेकिंग चली। बम निरोधक दस्ता और अन्य एजेंसियों के जवानों ने विमान की जांच की। डॉग स्क्वायड ने यात्रियों के एक-एक सामान की चेकिंग की। हालांकि, किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। सभी यात्रियों को विमान में बैठा दिया गया। विमान दिल्ली के लिए करीब 2 बजकर 40 मिनट पर रवाना हो गया।  इस विमान में कई नामचीन लोगों का सफर भी था। इसी विमान से पूर्व आईपीएस बीपी अशोक समेत कई लोगों को दिल्ली जाना था।

वहीं इस घटना को लेकर सामने आ रही प्रतिक्रियाओं की बात की जाए तो इंडिगो के ही एक प्रवक्ता ने कहा- फ्लाइट के अंदर एक खतरे की सूचना मिली। इसके बाद सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के मुताबिक सीनियर अफसरों को इसकी जानकारी दी। सुरक्षा प्रोटोकॉल फॉलो किया गया। विमान को जरूरी जांच के बाद दिल्ली के लिए रवाना किया जाएगा।  यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस तरह की घटना हुई हों और यात्रियों को न सिर्फ देरी का बल्कि खामखा की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा हो।

इससे पहले 19 अक्टूबर 2024 को भी ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला था। आज की घटना से पहले 19 अक्टूबर 2024 को लखनऊ से अजमेर के किशनगढ़ जा रही स्टार एयर की फ्लाइट में बम की धमकी मिली थी। धमकी के बाद विमान को तुरंत रोक दिया गया।

कार्गो समेत चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई, लेकिन कुछ भी नहीं मिला था। इंडिगो की फ्लाइट में बम की सूचना 11 दिन बाद यानी 30 अक्टूबर 2024 को इंडिगो एयरलाइंस की दो उड़ानों 6ई-518 (दिल्ली-लखनऊ) और 6ई-1416 (अबू धाबी-लखनऊ) को बम की धमकी मिली थी। सुरक्षाकर्मियों ने विमानों को अपने कब्जे में लेकर जांच की थी, लेकिन वहां पर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था।

यह घटनाएं अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं। वहीं अगर आज की घटना की बात की जाये तो यह घटना सिर्फ एक छोटी सी उड़ान की समस्या नहीं है। यह भारत की हवाई सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। केंद्र में बैठी मोदी सरकार की देखरेख में देश की एयरपोर्ट सुरक्षा, खुफिया एजेंसियां और सिविल एविएशन मंत्रालय बार-बार ऐसी घटनाओं से जूझ रहे हैं। एक साधारण टॉयलेट पेपर पर लिखी धमकी पूरे सिस्टम को हिला देती है।

यात्री दहशत में आ जाते हैं, फ्लाइट्स देरी से चलती हैं, और आखिरकार पता चलता है कि सब होक्स था। लेकिन इस होक्स की कीमत कौन चुकाता है? आम यात्री, जिनकी जिंदगी और समय बर्बाद होता है।

खैर जैसा की हमने पहले ही कहा यह कोई पहला मौका नहीं है जब ऐसी अफवाहों की घटनाओं ने सुर्खियां बटोरी हों। बल्कि ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों में कई फ्लाइट्स में इसी तरह की धमकियां मिली हैं – कभी टिश्यू पेपर पर, कभी नोट पर। दिल्ली-बागडोगरा वाली फ्लाइट को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा था।

दिल्ली-पुणे वाली फ्लाइट में भी ऐसा हुआ। हर बार सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत लगाती हैं, लेकिन असली समस्या का हल नहीं निकलता। केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि हवाई यात्रा सुरक्षित हो। लेकिन बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि सुरक्षा में बड़े छेद हैं।

मोदी सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया। लेकिन हवाई यात्रा करने वाले आम आदमी की सुरक्षा पर ध्यान कहां है? एयरपोर्ट्स पर आधुनिक स्क्रीनिंग मशीनें लगी हैं, लेकिन क्या टॉयलेट या कई और जगहों पर हर समय निगरानी है? क्या क्रू को तुरंत रिपोर्ट करने का ट्रेनिंग दिया गया है?

क्या खुफिया विभाग पहले से ऐसे तत्वों पर नजर रखता है जो फर्जी धमकियां देकर लोगों को परेशान करते हैं? जवाब ज्यादातर मामलों में “नहीं” ही निकलता है। सरकार बड़े-बड़े दावे करती है – “वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर”, “डिजिटल इंडिया”, लेकिन बुनियादी सुरक्षा पर फेल हो जाती है।

यात्रियों में दहशत फैलना स्वाभाविक है। कोई नहीं जानता कि धमकी असली है या फर्जी। बच्चे रोने लगते हैं, बुजुर्ग परेशान हो जाते हैं, महिलाएं घबरा जाती हैं। फ्लाइट मिस हो जाती है, मीटिंग्स कैंसल हो जाती हैं, नौकरी प्रभावित होती है।

एयरलाइंस को नुकसान होता है, क्योंकि यात्री भविष्य में सोच-समझकर उड़ान भरेंगे। पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। लेकिन केंद्र सरकार इस पर गंभीरता से काम क्यों नहीं करती? क्या इसलिए क्योंकि ये घटनाएं अक्सर UP जैसे राज्यों में होती हैं, जहां योगी सरकार है, लेकिन केंद्र की जिम्मेदारी भी कम नहीं है?

इतना ही नहीं दोस्तों कहीं न कहीं सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस – सबको मिलकर काम करना चाहिए। लेकिन एक टिश्यू पेपर वाली धमकी पूरे सिस्टम को चकमा दे देती है। इसका मतलब है कि ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस शेयरिंग में कमी है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में एविएशन सेक्टर को बढ़ावा देने के दावे किए गए। नए एयरपोर्ट बने, फ्लाइट्स बढ़ीं, लेकिन सुरक्षा का स्तर वैसा ही पुराना रहा। होक्स कॉल्स या नोट्स रोकने के लिए सख्त कानून और तेज जांच की जरूरत है। लेकिन सरकार अक्सर घटना होने के बाद बयानबाजी करती है, ठोस कार्रवाई नहीं दिखती।

यह घटना सिर्फ इंडिगो की फ्लाइट की नहीं, बल्कि पूरे देश की हवाई सुरक्षा की कहानी है। आम आदमी सोचता है कि अगर इतनी बड़ी उड़ान में इतनी आसानी से धमकी पहुंच सकती है, तो बड़े हमले की क्या स्थिति होगी? केंद्र में बैठी मोदी सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। यात्री सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि सिर्फ इवेंट्स और फोटो सेशन्स।

अब बात करते हैं कि ऐसी घटनाएं कैसे रोकें जा सकते हैं। सबसे पहले, एयरपोर्ट टॉयलेट्स में CCTV कैमरे लगाने चाहिए जो रियल टाइम मॉनिटर हों। क्रू को ट्रेनिंग दें कि कोई भी संदिग्ध चीज मिले तो तुरंत रिपोर्ट करें, लेकिन घबराएं नहीं। खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे शरारती तत्वों पर नजर रखनी चाहिए जो होक्स धमकियां देते हैं। सजा कड़ी होनी चाहिए ताकि लोग दोबारा न करें।

यात्रियों की परेशानी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कई लोग घंटों बिना खाने-पीने के इंतजार करते रहे। एयरलाइंस ने रिफ्रेशमेंट दिया, लेकिन मानसिक तनाव कितना बड़ा था, यह सोचिए। दिल्ली पहुंचने वाले लोगों का पूरा दिन खराब हो गया। अगर सरकार की नीतियां मजबूत होतीं, तो ऐसी घटनाएं कम होतीं। लेकिन लगता है कि केंद्र की प्राथमिकताएं अलग हैं – इलेक्शन, इंटरनेशनल इमेज, बड़े प्रोजेक्ट्स।

आम यात्री की सुरक्षा पीछे छूट जाती है।मोदी सरकार पर सवाल उठता है कि 10 साल से ज्यादा समय में एविएशन सुरक्षा को क्यों नहीं विश्व स्तर का बना पाए? दुनिया के कई देशों में ऐसी छोटी धमकियों को तुरंत हैंडल किया जाता है, बिना यात्रियों को ज्यादा परेशान किए। भारत में अभी भी पुराने तरीके चल रहे हैं। DGCA, मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन की जरूरत है।

यह घटना UP से जुड़ी है, लेकिन समस्या राष्ट्रीय है। केंद्र सरकार को चाहिए कि पूरे देश में स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बनाए और उन्हें सख्ती से लागू करे। होक्स धमकी देने वालों पर तुरंत केस दर्ज हो, जांच तेज हो, और दोषी को सजा मिले। सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा। सजा ऐसी मिले जिससे दुबारा ऐसा करने से पहले हजार दफा सोचने को मजबूर हो जाएँ।

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