उन्नाव में बारिश ने खोली गंगा एक्सप्रेसवे की जलनिकासी व्यवस्था की पोल, 3 से 4 फीट पानी में डूबी एग्जिट रोड
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पिछले करीब 36 घंटे से जारी लगातार बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पिछले करीब 36 घंटे से जारी लगातार बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
बशीरतगंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के एग्जिट टोल गेट को लखनऊ-कानपुर हाईवे से जोड़ने वाली मुख्य एग्जिट रोड पर कई फीट तक पानी भर गया है। सड़क के जलमग्न होने से यहां आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में सड़क पर करीब 3 से 4 फीट तक पानी भरा दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि सड़क का बड़ा हिस्सा तालाब में तब्दील हो गया है। पैदल राहगीरों के लिए रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया है, जबकि पानी में उतरने के बाद कई वाहन बंद होने की बात सामने आ रही है।
36 घंटे की बारिश के बाद सड़क पर जलभराव
बताया जा रहा है कि उन्नाव के बशीरतगंज इलाके में पिछले करीब 36 घंटे से रुक-रुककर और कई स्थानों पर लगातार तेज बारिश हो रही है। बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के एग्जिट टोल गेट तक पहुंचने वाली सड़क पर पानी की निकासी नहीं हो सकी।
यह सड़क लखनऊ-कानपुर राजमार्ग को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी है। ऐसे में सड़क पर भारी जलभराव के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। पानी की गहराई बढ़ने से छोटे वाहनों के साथ-साथ अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
औद्योगिक गलियारे की सर्विस रोड भी जलमग्न
सिर्फ एग्जिट रोड ही नहीं, बल्कि आसपास के औद्योगिक गलियारे की सर्विस रोड पर भी पानी भरने की जानकारी सामने आई है। सड़क के कई हिस्से जलमग्न होने के कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है।
स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि लगातार बारिश के बीच पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। जलभराव के कारण पैदल निकलना मुश्किल है और वाहनों को भी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालने की कोशिश
जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए कार्यदायी संस्था की ओर से मौके पर पंपिंग सेट लगाए गए हैं। ट्रैक्टर के जरिए पंपिंग सेट मौके तक पहुंचाकर पानी निकालने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, लगातार बारिश होने के कारण पानी की निकासी की रफ्तार पर्याप्त नहीं दिखाई दे रही है। एक तरफ पंपिंग सेट के जरिए पानी निकाला जा रहा है, तो दूसरी तरफ बारिश के चलते सड़क पर दोबारा पानी जमा हो रहा है। इससे जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है।
जलनिकासी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
गंगा एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना की कनेक्टिविटी रोड पर इस तरह पानी भरने के बाद जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल किया जा रहा है कि बारिश के दौरान एग्जिट रोड और सर्विस रोड से पानी की निकासी के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था तैयार की गई है।
मौजूदा हालात में सड़क पर कई फीट पानी जमा होने से लोगों को परेशानी हो रही है। ऐसे में परियोजना की जलनिकासी व्यवस्था, सड़क के लेवल और आसपास के ड्रेनेज सिस्टम की जांच की जरूरत बताई जा रही है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ीं
जलभराव के कारण वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की गहराई अधिक होने के कारण वाहन चालकों के लिए सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है। पानी में जाने के बाद वाहनों के बंद होने की भी समस्या सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रहती है तो जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित कार्यदायी संस्था के सामने सड़क से पानी निकालने के साथ-साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती है।
एक्सप्रेसवे शुरू होने से पहले स्थायी समाधान की मांग
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में शामिल किया गया है। ऐसे में इसकी कनेक्टिविटी रोड पर बारिश के दौरान इस तरह का जलभराव सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर स्थायी समाधान की मांग उठ रही है।
सवाल यह भी है कि यदि सामान्य बारिश के बाद एग्जिट रोड और सर्विस रोड पर कई फीट पानी जमा हो रहा है, तो भविष्य में अधिक बारिश के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था होगी। हालांकि, इसका जवाब संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की ओर से तकनीकी जांच और जलनिकासी व्यवस्था के आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल मौके पर पंपिंग सेट के जरिए पानी निकालने का काम जारी है। लगातार बारिश के बीच जलभराव कम करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि तत्काल राहत के साथ-साथ यहां स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान सड़क पर इस तरह की स्थिति पैदा न हो।
रिपोर्ट- रंजन बाजपेई “निडर”,उन्नाव



