ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन, सरकार की नींद उड़ी
पैरामिलेट्री से पूरी दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग

राहुल-प्रियंका को हिरासत में लेकर किया रिहा
विरोध प्रदर्शन में 19 दलों के नेता हुए शामिल
सपा कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष का चुनाव आयोग पर हमला
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग तक विरोध-प्रदर्शन करने निकला है लेकिन पुलिस ने उनको बीच में ही रोक लिया। विपक्ष के साथ हजारों की भीड़ भी साथ में थी। भीड़ को देखकर मोदी सरकार की नींद उड़ गई। जगह-जगह पैरा मिलेट्री फोर्स लगा दी गई थी। बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन में 19 दलों के नेता शामिल हैं।
हालांकि आम आदमी पार्टी और डीएमके इसमें शामिल नहीं हैं। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने कुछ देर के लिए हिरासत में लिया। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

जब हमारे लोग देश के लिए जान दे सकते हैं तो हम जेल क्यों नहीं जा सकते : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हम लोकतंत्र फिर से बहाल करने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारे लोग देश के लिए जान दे सकते हैं तो हम जेल क्यों नहीं जा सकते। खरगे ने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए हम लड़ते रहेंगे। बता दें कि 200 से ज्यादा सांसद एकसाथ लामबंद हैं। वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं।
सपा कार्यकर्ता संघर्ष से नहीं डरते : अखिलेश यादव
दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में शामिल सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के सदस्य संघर्ष और मेहनत से कभी नहीं डरते। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी घबराई हुई है, इसलिए यहां पुलिस के बैरिकेड लगाए गए हैं। उन्होंने उपचुनाव को लेकर भी बीजेपी पर आरोप लगाए। अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए बीजेपी को हराएगा।
सीजेपी नेताओं को पुलिस ने भेजे नोटिस, अभिजीत दीपके बोले- आंदोलन में न जाने का दबाव
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस नोटिस दिए जा रहे हैं और उन्हें आंदोलनों में शामिल नहीं होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. यह दावा उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले किया है। दीपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन महज एक नारा है और असली मंशा वन नेशन, वन पार्टी की
सडक़ पर धरने पर बैठे राहुल-प्रियंका
विपक्ष संसद भवन जाने की मांग पर अड़ा हुआ है। हालांकि पुलिस ने नीति आयोग के मुख्यालय के पास विपक्षी नेताओं को रोक दिया है। आगे नहीं बढऩे देने पर राहुल और प्रियंका गांधी सडक़ पर ही धरने पर बैठ गए हैं। विपक्षी नेता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। सपा नेता वैरिकेड पर चढ़ गए हैं। वहीं वे सभी नारेबाजी कर रहे हैं सपा सांसद भी बीजेपी और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
बैरिकेडिंग लांघने की कोशिश करते रहे विपक्षी सांसद
पुलिस के मार्च रोकते ही राहुल और प्रियंका धरने पर बैठ गए। सपा सांसद हाथों में तख्तियां लिए हुए हैं, जिन पर लिखा है- बीजेपी ही ष्टश्वष्ट है। ये सांसद बैरिकेड लांघ कर आगे बढऩा चाहते हैं। वहीं राहुल गांधी सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटने के लिए कह रहे हैं। धरने पर बैठे अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में आम जनता को भरोसा है कि हमें चुनाव आयोग न्याय देगा और निष्पक्ष होगा। लेकिन यहां देखने को मिला है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रहा है। सुल्तानपुर के नंदलाल निषाद के नकली दस्तखत करके वोट डाला जा रहा था और फॉर्म 7 भरवाया जा रहा था। इन लोगों ने पूरे बंगाल का चुनाव लूट लिया। ऐसा लग रहा है कि चुनाव आयोग और बीजेपी दफ्तर एक ही तरह से काम कर रहा है। पीडीए के लोग मिलकर संविधान को बचाएंगे। पता चला है कि अदालत ने फॉर्म-6 को लेकर कहा है कि उनकी तरह से इस तरह का कोई ऑब्जर्वेशन नहीं था। अखिलेश ने कहा कि स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा वरना हम लोग बैरिकेड तोडक़र आगे निकल जाते।
फैजुल्लागंज में जलकहर, 50 हजार घरों में घुसा पानी
3 लाख की आबादी बेहाल, राहत के नाम पर प्रशासन का कागजी खेल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । लखनऊ के उत्तरी छोर पर स्थित फैजुल्लागंज क्षेत्र में इस समय कुदरत के कहर से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही का पानी हिलोरे मार रहा है। क्षेत्र की मामा कॉलोनी, दाऊद नगर, प्रीति नगर और यश नगर समेत दर्जनों बस्तियां भीषण जलभराव की चपेट में हैं। आलम यह है कि करीब 50 हजार घरों के ड्राइंग रूम से लेकर रसोई तक में गंदा पानी तैर रहा है और लगभग 3 लाख की आबादी पिछले कई दिनों से इस टापू बन चुके इलाके में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है।
घरों की पहली मंजिलें डूब चुकी हैं, चारपाई और राशन पानी में बह रहे हैं, और छतों पर तिरपाल ताने भूखे-प्यासे लोग टकटकी लगाए सिर्फ इस उम्मीद में आसमान निहार रहे हैं कि शायद कोई नाव उनकी तरफ आ जाए। बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, पीने के साफ पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा है और सीवर के गंदे पानी में जहरीले कीड़े-मकोड़े तैर रहे हैं।
स्मार्ट सिटी के नारों के बीच बदहाली का सच : हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट कागजों में खपा दिया जाता है, लेकिन बारिश आते ही फैजुल्लागंज की किस्मत में सिर्फ घुटनों से ऊपर बदबूदार पानी और जहरीले संक्रामक रोगों का डर लिख दिया जाता है। बंधे के निर्माण और पंपिंग स्टेशनों के वादे सिर्फ चुनावी भाषणों में तैरते हैं। स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि चुनाव के समय हाथ जोडऩे वाले नेता और बड़े-बड़े दावों वाले अफसर आज इस मुश्किल घड़ी में उन्हें मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ चुके हैं। पानी भले ही आने वाले दिनों में उतर जाए, लेकिन सिस्टम की संवेदनहीनता और नाकामी का जो कीचड़ 3 लाख लोगों की जिंदगी पर लगा है, वह आसानी से नहीं धुलने वाला।
कागजी फाइलों में तैरती राहत, जमीन पर सन्नाटा
आबादी के इस संकट पर नगर निगम और जिला प्रशासन की मुस्तैदी का हाल यह है कि मदद की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। 3 लाख की भारी आबादी के बीच राहत और बचाव कार्य केवल चंद मुख्य सडक़ों तक सिमट कर रह गया है। जितनी मदद इस समय युद्धस्तर पर जमीन पर उतरनी चाहिए थी, उसका दसवां हिस्सा भी प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंच रहा है। वजह बिल्कुल साफ है कि अफसरों के लिए फैजुल्लागंज की बाढ़ एक मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि एयर-कंडीशनर कमरों में बैठकर ‘समीक्षा बैठकें निपटाने और फाइलों में आंकड़े चमकाने का वार्षिक जरिया बन चुकी है। प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती का आलम यह है कि दाऊद नगर और मामा कॉलोनी की तंग गलियों में राहत की इक्का- दुक्का सरकारी नाव पहुंची है। जहां हजारों परिवारों को तत्काल निकालने और भोजन-दवा पहुंचाने के लिए दर्जनों स्टीमर और एसडीआरएफ की टोलियों की जरूरत थी, वहां चंद राहत पैकेट बांटकर इतिश्री कर ली गई। सोशल मीडिया पर अफसरों के निरीक्षण की तस्वीरें तो खूब चमक रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कैमरे की चमक खत्म होते ही अफसर अपनी गाडय़िां लेकर सूखे इलाकों की ओर लौट जाते हैं।
लखनऊ एयरपोर्ट परिसर में लगी भीषण आग
दो मजदूर झुलसे, दूर तक दिखा धुआं, फायर ब्रिगेड बुझाने में जुटी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परिसर में मंगलवार सुबह करीब 6.30 बजे मजदूरों की लेबर कॉलोनी में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में लपटें और धुआं दूर से दिखाई देने लगा। हादसे के बाद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट परिसर में टाटा प्रोजेक्ट्स की ओर से मजदूरों के रहने के लिए पीवीसी पैनल से तीन मंजिला आवास बनाया गया था। इसमें करीब 352 मजदूर रह रहे थे। बताया गया कि सुबह एक मजदूर सिलेंडर से खाना बना रहा था, तभी अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। आग फैलने से पहले ही सभी मजदूरों को आवास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि सामान निकालने की कोशिश में निर्मल और राहुल नाम के दो मजदूर झुलस गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। सूचना मिलते ही दमकल की नौ गाडय़िां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से ग्राउंड फ्लोर और फस्र्ट फ्लोर पूरी तरह जल गए, जबकि ऊपर के हिस्से भी प्रभावित हुए हैं।
थाना प्रभारी राजदेव प्रजापति के मुताबिक, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम के साथ सरोजनीनगर पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया और बड़ा जनहानि का हादसा टल गया।
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