टीएम कृष्णा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र से जवाब तलब

सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा की रिट याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा की रिट याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा. कृष्णा ने वंदे मातरम् के छह पद गाने की अनिवार्यता के खिलाफ याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वंदे मातरम् विवाद पर सुनवाई हुई. इस दौरान शीर्ष अदालत ने कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा की रिट याचिका पर केंद्र सरकार से दो हफ्ते में जवाब तलब किया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् न गाने वाले व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई की अपेक्षा नहीं करते. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि ‘राष्ट्रीय गीत’ क्या है, यह तय करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

टीएम कृष्णा की याचिका में केंद्र सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के छह पद गाने को अनिवार्य किया गया है. साथ ही उस हालिया संशोधन को भी चुनौती दी है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर का दर्जा दिया गया है.

चार पदों में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र- टीएम कृष्णा

याचिकाकर्ता टीएम कृष्णा का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के चार पदों में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है. लोगों को इन्हें गाने के लिए मजबूर करना जबरन धार्मिक और वैचारिक समर्थन है. यह संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है.

याचिका में ये भी तर्क दिया गया है कि ‘वंदे मातरम’ को ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ के दायरे में लाने वाला संशोधन मनमाना है. व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और बहुसंख्यक धार्मिक संदेश को बढ़ावा देता है.

याचिकाकर्ता के वकील डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि संशोधन में ‘राष्ट्रीय गीत’ की साफ परिभाषा नहीं दी गई है. इस अस्पष्टता से इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय का ज्ञापन राजपत्र में नहीं छपा है. मुरलीधर ने कहा कि राष्ट्रीय सहमति बनाए बिना ही यह संशोधन जल्दबाजी में पारित कर दिया गया है.

SG ने की नोटिस नहीं जारी करने की मांग

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से नोटिस नहीं जारी करने की मांग की और कहा कि यह सेंसेशन को बढ़ावा देने वाला होगा. जस्टिस बागची ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है.

एसजी ने कहा कि दो पद गाए जाएं या छह पद गाए जाएं. यह सरकार से इतर कौन तय करेगा, कोई और तो नहीं कर सकता. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी. जस्टिस बागची ने कहा कि यह सही बात है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह से जवाब तलब किया.

Related Articles

Back to top button