बंधकों को छुड़ाने के लिए मणिपुर में सेना का सर्च ऑपरेशन, अभी भी उग्रवादी समूह के कब्जे में सात लोग

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों ने उन लोगों को बचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है, जिन्हें उग्रवादियों समूहों ने बंधक बना रखा है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि पहाड़ी जिले के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा बल गश्त कर रहे हैं और सघन तलाशी ले रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस अभियान का मकसद सभी लापता लोगों को सुरक्षित बचाना और बंधक बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करना है।
कब शुरू हुई घटना
कांगपोकपी और सेनापति जिलों में उग्रवादियों समूहों ने कुकी और नागा समुदायों के लगभग 38 लोगों को बंधक बनाया था। इनमें से 31 लोगों को 14 और 15 मई को रिहा कर दिया गया। यह संकट 13 मई को हुई हिंसा के बाद शुरू हुआ था। उस दिन संदिग्ध उग्रवादियों ने कांगपोकपी में तीन चर्च नेताओं की गोली मारकर हत्या कर दी थी और चार अन्य को घायल कर दिया था। इसी दौरान नोनी जिले में भी एक नागरिक की हत्या हुई थी और उसकी पत्नी घायल हो गई थी।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस के बयान के अनुसार, लापता लोगों को खोजने के लिए कांगपोकपी के लेइलोन वैफेई और खराम वैफेई गांवों के उत्तर-पश्चिम में पहाड़ियों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक रिहा होने वालों में कांगपोकपी के कोनसाखुल गांव की 12 नागा महिलाएं शामिल थीं। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के साथ सेनापति जिले के कुकी समुदाय के चार पुरुष और दस महिलाएं भी सुरक्षा बलों को सौंप दी गईं। पुलिस ने बताया कि प्रशासन, सुरक्षा बलों, राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों की मिली-जुली कोशिशों से ज्यादातर नागरिकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। हालांकि, अब भी कुछ लोग लापता हैं।
इस बीच, नागा जनजातियों की मुख्य संस्था यूनाइटेड नागा काउंसिल ने रविवार रात से नेशनल हाईवे दो और 37 पर नाकेबंदी शुरू कर दी है। वे उन नागा पुरुषों की रिहाई की मांग कर रहे हैं जिनके उग्रवादियों के कब्जे में होने का शक है। दूसरी तरफ, कुकी जनजातियों की संस्था कुकी इन्पी मणिपुर ने भी दावा किया है कि उनके समुदाय के 14 सदस्य अब भी लापता हैं। उन्हें सेनापति जिले में अलग-अलग समूहों ने बंधक बना रखा है। सुरक्षा बल इन सभी की तलाश में जुटे हैं।

Related Articles

Back to top button