मोदी ने गहराया तेल संकट, चांदी पर भी कसी नकेल, अब जवाब देना पड़ रहा भारी
भाजपा राज में दिन बा दिन देश पीछे होता जा रहा है। आलम ये है कि देश पर भारी संकट है। लेकिन मोदी जी हैं कि लोगों से अपील करके खुद विदेशों में सैर करते हुए नजर आ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में दिन बा दिन देश पीछे होता जा रहा है। आलम ये है कि देश पर भारी संकट है। लेकिन मोदी जी हैं कि लोगों से अपील करके खुद विदेशों में सैर करते हुए नजर आ रहे हैं।
आलम ये है की जनता सड़कों पर है। तेल से लेकर गैस तक के लिए लाइने लग रही हैं। मगर मजाल है कि सरकार इसको अपनी नाकामी माने। बल्कि भाजपाई तो इस संकट को लेकर खुदको डिफेंड करने में लगे हुए हैं। देश में फिलहाल भारी आर्थिक दबाव बन रहा है।
वैश्विक तेल संकट के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं और आम लोगों पर बोझ बढ़ गया है। इसके साथ ही सरकार ने सोने के बाद चांदी पर भी नकेल कस दी है। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। इससे आम लोगों पर बोझ बढ़ा है।
इसी बीच बिहार की राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं। भाव बढ़ने के डर से लोग पैनिक बाइंग कर रहे हैं। सामने आई जानकारी और वीडियो के मुताबिक, पटना में करीब 27 पेट्रोल पंप अस्थायी रूप से बंद हो गए। कई पंपों पर डीलरों ने लिमिट लगा दी है – जैसे बाइक वालों को 200 रुपये तक ही पेट्रोल मिल रहा है।
गया जैसे जिलों में भी आधी से ज्यादा पंप बंद होने की खबरें आई हैं। यह स्थिति तेल संकट और सप्लाई पर दबाव को दिखाती है। वहीं इस मामले को लेकर घेरते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेट ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि बिहार में 27 पेट्रोल पंप बंद, पटना में लिमिट लगाई गई , गयाजी में 1 किलोमीटर लंबी लाइन लग रही हैं , तेल का संकट गहरा रहा है।
कई बार सुप्रिया श्रीनेट ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि अमृत काल में महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है। सरकार लोगों से पेट्रोल बचाने, वर्क फ्रॉम होम करने और सोना न खरीदने की अपील कर रही है, लेकिन खुद की नीतियां असफल साबित हो रही हैं।
आखिर सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की? वैश्विक संकट का हवाला देकर आम आदमी पर बोझ क्यों डाला जा रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और निर्भरता के कारण देश इस हाल में पहुंचा है।
हालांकि भले ही सरकार कह रही है कि देश में कुल स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन लोकल स्तर पर डिमांड बढ़ने से यह समस्या पैदा हुई। तेल कंपनियां घाटे में चल रही हैं, इसलिए कीमतें बढ़ाई गईं। आम आदमी को महंगाई का सबसे ज्यादा झटका लग रहा है क्योंकि ट्रांसपोर्ट, सब्जी-फल और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
सोने के बाद अब चांदी पर भी सरकार ने सख्ती कर दी है। हाल ही में DGFT यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड ने नोटिफिकेशन जारी कर चांदी के ज्यादातर आयात को ‘फ्री’ से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया। अब हाई प्यूरिटी चांदी बार, अनरॉट सिल्वर आदि आयात करने के लिए सरकार की अनुमति जरूरी है। इससे पहले 13 मई को गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई थी।
वहीं इसपर सरकार का कहना है कि चांदी और सोने के आयात से विदेशी मुद्रा का ज्यादा खर्च हो रहा है। तेल महंगा होने से पहले ही ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा था, इसलिए रुपया मजबूत रखने और जरूरी चीजों के आयात के लिए डॉलर बचाने के उपाय किए जा रहे हैं। PM मोदी ने भी लोगों से अपील की थी कि सोना-चांदी कम खरीदें, विदेश यात्रा कम करें और ईंधन बचाएं। लेकिन वो खुद विदेश यात्रा कर रहे हैं।
खैर अब वो मोदी जी हैं उनके लिए कुछ भी मुमकिन है। लेकिन आम जनता से लेकर चांदी खरीदने वाले ज्वेलरी व्यापारियों, इंडस्ट्री और निवेशकों को परेशानी हो सकती है। कीमतें बढ़ सकती हैं, सप्लाई प्रभावित हो सकती है। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे ब्लैक मार्केटिंग या स्मगलिंग बढ़ सकती है। हर 15 दिन में जांच या लिमिट वाली खबरें अफवाहें भी हो सकती हैं, लेकिन नई नीति में लाइसेंस और मॉनिटरिंग बढ़ गई है।
केंद्र में बैठी मोदी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है। इसे लेकर आलोचक कहते हैं कि पिछले सालों में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के दावे किए गए, लेकिन विदेशी संकट आने पर आम जनता पर बोझ डाला जा रहा है। महंगाई काबू में नहीं आ रही, रोजगार और आय पर असर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रक, बस, टैक्सी वाले और किसान प्रभावित हो रहे हैं।
चांदी-सोने पर पाबंदी से छोटे व्यापारी और मिडिल क्लास को नुकसान पहुंच रहा है। खैर सरकार ने अगर पहले इस मामले को गंभीरता से लिया होता तो आज ये दिन न देखने पड़ते।



