राहुल गांधी को रोकने की नई सरकारी पटकथा!

- इडियट और अंधभक्त शब्दों से बौखला गयी सरकार
- सड़क से सदन तक रोके नहीं रूक रहे राहुल गांधी
- संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस का प्रर्दशन
- पैलेट गन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आज नौवें दिन का राजनीतिक तापमान आसमान पर है और असाधारण बना हुआ है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।
राहुल गांधी खुद कह चुके हैं कि उनका माइक बंद कर दिया जाता है और उनके भाषण पर शोर मचाया जाता है। आज कांग्रेस पार्टी ने इसी मुद््दे को लेकर संसद के मकर द्वार पर तगड़ा प्रदर्शन किया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है कि सरकार राहुल गांधी को न सड़क पर रोक सकी और न ही सदन में रोक पाएगी। वह कोशिशें जितनी चाहे कर लें राहुल आम जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे।
इडियट और अधंभक्त
सदन में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। अपने भाषण में उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिन पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से माफी मांगने और तथ्यों के साथ बात रखने की बात कही। इसी दौरान सदन में इतना शोर शराबा हुआ कि लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्रवाई पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। कल के एपिसोड के बाद अब यह विवाद केवल एक भाषण का नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने का मुद्दा बना रही है जबकि सरकार का कहना है कि संसदीय मर्यादा और तथ्यों की जिम्मेदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता। और यही कारण है कि एक बार फिर विपक्ष और सरकार आमने सामने है और किसी समझौते के आसार दूर है। संसद के इस शीतकालीन सत्र में विपक्ष पहले दिन से हमलावर है। आज राज्यसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा प्रस्तावित है जबकि लोकसभा में कांग्रेस नए दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा की मांग भी उठा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा ? बल्कि यह राजनीतिक संदेशों संसदीय रणनीतियों और लोकतांत्रिक विमर्श की दिशा तय करने वाला सत्र भी बनता जा रहा है।
गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग
कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए मुद्दों पर जवाबदेही की मांग की। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद में राहुल गांधी की आवाज को रोकने का प्रयास किया गया और सरकार को सवालों का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राहुल गांधी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा? कि पूरे मामले की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री की है। गृह मंत्री को देश और संसद के सामने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। सरकार को युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देना होगा। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि सरकार के पास संख्या बल होने के कारण विधेयक का पारित होना तय था लेकिन संसद में जिस तरह की स्थिति बनी उससे सरकार का डर दिखाई दिया। राहुल गांधी को बोलने से रोकने की कोशिश की गई और उनके भाषण के दौरान बार-बार व्यवधान डाला गया। विपक्ष जनता से जुड़े मुद््दों को सदन में उठाता रहेगा।
पेलेट गन इस्तेमाल पर कोर्ट में बहस
भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह याचिका 2० जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए तीन लोगों की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना पर्याप्त कारण पैलेट गन का इस्तेमाल किया जिससे कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि नागरिक प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और भीड़ नियंत्रण के लिए कम घातक तथा मानवीय विकल्प अपनाने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में कहा गया है कि पैलेट गन से होने वाली चोटें कई मामलों में स्थायी शारीरिक क्षति का कारण बन सकती हैं। इसलिए ऐसे हथियारों का प्रयोग केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों तक सीमित होना चाहिए। साथ ही, इस मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की गई है। दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों का सामान्य रुख यह रहा है कि हिंसक और अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए परिस्थितियों के अनुरूप बल प्रयोग करना पड़ता है। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और हर स्थिति में उपलब्ध विकल्पों का निर्णय मौके की परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अदालत के समक्ष केवल एक घटना नहीं, बल्कि यह व्यापक सवाल भी है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग की संवैधानिक सीमाएं क्या हैं। यदि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में कोई अंतरिम निर्देश का प्रभाव भविष्य में भीड़ नियंत्रण से जुड़ी नीतियों, पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों की बहस पर भी पड़ सकता है।
नौवें दिन भी कार्रवाई ठप्प
मानसून सत्र के 9वें दिन भी लोकसभा में प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया। स्पीकर ओम बिरला ने आज फिर विपक्ष के हंगामे की वजह से महज दो मिनट के अंदर लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सुबह 11 बजे संसद सत्र की शुरुआत होने पर लोकसभा में कॉमनवेल्थ गेम्स-26 में भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी गई। इसके बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल की कार्यवाही का संचालन किया। हालांकि विपक्ष ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-26 पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के मुद्दे पर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के हंगामे पर स्पीकर ने कहा मैंने कई बार आग्रह किया है कि प्रश्नकाल संसद सदस्यों का अधिकार है। प्रश्नकाल के अंदर सरकार की जवाबदेही भी तय होती है। मैंने सदन के माध्यम और फ्लोर लीडरों की बैठक में भी सभी से आग्रह किया कि सदन में प्रश्नकाल को बाधित न करें। प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। इसके बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। स्पीकर ने पूछा कि आप प्रश्नकाल नहीं चलाना चाहते हैं? इसके बाद जब विपक्ष के सदस्य शांत नहीं हुए तो स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
विपक्षी नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं उनकी जिम्मेदारी सरकार की है। कार्रवाई किसके आदेश पर हुई और इसके लिए जवाबदेह कौन है? राहुल गांधी ने कोई कार्रवाई नहीं की इसलिए माफी मांगने का सवाल नहीं उठता। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने राहुल गांधी के बयान का बचाव करते हुए कहा कि माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। राहुल गांधी अपनी बात मजबूती से रखते हैं और उनके उठाए गए मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भाजपा और विपक्ष के बीच वैचारिक मतभेद का भी जिक्र किया। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी को किस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए? अगर किसी घटना में कार्रवाई हुई है लाठीचार्ज हुआ है या अन्य बलों का इस्तेमाल हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि विपक्ष के नेता अपनी बात रख रहे थे लेकिन सत्ता पक्ष लगातार उन्हें बाधित कर रहा था। सरकार नहीं चाहती कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले। यहां तक कि वरिष्ठ नेताओं द्वारा सदस्यों से शांत रहने की अपील भी की गई लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि विपक्ष की मांग रही है कि लाठीचार्ज मामले में चार्जशीट दाखिल होनी चाहिए। विधेयक आते-जाते रहेंगे लेकिन जनता से जुड़े मामलों पर चर्चा जरूरी है। मुंबई से कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा है कि सरकार जानती है कि राहुल गांधी संसद में तथ्यों के आधार पर मुद्दे उठाते हैं। सरकार सवालों का सामना करने से बच रही है। राहुल गांधी युवाओं, किसानों, मजदूरों, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे और सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।




