राहुल गांधी पर हाथ डाल कर बुरी तरह फंसी भाजपा!

  • हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की सभा के बाद शुद्धिकरण विवाद का मामला गरमाया
  • कांग्रेस ने भारत की पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि पर उठाए सवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। वाह रे राजनीति राहुल गांधी की एफआईआर की मांग को सरकार ने उनके ऊपर ही एफआईआर करा के पूरा कर दिया। लेकिन यह दांव बीजेपी सरकार के लिए उल्टा पड़ गया और एफआईआर करा के बीजेपी राहुल गांधी के जाल में फंस गयी। जो मुद्दा लगभग समाप्त हो गया था व न सिर्फ जिंदा हुआ बल्कि उस मुद्दे की तपिश पहले से ज्यादा बीजेपी को हलकान कर रही है।
मामला हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुए शुद्धिकरण विवाद का है सिजमें राहुल गांधी ने पूछा था कि खरगे की सभा के बाद आखिर किस मानसिकता के तहत शुद्धिकरण कराया गया और जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई। राहुल गांधी के इस सवाल के जवाब में जो पटकथा लिखी गयी उसमें एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन कैमरा घूमकर राहुल गांधी पर टिक गया। अब बताइए इसे संयोग कहें राजनीति कहें या फिर सवाल पूछोगे तो सवाल तुम्हारे खिलाफ ही लिख दिया जाएगा वाली नई व्यवस्था?

और यहीं से भाजपा की मुश्किल शुरू होती है

राहुल गांधी को घेरने की कोशिश में मामला अब सिर्फ राहुल बनाम भाजपा नहीं रहा। यह सवाल दलित सम्मान, जातिगत भेदभाव और संविधान की राजनीति के मैदान में जा पहुंचा है। कांग्रेस को इससे बड़ा राजनीतिक हथियार और क्या चाहिए था? उसे राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर मिल गयी उसे आंदोलन का मुद्दा मिल गया और सबसे बढ़कर उसे यह कहने का मौका मिल गया कि जिस मामले में कार्रवाई मांगने वाला नेता था कार्रवाई उसी के खिलाफ कर दी गयी यानी कहानी कुछ ऐसी है कि राहुल गांधी ने दरवाजा खटखटाया था जवाब में दरवाजा खुला जरूर लेकिन बाहर पुलिस खड़ी थी। अब भाजपा चाहे तो इसे राहुल गांधी की कानूनी मुश्किल बताए चाहे इसे राजनीतिक बयानबाजी का जवाब कहे लेकिन एक सवाल उसका पीछा नहीं छोडऩे वाला खरगे के कार्यक्रम के बाद शुद्धिकरण हुआ तो क्यों हुआ किसने कराया और उस पर क्या कार्रवाई हुई क्योंकि राहुल गांधी पर एफआईआर इस सवाल का जवाब नहीं है कि बल्कि ऐसा लगता है कि एफआईटार ने सवाल को और बड़ा कर दिया है और राजनीति में इससे खतरनाक रायता दूसरा नहीं होता जब आप विपक्षी नेता को चुप कराने के लिए कार्रवाई करें और बदले में विपक्ष को ऐसा मुद्दा मिल जाए जिसे वह अगले कई दिनों तक मुद्दे पर सवालों की बारिश करता रहे।

बैक फायर कर गयी एफआईआर

मजेदार बात यह है कि जिस घटना को लेकर राहुल गांधी सवाल उठा रहे थे वह एफआईआर के बाद गायब नहीं हुई उलटे और चमक गई। खरगे का नाम फिर चर्चा में आ गया हल्द्वानी फिर सुर्खियों में आ गया और शुद्धिकरण शब्द ने सोशल मीडिया पर फिर से ट्रेंड करने लगा। यानी जिस मुद्दे को शायद दो दिन की खबर बनकर शांत हो जाना चाहिए था एफआईआर ने उसे ऐसा एक्सटेंशन दे दिया कि अब कांग्रेस पूरे देश में इसे लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है। भाजपा ने राहुल गांधी पर हाथ रखा तो हाथ में राहुल कम और पूरा मुद्दा ज्यादा आ गया

पूरे देश में मुद्दा बन गया

घटना के बाद राहुल गांधी कह रहे थे कि अगर दलित नेता के कार्यक्रम के बाद ऐसा हुआ है तो जांच कीजिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कीजिए। यूपी के चुनाव सिर पर है और यहा पहले से ही अखिलेश यादव का पीडीए पिछड़ा, दलित, अपलसंख्यक फार्मूले ने बीजेपी की नाक में दम कर रखा है ऐसे में शुद्धिकरण विवाद इस फार्मूले को और ज्यादा आगे ले जा रहा है। दूसरे दलित नेता भी इस तरह के आरोप सरकार पर लगा रहे है और हालिकया कई घटनाए बेचैनी पैदा करने वाली है। ऐसे में शांत होते इस मुद्दे को एफआईआर ने हवा दे दी है और ऐसा नैरेटिव बन रहा है कि दलितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

कांग्रेस ने भारत की पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि पर उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनजर वित्त वर्ष 26-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने इसे अर्थव्यवस्था की अत्यंत विकृत तस्वीर और समय से पहले की खुशी बताया है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने देश की अर्थव्यवस्था की निराशाजनक तस्वीर पेश करते हुए इस वृद्धि पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तिमाही जीडीपी के आंकड़े जिस तरह से रिपोर्ट किए गए हैं अर्थव्यवस्था की एक अत्यंत विकृत तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये आंकड़े घरेलू और विदेशी दोनों ही क्षेत्रों में निजी निवेश की बेहद कमजोर भावना को नहीं दर्शाते हैं।

उपभोक्ता का विश्वास बेहद सुस्त है : जयराम

कांग्रेस के संचार मामलों के महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि उपभोक्ता विश्वास बेहद सुस्त है। रमेश ने आरोप लगाया कि यह कोविड महामारी के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और नवंबर 2025 से लगातार नीचे की ओर जा रहा है। राज्यसभा सांसद के अनुसार घरेलू आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और उन्होंने कहा कि भारत के शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर है। उन्होंने आगे कहा कि चीन के साथ लगातार बढ़ता व्यापार घाटा तबाही मचा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा जानबूझकर प्रोत्साहित किए गए कुछ बड़े समूहों द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा करना हानिकारक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत के पांच सबसे धनी परिवारों की संपत्ति में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि वेतनभोगी कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में गिरावट आई है। जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि घरेलू बचत दरें घटी हैं और कर्ज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा है कि यह प्रधानमंत्री द्वारा समय से पहले ही जश्न मनाने का मामला है। उनकी यह प्रतिक्रिया अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़ों के जारी होने के बाद आई है जो भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमानित 7 प्रतिशत से अधिक हैं। यह पश्चिम एशिया संकट कच्चे तेल की ऊंची कीमतों आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अन्य आर्थिक प्रभावों के बीच हुआ है।

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