गुजरात में 1500 करोड़ का जमीन घोटाला | पूर्व कलेक्टर गिरफ्तार | 1 करोड़ की रिश्वत का आरोप

गुजरात के सुरेंद्रनगर में बड़े जमीन घोटाले का खुलासा हुआ है... मामले में जिले के पूर्व कलेक्टर को गिरफ्तार किया गया है...  

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात राज्य में हाल ही में एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है.. जिसमें प्रवर्तन निदेशालय ने सुरेंद्रनगर जिले के पूर्व कलेक्टर राजेंद्र कुमार पटेल को गिरफ्तार किया है.. यह मामला करीब 1500 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े घोटाले का है.. जहां रिश्वत लेकर जमीन के उपयोग में बदलाव की फाइलों को तेजी से मंजूर किया जाता था.. ईडी की टीम ने पटेल को गांधीनगर से गिरफ्तार किया.. और अब इस मामले की गहन जांच चल रही है.. इस घोटाले में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं.. और इससे सरकारी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर हुई हैं.. इस खबर ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है.. क्योंकि पटेल एक आईएएस अधिकारी हैं.. और उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगना गंभीर है..

जानकारी के मुताबिक यह मामला दिसंबर 2025 में शुरू हुआ.. जब ईडी की टीम ने सुरेंद्रनगर जिले में छापेमारी की.. सुरेंद्रनगर गुजरात का एक महत्वपूर्ण जिला है.. जहां कृषि और औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है.. यहां की जमीनें मूल्यवान हैं.. और कई लोग कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग (जैसे आवासीय या व्यावसायिक) में बदलने के लिए आवेदन करते हैं.. इस प्रक्रिया को सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) कहते हैं.. जो सौराष्ट्र घरखेड़ टेनेंसी सेटलमेंट एंड एग्रीकल्चरल लैंड्स ऑर्डिनेंस, 1949 के तहत होती है..

आपको बता दें कि घोटाले का मुख्य आरोप यह है कि अधिकारियों ने इन आवेदनों को मंजूर करने के लिए रिश्वत ली.. अनुमान है कि इससे जुड़ी जमीनों की कुल कीमत 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा है.. और रिश्वत की रकम करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.. ईडी के अनुसार, रिश्वत प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से तय की जाती थी.. और यह पैसा आवेदकों से सीधे या बिचौलियों के माध्यम से लिया जाता था.. यह घोटाला थान गांव के विद इलाके में 3600 बीघा से अधिक जमीन से जुड़ा है.. जहां सर्वे नंबरों में फर्जी नाम जोड़े गए थे.. इन नामों को जोड़ने के लिए भी रिश्वत ली जाती थी..

वहीं ईडी की जांच दिसंबर 2025 में तेज हुई.. जब उन्होंने सुरेंद्रनगर कलेक्टर कार्यालय में काम करने वाले डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी के घर पर छापा मारा.. मोरी के घर से 67.5 लाख रुपये नकद बरामद हुए.. जो उनके बेडरूम में छिपाए गए थे.. मोरी ने ईडी के सामने कबूल किया कि यह पैसा रिश्वत का है.. जो सीएलयू आवेदनों को तेजी से पास करने के लिए लिया गया था.. इस बयान के बाद ईडी ने अन्य अधिकारियों पर शिकंजा कसा..

आपको बता दें कि राजेंद्र कुमार पटेल 2015 बैच के आईएएस अधिकारी.. जो सुरेंद्रनगर के कलेक्टर थे.. उन पर आरोप है कि वे रिश्वत के 50 प्रतिशत हिस्से के हकदार थे.. ईडी ने उनके घर से 100 से अधिक सरकारी फाइलें जब्त की.. जो वे घर ले जाते थे.. पटेल के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने की बात भी सामने आई है.. वे अहमदाबाद जिले के निवासी हैं.. जन्म 23 अगस्त 1985 को हुआ.. और उन्होंने बीडीएस (डेंटल सर्जरी) के साथ पब्लिक पॉलिसी में एमए किया है.. सरकार ने उन्हें 4 फरवरी 2025 को सुरेंद्रनगर कलेक्टर बनाया था.. लेकिन दिसंबर 2025 में उन्हें बिना पोस्टिंग के ट्रांसफर कर दिया गया..

चंद्रसिंह मोरी डिप्टी मामलतदार, जिन्हें सीएलयू आवेदनों की जांच.. और प्रोसेसिंग का काम सौंपा गया था.. और उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और रिश्वत ली.. मोरी ने कबूल किया कि रिश्वत का 10 प्रतिशत उन्होंने रखा.. और बाकी वितरित किया.. ईडी ने उन्हें 24 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया.. जयराजसिंह झाला, पटेल के पर्सनल असिस्टेंट (पीए), जो रिश्वत के हिसाब-किताब का काम देखते थे.. और मयूरसिंह गोहिल क्लर्क, जिन्हें रिश्वत का 5 प्रतिशत मिलता था.. वहीं रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर आरके ओझा (25 प्रतिशत) और तहसीलदार मयूर दवे (10 प्रतिशत) भी शामिल बताए गए हैं..

ईडी के अनुसार यह एक संगठित गिरोह था, जहां फाइलों को जानबूझकर रोका जाता था.. और फिर स्पीड मनी लेकर तेजी से पास किया जाता था.. एक गवाह चेतन कंजारिया ने दावा किया कि उन्होंने 65 लाख रुपये रिश्वत दी.. ईडी ने अधिकारियों के फोन से रिश्वत के रिकॉर्ड भी बरामद किए.. जिसमें 800 से अधिक आवेदनों का जिक्र है.. ईडी की कार्रवाई दिसंबर 2025 में शुरू हुई.. 23 दिसंबर को उन्होंने मोरी, झाला, गोहिल.. और पटेल के घरों पर छापे मारे.. मोरी के घर से कैश मिलने के बाद, उन्होंने पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट) की धारा 17 के तहत बयान दर्ज किया.. मोरी ने रिश्वत के वितरण का पूरा ब्योरा दिया..

इसके बाद ईडी ने पटेल के गांधीनगर स्थित आवास पर छापा मारा.. यहां से सरकारी फाइलें मिलीं.. जो दर्शाती हैं कि पटेल फाइलों को घर ले जाते थे ताकि प्रक्रिया में हेरफेर कर सकें.. ईडी की तीन टीमों ने 2 जनवरी 2026 को पटेल से पूछताछ की.. और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.. गिरफ्तारी के बाद, अहमदाबाद की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने पटेल को 5 दिनों की ईडी रिमांड पर भेजा.. जो 7 जनवरी 2026 तक है.. ईडी ने 10 दिनों की रिमांड मांगी थी.. ताकि रिश्वत के पैसे का पता लगाया जा सके..

बता दें कि गुजरात एंटी करप्शन ब्यूरो ने भी ईडी की शिकायत पर 23 दिसंबर 2025 को पटेल.. और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.. यह एफआईआर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत है.. ईडी का कहना है कि इस घोटाले से 1 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति बनी, जिसकी तलाश जारी है.. वहीं यह घोटाला एक सुनियोजित रैकेट था.. आवेदक सीएलयू के लिए फाइल जमा करते थे.. लेकिन अधिकारियों द्वारा जानबूझकर देरी की जाती थी.. फिर, बिचौलियों के जरिए रिश्वत मांगी जाती.. रिश्वत की दर प्रति वर्ग मीटर तय थी.. जैसे कि महंगी जमीन पर ज्यादा रकम.. मोरी को टाइटल वेरिफिकेशन का काम था.. लेकिन उन्होंने फर्जी नाम जोड़कर फाइलें पास की..

जानकारी के मुताबिक रिश्वत का वितरण तय था.. जिसमें 50% कलेक्टर को, 25% एडिशनल कलेक्टर को, 10% तहसीलदार को, 10% मोरी को, और 5% क्लर्क को मिलता था.. और झाला हिसाब रखते थे, और रिकॉर्ड हैंडराइटेन शीट्स या डिजिटल फाइलों में रखे जाते थे.. ईडी का अनुमान है कि 800 आवेदनों से 10 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई.. वहीं यह पैसा मनी लॉन्डरिंग के जरिए छिपाया गया..

ईडी ने अब तक मोरी से 67.5 लाख कैश, पटेल के घर से 100 फाइलें.. और अधिकारियों के फोन से डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं.. पटेल के नाम पर 5 करोड़ की संपत्ति है.. जो जांच के दायरे में है.. घोटाले से जुड़ी जमीनें 3600 बीघा से ज्यादा हैं.. जिनकी बाजार कीमत 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है.. ईडी अब इन जमीनों के मालिकों और बिचौलियों की तलाश कर रही है.. ताकि फर्जी नामों का खुलासा हो..

 

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