60 करोड़ लोगों की जिंदगी दांव पर! | अब मोदी क्या करेंगे? | सबसे बड़ा संकट

देश की 60 करोड़ आबादी आज गंभीर जल संकट के साए में है... जिस जल जीवन मिशन को हर घर पानी का समाधान बताया गया था...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सरकार दावा करती चली आ रही है कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है.. 2025 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 4.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है.. जो जापान को पीछे छोड़कर हासिल की गई एक बड़ी उपलब्धि है.. लेकिन इस आर्थिक उन्नति के पीछे एक गंभीर संकट छिपा है.. जो जल संकट है.. इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से कई लोगों की मौत हो गई है.. अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है.. प्रशासन ने सिर्फ चार मौतों की पुष्टि की है.. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संख्या 14 तक पहुंच सकती है.. 200 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं.. वहीं यह घटना भारत में जल संकट की एक छोटी झलक है..

नीति आयोग की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार.. देश के करीब 60 करोड़ लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं.. हर साल दो लाख लोग अपर्याप्त पानी की वजह से मर जाते हैं.. येल यूनिवर्सिटी की 2022 की पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक रिपोर्ट में भारत असुरक्षित पीने के पानी के मामले में 180 देशों में 141वें स्थान पर है.. विश्व बैंक का अनुमान है कि 2050 तक जल की कमी से भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह आर्थिक विकास टिकाऊ है.. क्या सरकार इस संकट से निपटने के लिए तैयार है..

आपको बता दें कि भारत में जल संकट दूषित पानी, पानी की कमी और पानी की बर्बादी तीन मुख्य रूपों में दिखता है.. वहीं ये समस्याएं ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में फैली हुई हैं.. नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी.. इसका असर अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और कृषि पर पड़ेगा.. इंदौर जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि प्रशासनिक लापरवाही कितनी घातक हो सकती है.. अब समय है कि हम इस संकट को समझें और समाधान की दिशा में कदम उठाएं..

भारत में दूषित पानी की समस्या अब केवल गांवों तक सीमित नहीं है.. यह शहरों और कस्बों में भी फैल चुकी है.. भारत का लगभग 70 प्रतिशत पानी किसी न किसी रूप में प्रदूषित है.. इंडिया वाटर पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार देश की 323 नदियों के 351 खंडों में जल की गुणवत्ता मानकों से नीचे है.. इन प्रदूषित नदियों से जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं..

हर साल लगभग 3.77 करोड़ लोग पानी से फैलने वाली बीमारियों का शिकार होते हैं.. डायरिया से लाखों बच्चों की मौत हो जाती है.. इंडिया वाटर पोर्टल के अनुसार.. जलजनित बीमारियों से भारत को हर साल लगभग 600 मिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होता है.. कोलेरा, एक्यूट डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां पिछले पांच सालों में 10 हजार से ज्यादा मौतों का कारण बनी हैं.. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण पानी में जैविक प्रदूषण, बिना ट्रीटमेंट का सीवेज, औद्योगिक कचरा.. और कृषि से आने वाले रसायन हैं..

आपको बता दें कि येल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में भारत असुरक्षित पीने के पानी के सूचकांक में 141वें स्थान पर है.. विश्व बैंक के अनुसार, जल प्रदूषण से भारत की जीडीपी को लगभग तीन प्रतिशत का नुकसान हो रहा है.. स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है.. कृषि उत्पादकता घट रही है.. और मत्स्य पालन तथा पर्यटन जैसे क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं.. इंदौर की घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है.. जहां दूषित पानी से कई मौतें हुईं.. प्रशासन की लापरवाही से सीवेज लाइन का पानी पीने के पानी में मिल गया.. जिससे डायरिया और उल्टी की शिकायतें बढ़ीं..

शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर है.. दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसी महानगरों में नदियां सीवेज का डंपिंग ग्राउंड बन चुकी हैं.. गंगा नदी, जो करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है.. वह भी प्रदूषण की शिकार है.. नमामी गंगे योजना के बावजूद, कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है.. ग्रामीण इलाकों में कुओं और हैंडपंपों का पानी आर्सेनिक, फ्लोराइड.. और आयरन जैसे रसायनों से दूषित है.. पूर्वी भारत के कई राज्यों में आर्सेनिक प्रदूषण से कैंसर जैसी बीमारियां फैल रही हैं..

वहीं यह संकट केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है.. प्रदूषित पानी से कृषि प्रभावित होती है.. क्योंकि फसलें जहरीली हो जाती हैं.. उद्योगों में भी उत्पादन प्रभावित होता है.. विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि.. मध्य आय वाले देशों में जल प्रदूषण से जीडीपी का आधा हिस्सा प्रभावित हो सकता है.. भारत जैसे देश में जहां 70 प्रतिशत पानी प्रदूषित है.. यह एक बड़ी चुनौती है..

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूजल निकालने वाला देश है.. केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में भूजल का दोहन 156 प्रतिशत है.. जो सबसे अधिक है.. राजस्थान में 147 प्रतिशत और हरियाणा में 133 प्रतिशत दोहन दर्ज किया गया है.. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में भूजल स्तर 20 मीटर से नीचे चला गया है..

दक्षिण भारत में बेंगलुरु का उदाहरण सबसे गंभीर है.. शहर को 145 करोड़ लीटर पानी कावेरी नदी से मिलता है.. और 60 करोड़ लीटर भूजल से निकलता है.. लेकिन दोनों स्रोत सूख रहे हैं.. 2025 में बेंगलुरु में पानी की कमी से हाहाकार मचा हुआ है.. मौसम विभाग का अनुमान है कि शहर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ रहा है.. जिससे वाष्पीकरण बढ़ता है.. बोर्वेल सूख रहे हैं.. और पीने का पानी मिलना मुश्किल हो गया है..

नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी.. इसका मतलब है कि बड़ी आबादी को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा.. कृषि क्षेत्र में 80 प्रतिशत पानी का उपयोग होता है.. लेकिन सिंचाई की दक्षता केवल 38 प्रतिशत है.. बाढ़ और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं.. जो जल स्रोतों को और कमजोर कर रही हैं..

शहरीकरण भी एक बड़ा कारण है.. शहरों में कंक्रीट के जंगल ने वर्षा जल के रिचार्ज को रोक दिया है.. झीलें और तालाब सूख रहे हैं या अतिक्रमण का शिकार हो रहे हैं.. बेंगलुरु में 79 प्रतिशत झीलें प्रदूषित हैं या सूख चुकी हैं.. विश्व बैंक का अनुमान है कि 2050 तक जल की कमी से भारत की जीडीपी 6 प्रतिशत तक कम हो सकती है.. किसानों के लिए खेती करना मुश्किल होगा.. जिससे खाद्य उत्पादन प्रभावित होगा.. टेक्सटाइल और थर्मल पावर जैसे उद्योग.. जहां पानी की जरूरत ज्यादा है.. भी प्रभावित होंगे..

बता दें भारत की नदियां प्रदूषण की शिकार हैं.. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में 323 नदियों के 351 खंड प्रदूषित पाए गए हैं.. जिसमें गंगा, यमुना और गोदावरी जैसी नदियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.. औद्योगिक कचरा, सीवेज और कृषि रसायन नदियों में बहाए जा रहे हैं.. प्रदूषण से जलजनित बीमारियां फैल रही हैं.. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल 40 लाख से ज्यादा लोग जलजनित बीमारियों से प्रभावित होते हैं.. डायरिया से 4 लाख बच्चों की मौत होती है.. इंदौर की घटना में सीवेज का पानी पीने के पानी में मिलने से कोलेरा जैसी बीमारियां फैलीं..

प्रदूषण का आर्थिक प्रभाव भी बड़ा है.. विश्व बैंक की रिपोर्ट में जल प्रदूषण से जीडीपी का 3 प्रतिशत नुकसान बताया गया है.. स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है, कृषि उत्पादकता घटती है.. मत्स्य पालन प्रभावित होता है.. क्योंकि मछलियां जहरीली हो जाती हैं.. पर्यटन भी प्रभावित होता है, क्योंकि प्रदूषित नदियां आकर्षण खो देती हैं.. भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है.. लेकिन जल संकट इस पर ब्रेक लगा सकता है.. विश्व बैंक का अनुमान है कि 2050 तक जल की कमी से जीडीपी में 6 प्रतिशत की कमी आ सकती है.. कृषि, जो 18 प्रतिशत जीडीपी का हिस्सा है.. सबसे ज्यादा प्रभावित होगा.. पानी की कमी से फसल उत्पादन घटेगा.. जिससे खाद्य महंगाई बढ़ेगी..

 

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