‘क्योंकि वो अंधे हैं तो दिखता नहीं…’रामभद्राचार्य पर नाना पटोले का पलटवार,सियासी भूचाल

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है.. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम के आदर्शों से की..

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है.. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम के आदर्शों से की..

जिस पर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कड़ी आपत्ति जताई.. पटोले ने फिर सफाई दी कि उन्होंने राहुल की सीधी तुलना राम से नहीं की.. बल्कि कहा कि राहुल राम के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं.. यह विवाद राहुल गांधी के अयोध्या स्थित राम मंदिर न जाने को लेकर शुरू हुआ.. जो अब महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा रहा है.. भाजपा ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताया है.. जबकि कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज उठाने का मुद्दा मान रही है..

राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख नेता.. और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं.. उन्होंने अभी तक अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के दर्शन नहीं किए हैं.. यह मुद्दा महाराष्ट्र में तब सुर्खियां बना जब कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले से इस बारे में सवाल किया गया.. पटोले ने 1 जनवरी 2026 को एक इंटरव्यू में कहा कि राहुल गांधी भगवान राम के आदर्शों पर चल रहे हैं.. उन्होंने बताया कि भगवान राम ने शोषित.. और पीड़ित लोगों के लिए न्याय किया था.. और राहुल गांधी आज वही काम कर रहे हैं.. पटोले ने कहा कि राहुल गांधी श्री राम के दिखाए मार्ग पर चलकर काम कर रहे हैं.. जिस तरह भगवान राम ने उस समय पीड़ितों को न्याय दिया.. वैसा ही राहुल गांधी आज कर रहे हैं..

वहीं यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में आग की तरह फैल गया.. भाजपा ने तुरंत इसे चाटुकारिता और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया.. भाजपा नेता सीआर केसवन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि यह हिंदू भावनाओं का गंभीर अपमान है.. और उन्होंने पूछा कि नाना पटोले राहुल गांधी को भगवान राम से कैसे जोड़ सकते हैं.. इसी तरह, भाजपा के एक और नेता अतुल भटखलकर ने कहा कि राहुल गांधी जैसे व्यक्ति की तुलना भगवान राम से करना पूरे हिंदू समाज का अपमान है..

इस बयान पर सबसे ज्यादा ध्यान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की प्रतिक्रिया ने खींचा.. स्वामी रामभद्राचार्य, जो एक सम्मानित संत और रामायण के विशेषज्ञ हैं.. उन्होंने नागपुर में 1 जनवरी 2026 को कहा कि यह सरासर चाटुकारिता है.. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति भगवान राम को समझ ही नहीं पाया है.. श्री राम और राहुल गांधी की किसी भी तरह से तुलना नहीं की जा सकती.. भगवान ही जानें राहुल गांधी किस तरह का काम कर रहे हैं.. स्वामी जी ने आगे कहा कि ऐसी तुलना व्यर्थ है और इससे कोई फायदा नहीं.. उनका यह बयान एएनआई न्यूज एजेंसी को दिया गया था..

स्वामी रामभद्राचार्य की बातों ने विवाद को और बढ़ावा दिया.. वे अक्सर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं.. और उनकी बातों को लाखों लोग मानते हैं.. इस प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र में भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका मिल गया.. भाजपा ने कहा कि कांग्रेस हिंदू देवताओं का अपमान कर रही है.. जबकि वे खुद को राम भक्त बताते हैं..

विवाद बढ़ने पर नाना पटोले ने अगले ही दिन अपनी सफाई दी.. और उन्होंने एएनआई को बताया कि उन्होंने राहुल गांधी की सीधी तुलना भगवान राम से नहीं की है.. पटोले ने कहा कि रामभद्राचार्य जी बड़े और सम्मानित व्यक्ति हैं.. इसलिए मैं उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करूंगा.. लेकिन राहुल गांधी की लड़ाई किसानों, गरीबों और वंचितों के हक के लिए है.. और उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग राहुल गांधी के काम को देख नहीं पाते क्योंकि वे अंधे हैं और सच्चाई समझ नहीं सकते.. पटोले ने स्पष्ट किया कि राहुल जो कर रहे हैं.. वह देश के हित में है..

पटोले ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का उदाहरण दिया.. उन्होंने कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक और मणिपुर से मुंबई तक की ये यात्राएं सिर्फ राजनीतिक नहीं थीं.. बल्कि शोषित लोगों की आवाज उठाने के लिए थी.. पटोले ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे भगवान राम को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.. वैसे ही राहुल गांधी को आज संघर्ष करना पड़ रहा है.. लेकिन उन्होंने दोहराया कि यह तुलना नहीं, बल्कि आदर्शों की बात है..

वहीं यह विवाद राहुल गांधी के राजनीतिक सफर से जुड़ा है.. राहुल गांधी ने 2022-2023 में भारत जोड़ो यात्रा की.. जिसमें उन्होंने गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर बात की.. इस यात्रा में लाखों लोग जुड़े.. और इसे कांग्रेस की वापसी का प्रतीक माना गया.. पटोले ने इसी का जिक्र किया कि राहुल गांधी शोषित वर्ग के लिए लड़ रहे हैं.. राम मंदिर का मुद्दा पुराना है.. 2024 में राम मंदिर का उद्घाटन हुआ.. लेकिन कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.. राहुल गांधी ने कहा था कि यह राजनीतिक कार्यक्रम है.. पटोले ने पहले भी राम मंदिर पर बयान दिया था.. मई 2024 में उन्होंने कहा था कि अगर इंडिया गठबंधन सत्ता में आया तो राम मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे.. क्योंकि उद्घाटन शंकराचार्यों की सलाह के खिलाफ हुआ था.. यह बयान भी विवादास्पद था..

भाजपा ने इसे जोड़कर कहा कि कांग्रेस राम विरोधी है.. भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस ने राम मंदिर का विरोध किया.. और अब राम से तुलना कर रही है.. उन्होंने चुनावी हिंदू का तंज कसा.. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने 2007 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर राम को काल्पनिक बताया था.. वहीं इस विवाद पर कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी.. लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने भी पटोले के बयान की आलोचना की.. और उन्होंने कहा कि ऐसी तुलना अनुचित है.. वहीं, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पटोले का समर्थन किया.. कांग्रेस सांसद तारेक अनवर ने कहा कि पटोले का बयान गलत नहीं है..

महाराष्ट्र में यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है.. क्योंकि यहां विधानसभा चुनाव हाल ही में हुए हैं.. और राजनीतिक पार्टियां अभी भी सक्रिय हैं.. कांग्रेस महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन का हिस्सा है.. और भाजपा सत्ता में है.. यह बयान कांग्रेस को बैकफुट पर ला सकता है.. क्योंकि राम मंदिर का मुद्दा भावनात्मक है.. भाजपा इसे हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर रही है.. पटोले पहले भी विवादों में रहे हैं.. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर बयान दिया था.. जो विवादास्पद था.. पटोले गांधीवादी विचारधारा की बात करते हैं.. और कहते हैं कि देश गांधी के रास्ते पर चलेगा, न कि हिंदुत्व पर..

भारतीय राजनीति में राम का जिक्र आम है.. भाजपा राम मंदिर को अपनी उपलब्धि बताती है.. जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा मानती है.. वहीं कांग्रेस का राम से पुराना रिश्ता है.. 1937 में जवाहरलाल नेहरू के समय वंदे मातरम गीत पर विवाद हुआ था.. 2007 में कांग्रेस सरकार ने राम सेतु पर हलफनामा दिया कि राम काल्पनिक हैं.. लेकिन राहुल गांधी ने 2019 चुनाव में मंदिर दर्शन किए थे.. यह दिखाता है कि कांग्रेस चुनावों में हिंदू छवि बनाती है.. लेकिन भाजपा इसे चुनावी हिंदू कहती है..

यह विवाद दिखाता है कि भारत में धर्म और राजनीति कितने जुड़े हैं.. पटोले का बयान अच्छा इरादा था, लेकिन गलत समझा गया.. स्वामी रामभद्राचार्य की प्रतिक्रिया ने इसे बड़ा बना दिया.. कांग्रेस कहती है कि राहुल गरीबों के लिए लड़ रहे हैं.. जबकि भाजपा इसे अपमान मानती है..

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