उत्सवों पर करोड़ों खर्च, पुलिस की सैलरी पर संकट! भूपेंद्र सरकार से सवाल

गुजरात राज्य में एक तरफ भव्य उत्सवों.. और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है.. वहीं दूसरी तरफ राज्य की सुरक्षा में दिन-रात लगे पुलिस कर्मियों के वेतन में देरी हो रही है

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गुजरात राज्य में एक तरफ भव्य उत्सवों.. और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है.. वहीं दूसरी तरफ राज्य की सुरक्षा में दिन-रात लगे पुलिस कर्मियों के वेतन में देरी हो रही है.. यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है..

हाल ही में गुजरात पुलिस के लेखा अधिकारी धवल बवाड़िया ने एक परिपत्र जारी किया.. जिसमें कहा गया कि ग्रांट की कमी के कारण दिसंबर 2025 के वेतन बिलों को समय पर ट्रेजरी में जमा नहीं किया जा सका.. इससे करीब 1 लाख से ज्यादा पुलिस कर्मी प्रभावित हो सकते हैं.. विपक्ष ने इसे सरकार की आर्थिक कुप्रबंधन का सबूत बताया है.. जबकि सरकार का कहना है कि जल्द ही समस्या हल कर ली जाएगी..

गुजरात सरकार हर साल कई बड़े आयोजनों पर भारी-भरकम रकम खर्च करती है.. इनमें कांकड़िया कार्निवल, अहमदाबाद फ्लावर शो.. और इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल जैसे कार्यक्रम शामिल हैं.. ये आयोजन राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देते हैं.. और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलता है.. लेकिन सवाल यह है कि जब पुलिस जैसे आवश्यक विभाग के लिए ग्रांट की कमी हो रही है.. तो इन उत्सवों पर इतना खर्च क्यों..

कांकड़िया कार्निवल 2025 का उद्घाटन खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था.. इस दौरान ड्रोन शो और अन्य कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए.. इसी तरह, अहमदाबाद इंटरनेशनल फ्लावर शो 2026 के लिए टिकट दरें तय की गई हैं.. जिसमें प्राइम टाइम स्लॉट्स और स्पेशल ऑफर्स शामिल हैं.. इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल भी हर साल जनवरी में आयोजित होता है.. जो पर्यटकों को आकर्षित करता है.. पुराने आंकड़ों के अनुसार गुजरात सरकार ने 2017-2019 के बीच सिर्फ काइट फेस्टिवल पर 15.51 करोड़ रुपये खर्च किए थे.. इसी तरह, रण उत्सव और पतंग उत्सव जैसे दो कार्यक्रमों पर 2014-2015 में 14.74 करोड़ रुपये लगे थे.. 2013-2014 में तीन प्रमुख उत्सवों पर 28.29 करोड़ रुपये खर्च हुए.. पिछले दो सालों में पर्यटन उत्सवों पर कुल 57 करोड़ रुपये खर्च हुए.. जिसमें से 55 करोड़ सिर्फ सजावट पर थे..

जानकारी के अनुसार राज्य के पर्यटन विभाग का बजट भी लगातार बढ़ रहा है.. 2001-02 में यह मात्र 12 करोड़ रुपये था.. जो 2024-25 में 1620.06 करोड़ रुपये हो गया.. वहीं ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार पर्यटन.. और उत्सवों को प्राथमिकता दे रही है.. लेकिन पुलिस जैसे बुनियादी विभागों पर ध्यान कम है.. दिसंबर 2025 में पुलिस विभाग में ग्रांट की कमी से वेतन भुगतान में देरी की खबर ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है.. यह पहली बार नहीं है जब पुलिस की सैलरी में देरी हुई हो.. अगस्त 2025 में अहमदाबाद के 7000 पुलिस कर्मियों की सैलरी पोर्टल अपडेट के कारण लेट हुई थी..

30 दिसंबर 2025 को गुजरात पुलिस के लेखा अधिकारी धवल बवाड़िया ने एक आधिकारिक परिपत्र जारी किया.. इसमें स्पष्ट लिखा है कि पर्याप्त ग्रांट उपलब्ध न होने के कारण पुलिस कर्मियों के वेतन भुगतान में देरी हो सकती है.. इस परिपत्र के अनुसार, दिसंबर 2025 के वेतन बिलों को 23 दिसंबर तक ट्रेजरी में जमा करने की समय सीमा थी.. लेकिन ग्रांट की कमी से यह संभव नहीं हो सका.. अब देरी से बिल जमा करने की अनुमति मांगी गई है..

करीब 1 लाख से ज्यादा पुलिस कर्मी और उनके परिवार इस देरी से परेशान हैं.. नए साल की शुरुआत में सैलरी न मिलने से उनके घरों में आर्थिक संकट आ सकता है.. बच्चों की पढ़ाई, बैंक की किस्तें, घर का किराया.. और रोजमर्रा के खर्च कैसे पूरे होंगे, यह बड़ा सवाल है.. एक पुलिस कर्मी ने बताया कि हम दिन-रात ड्यूटी करते हैं, लेकिन सैलरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.. उत्सवों पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं.. लेकिन हमारे लिए पैसे नहीं..

वहीं पुलिस कर्मी राज्य की सुरक्षा की रीढ़ हैं.. वे त्योहारों, चुनावों और रोजाना की कानून व्यवस्था में लगे रहते हैं.. लेकिन सैलरी में देरी से उनका मनोबल टूट रहा है.. हजारों परिवार प्रभावित हैं.. एक पुलिसकर्मी की पत्नी ने बताया कि हमारे घर में दो बच्चे हैं.. स्कूल फीस, दवाई और राशन का खर्च कैसे चलेगा.. सरकार उत्सवों पर खर्च कर रही है.. लेकिन हमें भूल गई..

गुजरात पुलिस कांस्टेबल की सैलरी 2025 में 27,000 से 30,000 रुपये महीना है.. जो जगह, भत्तों और अनुभव पर निर्भर करती है.. लेकिन देरी से ये रकम भी समय पर नहीं मिल रही.. इससे न सिर्फ आर्थिक तनाव बढ़ रहा है.. बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है.. विपक्ष का कहना है कि यह सरकार की खराब आर्थिक स्थिति का प्रमाण है.. राज्य पर लाखों करोड़ का कर्ज है, फिर ग्रांट की कमी कैसे..

विपक्ष ने इस मुद्दे पर भूपेंद्र पटेल सरकार को घेरा है.. कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने कहा कि पुलिस विभाग में ग्रांट की कमी से 1 लाख पुलिसकर्मियों की सैलरी लेट होगी.. यह राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाता है.. युवराजसिंह जडेजा जैसे नेताओं ने X पर पोस्ट कर कहा कि नए साल में पुलिस को सैलरी नहीं मिलेगी.. सरकार उत्सवों पर करोड़ों खर्च कर रही है..

विपक्ष का तर्क है कि सरकार की प्राथमिकताएं गलत हैं.. जनता के टैक्स से उत्सवों पर खर्च हो रहा है.. लेकिन सुरक्षा बलों के लिए पैसे नहीं है.. जिसको लेकर गुजरात समाचार ने लिखा कि जनता के खिस्से पर भार या सरकार की प्राथमिकता में खामी.. यह मुद्दा अब राजनीतिक हो गया है.. जहां विपक्ष सरकार की विफलता का सबूत बता रहा है..

पिछले कई मौकों पर भी ऐसी समस्याएं आई हैं.. तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण कर्मियों की सैलरी में देरी की थी.. गुजरात में भी अप्रैल 2025 में बेरोजगार युवाओं ने नौकरियों की मांग की.. लेकिन पुलिस ने उन्हें पीटा.. ये घटनाएं दिखाती हैं कि सरकारी विभागों में संसाधनों की कमी एक पुरानी समस्या है..

राज्य सरकार के प्रवक्ता और मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि पुलिस कर्मियों का वेतन तय समय सीमा में देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.. सरकार का दावा है कि ग्रांट जल्द जारी की जाएगी और देरी अस्थायी है.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में कर्मचारी हितों के फैसले लिए हैं.. जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते में वृद्धि और एरियर्स का एकमुश्त भुगतान की यौजना बनाई है.. इससे 4.69 लाख कर्मचारी और 4.82 लाख पेंशनर्स को फायदा हुआ है..

सरकार का कहना है कि उत्सव पर्यटन बढ़ाते हैं.. जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं.. लेकिन पुलिस ग्रांट की कमी पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.. 2025-26 के आउटकम बजट में भी ऐसी समस्याओं का जिक्र है.. मुख्यमंत्री ने दिसंबर 2025 में कहा कि हम रिएक्टिव हायरिंग से दूर होकर 10 साल की हायरिंग कैलेंडर की ओर जा रहे हैं.. लेकिन सैलरी देरी जैसे मुद्दे इन दावों पर सवाल उठाते हैं..

गुजरात में पुलिस सुधार लंबे समय से लंबित हैं.. 1995 से पुलिस रिफॉर्म्स पेंडिंग हैं.. 2022 में सरकार ने पुलिस कांस्टेबल्स और आंगनवाड़ी वर्कर्स की सैलरी बढ़ाई थी.. लेकिन 2025 में आईएएस की कमी और पुलिस रैंक्स की पतली स्थिति ने कॉमनवेल्थ गेम्स बिड पर असर डाला.. वहीं यह देरी न सिर्फ पुलिस मोराल को प्रभावित करेगी.. बल्कि राज्य की सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है.. जब पुलिसकर्मी आर्थिक तनाव में होंगे, तो उनकी ड्यूटी पर फोकस कम हो सकता है.. विपक्ष मांग कर रहा है कि सरकार ग्रांट जल्द जारी करे.. और भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों..

वहीं यह मुद्दा दिखाता है कि सरकार को प्राथमिकताएं तय करने की जरूरत है.. उत्सव महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पुलिस जैसे आवश्यक सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.. सरकार को ग्रांट जारी कर पुलिसकर्मियों को राहत देनी चाहिए.. विपक्ष से स्पष्ट जवाब मांगा जा रहा है.. अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए.. तो पुलिस महकमे में असंतोष बढ़ सकता है..

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