बृजभूषण के क्यों बांधे अखिलेश की तारीफों के पुल, बीजेपी में मची खलबली!

सूबे की सियासत में बड़ा कद और नाम रखने वाले नेताओं में शुमार पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। उन्होंने ऐसा बयान दे दिया है जिसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सूबे की सियासत में बड़ा कद और नाम रखने वाले नेताओं में शुमार पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। उन्होंने ऐसा बयान दे दिया है जिसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उनका ये बयान सियासी पंडितों को भी सोचने पर मजबूर कर दे रहा है कि आखिर आगामी चुनाव में बृजभूषण किधर रुख करने वाले हैं। दरअसल बृजभूषण शरण सिंह विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी राजनीतिक खिचड़ी पका रहे हैं जिसने बीजेपी की नींद उड़ा दी है। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव को लेकर कहा कि वो अखिलेश यादव के एहसान ज़िन्दगी में कभी नहीं भूलेंगे। जिसके बाद से अटकलों का बाजार गर्म है। ऐसे में इसे बीजेपी खतरे के रूप में देख रही है क्योंकि बृजभूषण सिंह जैसे बड़े नेता का झुकाव प्रदेश में विपक्ष की भूमिका निभा रहे अखिलेश यादव की तरफ होना कोई मामूली बात नहीं है।

लेकिन ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि सपा मुखिया ने ऐसा क्या किया जिसे लेकर बृजभूषण सिंह उनकी तारीफों के पुल बाँध रहे हैं। दरअसल एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के कठिन दौर को याद करते हुए बृजभूषण ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘जब मैं खराब दौर से गुजर रहा था, तब अखिलेश यादव ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। मैं उसका एहसान कभी नहीं भूलूंगा। जो एहसान भूल जाता है, उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलती’.

साथ ही राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए बृजभूषण ने कहा- राहुल गांधी मेरे निशाने पर नहीं हैं, लेकिन जब वह सेना और सनातन पर सवाल उठाते हैं तो एक आम नागरिक के रूप में मुझे तकलीफ होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल के सलाहकार वामपंथी सोच के हैं, जो देश की मिट्टी से जुड़े नहीं हैं। इसी वजह से वह ऐसे मुद्दे उठाते हैं, जो पाकिस्तान में पसंद किए जाते हैं। लखनऊ में काम निकलवाने के लिए विधायक पैर छूते हैं पॉड-कास्ट में बृजभूषण अपने पुराने बयान पर कायम दिखे। उन्होंने कहा- आज भी लखनऊ में विधायक अपने काम निकलवाने के लिए अधिकारियों के पैर छूते हैं। कुछ सजातीय होते हैं, कुछ उम्र में बड़े होते हैं, तो पैर छू लिए जाते हैं। सीएम योगी और अमित शाह को न्योता दिया बृजभूषण ने बताया कि उनके यहां होने वाली राष्ट्र कथा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रण दिया गया है।

2029 चुनाव पर साफ इरादा जताते हुए उन्होंने बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल अपमान का घाव भरूंगा चुनाव को लेकर बृजभूषण ने कहा- मुझे जनता ने नहीं हटाया, साजिश ने हटाया। इसीलिए एक बार फिर जनता के बीच जाऊंगा। अपमान का घाव भरूंगा। हालांकि, कहां से लडूंगा, यह जनता तय करेगी। कोशिश होगी कि भाजपा से ही जाऊं। अगर पार्टी बेटे को टिकट देती है तो वह भी चुनाव लड़ेंगे, लेकिन मेरा मन है कि मैं खुद एक बार लोकसभा जरूर जाऊं।

पूर्व सांसद ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि और सीनियर राजनेता होने के बावजूद मुझे राम मंदिर के उद्घाटन न्योता नहीं दिया गया। इसका हमेशा दुख रहेगा। जब तक जिंदा हूं, इस बात का अफसोस रहेगा। यह धोखा था। दूसरी बार जब न्योता आया तो मैंने खुद हाथ जोड़कर मना कर दिया, क्योंकि मैं स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकता। राम जन्मभूमि आंदोलन में जिनका कोई योगदान नहीं था, उन्हें बुलाया गया और असली कारसेवकों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा राम जन्मभूमि आंदोलन में जिनका कोई योगदान नहीं था, उन्हें बुलाया गया और असली कारसेवकों को नजरअंदाज किया गया। हीरो-हीरोइन बुला लिए गए, उनका क्या योगदान था? क्या मंदिर निर्माण में हमसे या विनय कटियार से ज्यादा योगदान था उनका? मैं अब तक रामलला दर्शन के लिए नहीं गया। अब जब जाऊंगा तो आम बनकर। लाइन में लगकर दर्शन करूंगा। पास और खास के सहारे नहीं जाऊंगा।

बृजभूषण लग्जरी लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। डेढ़ करोड़ रुपए का घोड़ा भी उनकी अस्तबल की शान बढ़ा रहा है। इसे उन्होंने खरीदा नहीं था, बल्कि गिफ्ट में मिला था। गिफ्ट देने वाले सांसद बेटे करण भूषण सिंह के दोस्त हैं। बृजभूषण ने खुद घोड़े का वेलकम किया था। उसे दुलारा था। जब उन्हें इसकी कीमत का पता चला तो ठहाका लगाते हुए कहा- यार, हम तो पागल हो जाएंगे। इस गिफ्ट से पहले यहां तीन महंगे मारवाड़ी घोड़े पहले से मौजूद थे। इनमें से एक बादल, कीमत करीब 10 लाख रुपए और दूसरा बुलेट, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है। नए घोड़े के आने के बाद अब घोड़ों की संख्या चार हो गई है।

हालांकि 2027 के चुनाव से पहले बृजभूषण का अखिलेश और विपक्ष की तरफ झुकाव देख सपा मुखिया ने भले ही किसी प्रकार की हरी झंडी न दिखाई हो लेकिन बीजेपी खेमे में इस बयान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। अब देखना ये होता है कि 2027 का चुनाव किसके पाले में जाता है और इसे लेकर बृजभूषण क्या भूमिका निभाते हैं।

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