चुनाव से पहले विपक्ष की सुनियोजित राजनीतिक घेराबंदी!

- आईपैक के बहाने ममता को अस्थिर करने की कोशिश
- लालू यादव पर आरोप तय, तेजस्वी मीसा भी जद में
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। जैसे-जैसे देश चुनावी साल की ओर बढ़ रहा है वैसे वैसे विपक्ष के बड़े चेहरों के इर्द गिर्द कानूनी प्रशासनिक और नैरेटिव का घेरा कसता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में आईपैक के बहाने ममता बनर्जी की चुनावी मशीनरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो बिहार में अदालत के फैसले के जरिये लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और मीसा भारती एक बार फिर कठघरे में खड़े कर दिए गए हैं। सवाल अब सिर्फ कानून का नहीं रहा। सवाल टाइमिंग का है इरादों का है और राजनीति का है।
ममता बनर्जी से सवाल
भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा है कि एक प्राइवेट कंपनी पर रेड हो रही है और एक जगह नहीं बल्कि आठ से दस जगहों पर रेड हो रही है। उसे बचाने के लिए ममता बनर्जी खुद क्यों उतरी। उन्होंने सवाल पूछा है कि जिनके ऊपर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है वही कंपनी को बचाने के लिए खुद उतर गईं।,
टारगेट पर ममता बनर्जी
उधर बंगाल में तस्वीर और भी साफ दिखती है। ममता बनर्जी को चुनावी मैदान में हराने में असफल रही भाजपा अब उनकी रणनीति उनके सलाहकार और उनके सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। आईपैक को निशाना बनाकर यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि ममता की जीत जनादेश नहीं प्रबंधन की देन थी। यह सीधा सीधा लोकतांत्रिक फैसले को कमजोर करने की कोशिश है।
अलग-अलग नहीं हैं दोनों घटनाएं
इन दोनों घटनाओं को अलग अलग देखने की भूल नहीं करनी चाहिए। यह एक ही राजनीतिक स्क्रिप्ट के दो दृश्य हैं जहां चुनाव से पहले विपक्ष के प्रभावशाली चेहरों को या तो अदालतों में उलझाया जाता है या जांच और संदेह के घेरे में रखा जाता है। ममता बनर्जी और लालू-तेजस्वी की राजनीति भले अलग राज्यों में हो लेकिन चुनौती एक ही है और वह है केंद्र की सत्ता को खुली चुनौती। यह संयोग नहीं हो सकता कि जैसे ही विपक्ष संगठित होने की कोशिश करता है वैसे ही उसके स्तंभों पर दबाव बढ़ दिया जाता है। सवाल अब यह नहीं है कि जांच होनी चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि हर जांच चुनाव से पहले ही क्यों तेज हो जाती है? यहीं से यह कहानी सिर्फ बंगाल या बिहार की नहीं रह जाती यह कहानी बन जाती है चुनाव से पहले विपक्ष की सुनियोजित राजनीतिक घेराबंदी की।
छापे के विरोध में गृहमंत्री के आफिस पर प्रर्दशन
तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने आज राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रर्दशन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया। आज का विरोध प्रर्दशन ईडी द्वारा कोलकाता में राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई-पैक के दफ्तर और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के विरोध में किया गया था। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद समेत कई टीएमसी सांसदों ने अमित शाह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन वहां से हटा दिया। वीडियो में पुलिसकर्मी डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा को जबरन उठाकर वहां से ले जाते हुए दिखे।
लालू परिवार पर कसता शिकंजा
बिहार में लैंड फार जाब मामले में जहां लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय किए गए हैं वहीं 52 अन्य आरोपियों को बरी किया जाना अपने आप में यह संकेत देता है कि मामला उतना एकतरफा नहीं है जितना राजनीतिक शोर में बताया जा रहा है। तेजस्वी यादव जो आज भाजपा के लिए बिहार में सबसे बड़ा चुनावी खतरा माने जाते हैं अचानक ऐसे वक्त में दबाव में हैं जब वह खुलकर मंडल बनाम कमंडल की राजनीति में आक्रामक भूमिका निभा रहे हैं। रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई के जज विशाल गोगने ने अपना फैसला सुनाया। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के नाम अचल संपत्तियां जुटाईं। अदालत के अनुसार इस पूरे मामले में अन्य आरोपियों ने भी आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से सहयोग किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय सिस्टम चल रहा था जिसके तहत कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनके या उनके परिजनों की जमीन ली गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे जबकि अन्य आरोपियों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में मदद की।
ईडी पहुंची कोर्ट
ईडी ने अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया कि उसकी जांच में जानबूझकर रुकावट पैदा की गई ताकि काम प्रभावित हो। ईडी की ओर से दायर याचिका में मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। एजेंसी ने अदालत में आवेदन दाखिल कर इस संबंध में केस दर्ज करने की अनुमति मांगी। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुनवाई की मांग भी की गई। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शुभ्रा घोष ने ईडी को मामला दर्ज करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस याचिका पर दोपहर 2:30 बजे सुनवाई तय की है। ईडी के वकील ने अदालत को बताया कि गुरुवार को की गई जांच के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई अहम दस्तावेज और जानकारियां अपने साथ ले गयी जिससे जांच में प्रत्यक्ष रूप से बाधा उत्पन्न हुई। यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली है और इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।



