मंदिर में तस्करी का शक! धर्मेश्वर महादेव मंदिर से 37 बाघ की खालें और पंजे बरामद
गुजरात के धर्मेश्वर महादेव मंदिर से 37 बाघ की खालें और पंजे बरामद होने से सनसनी फैल गई है... इस चौंकाने वाले खुलासे ने वन्यजीव...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के नर्मदा जिले में राजपिपला शहर के पास स्थित धर्मेश्वर महादेव मंदिर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है.. मंदिर के पुराने भवन में छिपाई गईं बाघ की खालें.. और पंजे मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.. यह मामला वन्यजीव तस्करी से जुड़ा लगता है.. और अब इंटेलिजेंस ब्यूरो और वन विभाग मिलकर इसकी गहन जांच कर रहे हैं.. घटना की जानकारी मिलते ही कानून प्रवर्तन एजेंसियां सक्रिय हो गईं.. और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है.. जांच के दौरान मंदिर के पूर्व पुजारी महाराज माधवानंद स्वामी का पासपोर्ट भी बरामद हुआ है.. जिससे उनके विदेशी संपर्कों की जांच शुरू हो गई है.. शुरुआती जानकारी के अनुसार माधवानंद स्वामी मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले थे..
जानकारी के अनुसार यह घटना गुजरात में वन्यजीव तस्करी की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है.. वन विभाग ने जांच का दायरा मध्य प्रदेश तक बढ़ा दिया है.. और बरामद सामग्री के स्रोत की तलाश की जा रही है.. क्या यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है.. क्या अन्य राज्य भी इसमें शामिल हैं.. इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच तेज हो गई है.. आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई है कि कुल 37 पूरी बाघ की खालें.. जिन्हें रॉयल बंगाल टाइगर की खाल के रूप में जाना जाता है.. और 4 खाल के टुकड़े और लगभग 133 बाघ के पंजे बरामद किए गए हैं.. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह एक गंभीर अपराध है.. मंदिर के ट्रस्टियों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी.. जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई..
रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर जिग्नेश सोनी.. और उनकी टीम मंदिर पहुंची, जगह का निरीक्षण किया और सभी सामग्री जब्त कर ली.. अब आईबी और वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं.. वहीं आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की उम्मीद है.. आपको बता दें कि यह खबर न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला रही है.. बता दें कि धर्मेश्वर महादेव मंदिर गुजरात के नर्मदा जिले में राजपिपला शहर के नजदीक स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है.. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है.. और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं.. मंदिर का पुराना भवन इन दिनों मरम्मत के काम से गुजर रहा था.. इसी दौरान, एक कमरे से अजीब सी बदबू आने की शिकायत मिली.. यह कमरा मंदिर के पूर्व पुजारी माधवानंद स्वामी का था.. जो करीब पांच महीने पहले, यानी जुलाई 2025 में.. 90 साल की उम्र में गुजर चुके थे.. माधवानंद स्वामी कई सालों से मंदिर में रहते थे.. और पूजा-अर्चना का काम संभालते थे..
मंदिर के ट्रस्टियों को संदेह हुआ.. और उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी.. पुलिस ने कमरे की तलाशी ली.. तो वहां एक लोहे की पेटी में छिपाई गईं बाघ की खालें.. और पंजे मिले.. कुल मिलाकर 37 पूरी खालें, 4 टुकड़े और 133 पंजे बरामद हुए.. यह खालें रॉयल बंगाल टाइगर की बताई जा रही हैं.. जो भारत का राष्ट्रीय पशु है.. और लुप्तप्राय प्रजाति में आता है.. खालों की हालत देखकर लगता है कि ये काफी पुरानी हैं.. लेकिन इनकी असलियत की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में भेजा गया है..
ट्रस्टियों ने बताया कि माधवानंद स्वामी कभी किसी को अपने कमरे में नहीं आने देते थे.. उनकी मौत के बाद कमरा बंद पड़ा था.. और मरम्मत के दौरान ही यह राज खुला.. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह गुजरात में अब तक की सबसे बड़ी वन्यजीव सामग्री की बरामदगी है.. पहले भी छोटे-मोटे मामले सामने आए हैं.. लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में पहली बार मिला है.. बता दें यह घटना 8 जनवरी को सामने आई.. और अगले ही दिन मीडिया में सुर्खियां बनी..
माधवानंद स्वामी को महाराज माधवानंद के नाम से भी जाना जाता था.. मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले थे.. वे कई दशकों से गुजरात के इस मंदिर में रह रहे थे.. जांच के दौरान उनके कमरे से एक पुराना पासपोर्ट मिला.. जिसमें 12 फरवरी 1977 की एक एंट्री है.. इस एंट्री से पता चलता है कि वे अमेरिका गए थे.. अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि अमेरिका में वे किन लोगों से मिले थे.. और क्या उन संपर्कों का वन्यजीव तस्करी से कोई लिंक है..
माधवानंद स्वामी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वे एक साधु थे.. और मंदिर में कई साधु-संत उनके पास आते-जाते रहते थे.. मध्य प्रदेश से कई साधु यहां आते थे.. क्या ये साधु तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा थे.. यह जांच का विषय है.. वन विभाग ने माधवानंद स्वामी के परिवार.. और पुराने साथियों से पूछताछ शुरू कर दी है.. उनके मध्य प्रदेश कनेक्शन की वजह से जांच का दायरा वहां तक बढ़ाया गया है.. मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व ज्यादा हैं.. जैसे कान्हा और पेंच, जहां से बाघों की तस्करी की खबरें पहले भी आती रही हैं..
पासपोर्ट की जांच से यह भी पता चला है कि माधवानंद स्वामी के विदेशी यात्राओं के रिकॉर्ड पुराने हैं.. लेकिन क्या वे तस्करी के लिए इस्तेमाल होते थे.. आईबी इस दिशा में काम कर रही है.. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघ की खाल और पंजों की कीमत करोड़ों में होती है.. एक पूरी खाल 5 से 10 लाख रुपये तक बिक सकती है.. और पंजे जादू-टोने या दवाओं में इस्तेमाल होते हैं..
वहीं घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया.. रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर जिग्नेश सोनी की टीम ने मंदिर पहुंचकर जगह का मुआयना किया.. सभी सामग्री को जब्त कर लिया गया.. और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.. क्या ये खालें असली हैं या नकली.. यह रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा.. लेकिन शुरुआती जांच में ये असली लग रही हैं..
इंटेलिजेंस ब्यूरो को शामिल किया गया क्योंकि मामला अंतरराज्यीय और संभवत: अंतरराष्ट्रीय लगता है.. आईबी माधवानंद स्वामी के संपर्कों की जांच कर रही है.. क्या कोई बड़ा नेटवर्क है.. जो बाघों की तस्करी करता है.. गुजरात में बाघ कम हैं, इसलिए ये खालें मध्य प्रदेश या अन्य राज्यों से लाई गई होंगी.. वन विभाग ने मध्य प्रदेश के अधिकारियों से संपर्क किया है.. और वहां से बाघों के शिकार की पुरानी घटनाओं की फाइलें खंगाली जा रही हैं..
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या मंदिर में कोई और व्यक्ति शामिल था.. ट्रस्टियों से पूछताछ हो रही है.. स्थानीय पुलिस भी सहयोग कर रही है.. वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को भी सूचना दी गई है.. जो राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाओं की निगरानी करता है.. आने वाले दिनों में गिरफ्तारियां हो सकती हैं, अगर कोई लिंक मिला..
भारत में बाघ संरक्षित प्रजाति है.. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत बाघ की खाल, पंजे या किसी हिस्से को रखना.. बेचना या तस्करी करना गंभीर अपराध है.. शेड्यूल-1 में बाघ शामिल है.. जिसके लिए 3 से 7 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है.. अगर अंतरराष्ट्रीय तस्करी साबित हुई.. तो और सख्त कानून लागू होंगे..



