‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए क्या Nishant की लॉन्चिंग की तैयारी में हैं CM Nitish?

दरअसल, सीएम नीतीश कुमार की प्रस्तावित समृद्धि यात्रा को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चाओं के बाजार गर्म हो गए हैं.......वजह सिर्फ ये नहीं है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पूरे प्रदेश का दौरा कर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने निकल रहे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति और उसके आसपास होने वाले आयोजनों को हमेशा से बेहद अहम माना जाता रहा है…

खास तौर पर दही-चूड़ा भोज को सिर्फ एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं…बल्कि बड़े राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जाता है…कई बार देखा गया है कि इसी दौर में लिए गए फैसले आगे की राजनीति की दिशा तय कर देते हैं…ऐसे ही राजनीतिक माहौल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रस्तावित समृद्धि यात्रा ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है…क्योंकि इस रैली में निशांत कुमार के शामिल होने की खबरे निकलकर सामने आ रही हैं….

दरअसल, सीएम नीतीश कुमार की प्रस्तावित समृद्धि यात्रा को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चाओं के बाजार गर्म हो गए हैं…….वजह सिर्फ ये नहीं है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पूरे प्रदेश का दौरा कर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने निकल रहे हैं….बल्कि इसकी सबसे बड़ी वजह ये मानी जा रही है कि इस यात्रा में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है…अगर ऐसा होता है तो ये पहला मौका होगा…जब निशांत कुमार किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम या रैली में अपने पिता के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आएंगे…यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में ये सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या समृद्धि यात्रा के जरिए नीतीश कुमार अपने बेटे निशांक कुमार की राजनीति में लॉन्चिंग की तैयारी कर रहे हैं?….

अब तक निशांत कुमार को राजनीति से दूर ही रखा गया है…नीतीश कुमार हमेशा ये कहते आए हैं कि उनके बेटे की राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं है और वो निजी जीवन में संतुष्ट हैं…लेकिन राजनीति में अक्सर वही होता है…जो दिखता नहीं, बल्कि जिसकी तैयारी चुपचाप चल रही होती है…समृद्धि यात्रा के दौरान अगर निशांत कुमार मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते हैं…लोगों से मिलते हैं और सरकारी कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं…तो इसे महज पिता के साथ निशांत कुमार का मंच साझा करना नहीं माना जाएगा….बल्कि, बिहार की राजनीति में इसे साफ तौर पर एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जाएगा….

समृद्धि यात्रा की शुरुआत पश्चिमी चंपारण के बेतिया से होनी है और इस दौरान मुख्यमंत्री कई जिलों में रैलियां, सभाएं और समीक्षा बैठकें करेंगे…इस यात्रा का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की समीक्षा, अधिकारियों को दिशा-निर्देश देना और जनता से सीधा संवाद बताया जा रहा है….लेकिन राजनीति में हर यात्रा का एक छिपा हुआ संदेश भी होता है…अगर निशांत कुमार इस यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ लगातार दिखाई देते हैं…तो ये साफ हो जाएगा कि उन्हें धीरे-धीरे जनता के सामने लाने की रणनीति बनाई जा रही है…खास बात ये है कि ये यात्रा ऐसे समय में हो रही है…जब हालही में बिहार के विधानसभा चुनाव हुए हैं…और इस बार के चुनाव में BJP…JDU से बड़ी पार्टी बनकर उभरी है…ऐसे में जेडीयू के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं…

देखिए, नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं…उन्होंने दशकों तक सत्ता और विपक्ष, दोनों भूमिकाओं को बखूबी निभाया है…ऐसे में ये मानना मुश्किल है कि किसी बड़े फैसले के पीछे कोई रणनीति न हो….निशांत कुमार की संभावित मौजूदगी को राजनीतिक जानकार सॉफ्ट लॉन्च की तरह देख रहे हैं…जिसमें बिना औपचारिक घोषणा के किसी नेता को जनता के बीच उतारा जाता है…पहले चरण में उन्हें पिता के साथ देखा जाता है…फिर धीरे-धीरे उनकी अपनी पहचान बनाई जाती है…

ये भी गौर करने वाली बात है कि जेडीयू के अंदर और बाहर…दोनों जगह निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग पहले भी कई बार उठ चुकी है…पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता ये कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू को एक चेहरे की जरूरत होगी और निशांत कुमार इसके लिए सबसे सही ऑपशन हो सकते हैं….खासकर तब, जब बिहार की राजनीति में परिवारवाद एक आम बात बन चुकी है….RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बाद तेजस्वी यादव, पासवान परिवार में चिराग पासवान और रामविलास पासवान का राजनीतिक उत्तराधिकार….इन सभी उदाहरणों के बीच जेडीयू में भी ये सवाल उठता रहा है कि नीतीश कुमार के बाद कौन?

हालांकि नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं…उन्होंने कई बार कहा है कि राजनीति में वंशवाद सही नहीं है और नेता को अपनी मेहनत और काम के दम पर आगे बढ़ना चाहिए….यही वजह है कि अब तक निशांत कुमार को राजनीति से दूर रखा गया…लेकिन जैसा की हम सभी जानते हैं कि समय और परिस्थितियां बदलती हैं….पार्टी के सामने संगठन को मजबूत रखने और भविष्य की नेतृत्व योजना तैयार करने की चुनौती है…ऐसे में निशांत कुमार का नाम बार-बार सामने आना स्वाभाविक है….

वहीं इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर निशांत कुमार को अचानक सक्रिय राजनीति में उतारा जाता है….तो ये जोखिम भरा हो सकता है….इसलिए हो सकता है कि नीतीश कुमार उन्हें पहले जनता के बीच धीरे-धीरे INTRODUCE कराना चाहते हों…….ऐसे में समृद्धि यात्रा इसके लिए एक सुरक्षित मंच हो सकता है…जहां निशांत कुमार बिना किसी औपचारिक राजनीतिक भूमिका के….सिर्फ मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में नजर आएं….इससे जनता की प्रतिक्रिया भी देखी जा सकेगी और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को भी समझा जा सकेगा…..

क्योंकि, पहले भी कई मौकों पर निशांत कुमार को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं…जब भी नीतीश कुमार की सेहत या भविष्य की राजनीति को लेकर सवाल उठते हैं….तब पार्टी के भीतर से ये आवाज उठती है कि निशांत कुमार को आगे आना चाहिए….कुछ नेताओं ने तो खुले तौर से भी कहा है कि अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं…तो उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा….हालांकि खुद निशांत कुमार ने कभी खुलकर राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की है और न ही नीतीश कुमार ने इस पर कोई संकेत दिया है…

हालांकि, समृद्धि यात्रा को इस नजरिए से भी देखा जा रहा है कि ये नीतीश कुमार की बड़ी राजनीतिक यात्राओं में से एक हो सकती है….ऐसे में अगर उनके साथ निशांत कुमार नजर आते हैं…तो ये एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत भी हो सकता है……क्योंकि, बिहार की राजनीति में अक्सर इस तरह के संकेतों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है….जहां एक फोटो, एक मंच साझा करना या एक यात्रा…..इन सबके मायने राजनीतिक तौर पर बहुत बड़े होते हैं….

वहीं विपक्ष भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है…..अगर निशांत कुमार की मौजूदगी पुख्ता होती है….तो विपक्ष इसे नीतीश कुमार के परिवारवाद विरोधी रुख पर हमला करने का मौका जरूर बना सकता है…..आरजेडी और कांग्रेस पहले ही इस मुद्दे को उठा सकते हैं कि जो नेता सालों से परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे….वही अब अपने बेटे को राजनीति में लाने की तैयारी कर रहे हैं….ये सवाल जनता के बीच भी उठ सकता है….वहीं जेडीयू समर्थकों का एक वर्ग इसे जरूरी कदम मान रहा है…उनका कहना है कि हर पार्टी को भविष्य की योजना बनानी होती है और अगर निशांत कुमार में नेतृत्व की क्षमता है….तो उन्हें मौका मिलना चाहिए….जबकि, समर्थकों का ये भी तर्क है कि निशांत कुमार अब तक विवादों से दूर रहे हैं और एक साफ छवि के साथ राजनीति में उतर सकते हैं…

कुल मिलाकर, समृद्धि यात्रा सिर्फ एक सरकारी समीक्षा यात्रा नहीं रह गई है…..ये यात्रा अब राजनीतिक संकेतों और संभावनाओं का केंद्र बन चुकी है….अगर निशांत कुमार इस यात्रा में पहली बार किसी रैली या मंच पर नीतीश कुमार के साथ दिखाई देते हैं….तो इसे महज संयोग नहीं कहा जाएगा….ये माना जाएगा कि नीतीश कुमार अपने बेटे को राजनीति में उतारने की जमीन तैयार कर रहे हैं….भले ही इसकी औपचारिक घोषणा अभी न की जाए……..

आखिर में ये कहना अभी जल्दबाजी होगी कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री तय है….लेकिन इतना तो साफ है कि समृद्धि यात्रा ने इस बहस को एक नई धार दे दी है…जहां पहली बार अगर निशांत कुमार जनता के बीच अपने पिता के साथ नजर आएंगे…तो ये बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी हो सकती है…आने वाले दिनों में ये देखना काफी दिलचस्प होगा कि ये यात्रा सिर्फ विकास और योजनाओं तक सीमित रहती है या फिर सीएम नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकार की कहानी भी यहीं से लिखी जाएगी?

Related Articles

Back to top button